नागपुर संभाग में भूजल 42% नीचे, चंद्रपुर में सबसे ज्यादा 73% की कमी
जीएसडीए के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर के अंत में नागपुर संभाग का भूजल स्तर पिछले 5 साल के औसत से 42% कम रहा।
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नागपुर संभाग में इस बार बारिश कम हुई और उसका सीधा असर जमीन के नीचे के पानी पर दिखने लगा है। भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इससे पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा होने और आने वाली रबी की फसल पर बुरा असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
राज्य सरकार की भूजल सर्वेक्षण और विकास एजेंसी यानी जीएसडीए के ताजा आंकड़े बताते हैं कि सितंबर के अंत में पूरे क्षेत्र का भूजल स्तर पिछले 5 वर्षों के औसत से 42% कम दर्ज किया गया।
जिलों में सबसे बुरा हाल चंद्रपुर का है, जहां भूजल स्तर में 73% की कमी आई है। वर्धा में यह कमी 55% है और नागपुर जिले में भूजल स्तर 52% तक गिर गया है।
जीएसडीए ने तहसील के हिसाब से भी विश्लेषण किया है। संभाग की कुल 64 तहसीलों में से 31 में भूजल स्तर 1 से 2 मीटर तक नीचे गया है। 27 तहसीलों में 1 मीटर तक की कमी आई है। सिर्फ 6 तहसीलें ऐसी हैं, जहां भूजल स्तर में कोई गिरावट नहीं दिखी।
नागपुर मंडल के 6 जिलों में भूजल स्तर औसतन 0.80 मीटर नीचे गया है। सितंबर में वाटर टेबल जमीन से 2.70 मीटर नीचे रहा, जबकि 5 साल का औसत 1.90 मीटर है। यह आकलन नागपुर, वर्धा, भंडारा, चंद्रपुर, गड़चिरोली और गोंदिया जिलों के 622 वेधशाला कुओं के आंकड़ों पर आधारित है।
अब जिलेवार स्थिति देखें। चंद्रपुर जिले में वाटर टेबल 1.25 मीटर गिरकर 2.97 मीटर नीचे पहुंच गया। वर्धा में जल स्तर 1.24 मीटर गिरकर 3.50 मीटर नीचे चला गया, जो इस विभाग में सबसे नीचे का स्तर है। नागपुर में 1.17 मीटर की गिरावट के साथ पानी 3.41 मीटर नीचे पहुंचा।
भंडारा में भूजल स्तर 46% गिरा। वहां वाटर टेबल 0.75 मीटर गिरकर 2.42 मीटर पर आ गया। गड़चिरोली में जल स्तर 0.27 मीटर यानी 16% गिरकर 1.92 मीटर पर पहुंचा। गोंदिया में सबसे कम असर दिखा, जहां जल स्तर सिर्फ 0.12 मीटर यानी 6% गिरा और 1.98 मीटर दर्ज हुआ।