मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

नाशिक में बारिश कम, पांच तालुकों में भूजल गिरा, खरीफ की फसल झुलसी

नाशिक जिले में इस साल बारिश औसत से कम रही और कई तालुकों में भूजल स्तर नीचे गया है।

नाशिक में बारिश कम, पांच तालुकों में भूजल गिरा, खरीफ की फसल झुलसी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नाशिक जिले में बारिश के बीच लंबा गैप पड़ने से खरीफ का सीजन पूरी तरह झुलस गया है। खबर है कि किसानों के हाथ में उत्पादन का खर्च भी नहीं आएगा। इसलिए जिले के किसान अब सरकार से मिलने वाली आर्थिक मदद की राह देख रहे हैं। दूसरी तरफ इस बार बारिश औसत से कम हुई है, जिससे जिले पर पानी की किल्लत का साया मंडरा रहा है।

भूजल सर्वेक्षण और विकास यंत्रणा की रिपोर्ट के मुताबिक जून से सितंबर 2025 के आखिर तक नाशिक जिले में बारिश औसत के मुकाबले 23.96 फीसदी कम दर्ज की गई। जिले में सालाना औसत बारिश 1000.32 मिमी है, लेकिन इस बार सितंबर के आखिर तक सिर्फ 765.55 मिमी पानी गिरा। यानी 234.67 मिमी की कमी रही, और रिपोर्ट में कमी का अनुपात 23.46 फीसदी बताया गया है। इसका असर फसलों पर ही नहीं, भूजल स्तर पर भी पड़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक हर पानलोट क्षेत्र (वाटरशेड) के लिए दो से तीन निरीक्षण कुएं तय किए गए हैं। सितंबर के आखिर में इन कुओं का जलस्तर नोट किया गया और उसे सितंबर महीने के पिछले पांच साल के औसत स्थिर भूजल स्तर से मिलाया गया।

इस तुलना में येवला तालुका में 3 मीटर से ज्यादा की गिरावट मिली। चांदवड, देवला, मालेगांव, नांदगांव और सिन्नर में पानी का स्तर 2 से 3 मीटर तक नीचे गया है। नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में गिरावट 0 से 1 मीटर के बीच है। सिर्फ दिंडोरी और निफाड में जलस्तर में थोड़ी बढ़ोतरी दिखी है।

रिपोर्ट के मुताबिक बारिश की कमी और भूजल में इस बड़ी गिरावट से जलस्रोतों पर दबाव काफी बढ़ने की आशंका है। जो किसान कुओं, बोरवेल और दूसरे भूजल स्रोतों पर निर्भर हैं, उनके लिए यह हालात बहुत चिंता वाले हैं। खास तौर पर जिन तालुकों में बारिश की कमी 25 फीसदी से ज्यादा दर्ज हुई है, वहां खरीफ फसलों के नुकसान के साथ आने वाले रबी सीजन के लिए पानी मिलने का गंभीर सवाल खड़ा हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नाशिक और बागलाण तालुकों में बारिश की कमी 1 से 10 फीसदी रही। भूजल का दोहन बढ़ने और बारिश के रूठने से कुओं और कूपनलिकाओं का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इसलिए आने वाले दिनों में खेती की सिंचाई के साथ पीने के पानी की भी कमी झेलनी पड़ने की पूरी आशंका है।

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