मुंबई के समंदर में तैरते विज्ञापन बार्ज और होर्डिंग की योजना, मछुआरों और पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी
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महाराष्ट्र सागरी मंडल मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और वसई के समुद्र और खाड़ियों में विज्ञापन बार्ज और तेज रोशनी वाले होर्डिंग लगाने की तैयारी में है। पर्यावरण प्रेमी, मछुआरे और आदित्य ठाकरे इसके खिलाफ हैं।
महाराष्ट्र सागरी मंडल (Maharashtra Maritime Board - MMB) के एक नए फैसले को लेकर मुंबई और कोकण के तटीय इलाकों में बहस छिड़ गई है। मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और वसई के समुद्र किनारों और खाड़ियों में 'तैरते विज्ञापन बार्ज' यानी Floating Barges और तेज रोशनी वाले होर्डिंग लगाने की योजना बनी है। सरकार का मकसद राजस्व बढ़ाना है, लेकिन इससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, जैवविविधता और लोगों के हिस्से की खूबसूरती पर सवाल खड़े हो गए हैं।
योजना के तहत मुंबई महानगर प्रदेश (MMR) में करीब 20 से 29 अलग-अलग जगहों पर टेंडर के जरिए विज्ञापन लगाए जाएंगे। इनमें जुहू बीच, कार्टर रोड, मार्वे जेटी, लोटस जेटी, वरली में बांद्रा-वरली सी लिंक का इलाका, वाशी खाड़ी पुल, ऐरोली, गायमुख, घोडबंदर, मुंब्रा और वसई खाड़ी जैसी भीड़भाड़ वाली और संवेदनशील जगहें शामिल हैं। कुछ जगहों पर समुद्र में तैरते बड़े बार्ज पर डिजिटल विज्ञापन चलेंगे, तो कुछ जगहों पर खाड़ियों के पुलों और जेटी के पास पारंपरिक या डिजिटल होर्डिंग लगेंगे।
कमाई का हिसाब भी बड़ा है। जुहू बीच के बार्ज के लिए न्यूनतम सालाना लाइसेंस फीस करीब 31.63 लाख रुपये है, जबकि वाशी पुल के बार्ज के लिए यही फीस 1.02 करोड़ रुपये तक है।
सागरी मंडल के मुताबिक यह प्रस्ताव सिर्फ विज्ञापन का नहीं है। इससे मिलने वाले राजस्व को तट की बंदरगाह सुविधाओं (Port Facilities) के आधुनिकीकरण, रखरखाव और जल परिवहन परियोजनाओं के विकास में लगाया जाएगा। राज्य के बंदरगाह और मत्स्य व्यवसाय मंत्री नितेश राणे के कहने के मुताबिक बोर्ड ने पहले सिर्फ NOC दी थी, अब नियमों का पालन करते हुए इससे राजस्व कमाने का रास्ता खोला जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि सारी पर्यावरणीय मंजूरियां नियमों के हिसाब से ली जाएंगी।
पर्यावरण प्रेमी और वैज्ञानिक इस पर गहरी चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि दिन-रात जलने वाली तेज LED रोशनी समुद्री जीवों का प्राकृतिक चक्र बिगाड़ सकती है। मछलियों के खाना ढूंढने की रफ्तार, उनकी हरकत और जैविक चक्र रोशनी की तीव्रता से गड़बड़ा जाते हैं।
नैट कनेक्ट फाउंडेशन के निदेशक बी. एन. कुमार ने आशंका जताई है कि इस तेज रोशनी से फ्लेमिंगो समेत कई स्थानीय और विदेशी प्रवासी पक्षी रास्ता भटक सकते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में ऐसी ही रोशनी की वजह से एक फ्लेमिंगो भटककर विमान से टकरा गया था। उनके मुताबिक आगे चलकर हवाई सफर की सुरक्षा का भी बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है।
CRZ यानी किनारा नियमन क्षेत्र के नियमों के हिसाब से महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (MCZMA) की मंजूरी जरूरी होती है। आरोप है कि ऐसी मंजूरी मिलने से पहले ही टेंडर मंगा लिए गए।
मछुआरों की रोजी-रोटी का सवाल भी है। मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और वसई के हजारों परिवार पारंपरिक मछली पकड़ने पर जीते हैं। विज्ञापन बार्ज के लंगर, वहां इंसानों की आवाजाही, नाव की मरम्मत और रखरखाव से जल प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। खाड़ियों के प्रदूषण से मछलियां पहले ही घट चुकी हैं। मछुआरा नेता देवेंद्र तांडेल ने गुस्से में पूछा है कि मछली पकड़ने में LED लाइट के इस्तेमाल पर पहले से पाबंदी है, तो प्रशासन समुद्र में इतने बड़े और तेज होर्डिंग कैसे लगा सकता है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी लिखकर इस फैसले में तुरंत दखल देने की मांग की है। चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि "शहर में बढ़ते प्रदूषण की वजह से लोगों को समुद्र साफ दिखना पहले ही मुश्किल हो गया है। ऐसे में ठेकेदारों के व्यावसायिक हित के लिए समुद्र में तैरते होर्डिंग लगाकर मुंबई की कुदरती खूबसूरती बिगाड़ने की यह कोशिश बेहद निंदनीय है।"
ठाकरे ने कहा कि लोग जमीन पर प्रदूषण से जूझ ही रहे हैं, अब कुदरत के करीब जाकर भी उन्हें विज्ञापनों का ढेर देखना पड़ेगा। रात में ट्रैफिक और आंखों के लिए परेशानी बनने वाले LED होर्डिंग को सीमित रखने के लिए उन्होंने ठोस नीति बनाने की जरूरत बताई। उनका साफ रुख है कि ठेकेदारों के आर्थिक फायदे से ऊपर मुंबई की खूबसूरती और पर्यावरण की रक्षा को रखा जाना चाहिए।
इस प्रस्ताव पर पर्यावरण विशेषज्ञों, समुद्री जीवशास्त्रियों, मछुआरों और नागरिकों से गहरी चर्चा करके वैज्ञानिक अध्ययन किया जाना जरूरी है। सरकार को ऐसा बीच का रास्ता निकालना होगा जिसमें मुंबई का किनारा, वहां की जैवविविधता और लोगों की मानसिक सेहत बची रहे। वरना 'क्वींस नेकलेस' के नाम से मशहूर मुंबई का तट आगे चलकर विज्ञापन होर्डिंग के बाजार के नाम से जाना जाने लगे, तो हैरानी नहीं होगी।
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