सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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समारा की नोवोकुयबिशेव्स्क रिफायनरी पर यूक्रेनी ड्रोन हमला, आग और धुएं के गुबार उठे

समारा की नोवोकुयबिशेव्स्क रिफायनरी पर यूक्रेनी ड्रोन हमला, आग और धुएं के गुबार उठे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

यूक्रेनी सेना ने रूस के समारा प्रदेश की नोवोकुयबिशेव्स्क तेल रिफायनरी पर ड्रोन से हमला किया। रिफायनरी में धमाके हुए और भीषण आग लग गई।

रूस और यूक्रेन की जंग में एक बार फिर तनाव भड़क गया है। यूक्रेनी सेना ने रूस के समारा प्रदेश में बनी मशहूर नोवोकुयबिशेव्स्क (Novokuybyshevsk) तेल रिफायनरी पर ड्रोन से जानलेवा हमला किया। यह वही ऊर्जा सेक्टर है, जिसे रूस की आर्थिक और फौजी रीढ़ माना जाता है।

हमले के बाद रिफायनरी के इलाके में आग की ऊंची लपटें उठीं और पूरे आसमान में काला धुआं फैल गया। इस घटना के कुछ वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर तनाव का माहौल बन गया है।

बताया जा रहा है कि करीब दो हफ्ते के वक्फे के बाद यूक्रेन ने रूसी तेल शोधन केंद्रों पर इस तरह का बड़ा हमला किया है। रूस की सीमा के काफी अंदर तक पहुंचकर किए गए इस हमले से रूसी प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अमेरिका के चुनावों की सियासी हलचल और दुनिया के बाजार में ईंधन के बढ़ते दामों के बीच दुनिया भर के राजनीतिक जानकारों की नजर इस हमले पर टिकी है।

मिली जानकारी के मुताबिक यूक्रेन के लंबी दूरी के कामिकाजे ड्रोन ने सीधे नोवोकुयबिशेव्स्क रिफायनरी की मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट्स को निशाना बनाया। चोट लगते ही रिफायनरी परिसर में एक के बाद एक धमाके हुए और भीषण आग लग गई। सोशल मीडिया पर आए 16 सेकंड के एक डैशकैम वीडियो में सड़क से गुजरती गाड़ी से रिफायनरी की तरफ भारी धुआं और आग की लपटें साफ दिखाई दे रही हैं।

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास का पूरा इलाका हिल गया। रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने कुछ ड्रोन गिराने का दावा किया है, लेकिन कई ड्रोन सीधे रिफायनरी के संवेदनशील हिस्सों पर जा गिरे। हमले के बाद दमकल की गाड़ियां फौरन मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश चल रही है।

यह रिफायनरी रूस की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) की पूरी मिल्कियत है। इसे रूसी अर्थव्यवस्था और फौज, दोनों के लिए बेहद अहम माना जाता है। यहां हर साल करीब 88 लाख मीट्रिक टन (8.8 मिलियन टन) कच्चे तेल की प्रोसेसिंग हो सकती है। यहां यूरो-5 मानक का पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल, लुब्रिकेंट, बिटुमेन और पेट्रोलियम कोक जैसे ऊंचे दर्जे के उत्पाद बनते हैं। रूसी वायुसेना के लड़ाकू विमानों के लिए जरूरी खास ईंधन भी बड़े पैमाने पर यहीं से सप्लाई होता है। इसी वजह से इस हमले को रूसी फौज की लड़ने की ताकत पर बड़ी चोट माना जा रहा है।

यूक्रेन पिछले कुछ महीनों से रूस के अंदरूनी इलाकों में तेल डिपो, ऊर्जा प्रोजेक्ट और रिफायनरियों पर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है। इस रणनीति के पीछे उसका मुख्य मकसद मोर्चे पर रूसी फौज को मिलने वाले डीजल और विमान ईंधन की सप्लाई को पूरी तरह बिगाड़ देना है।

इससे पहले अगस्त में भी यूक्रेनी सेना ने इस रिफायनरी को निशाना बनाया था। तब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने आधिकारिक बयान में कहा था कि उनकी फौज ने सीमा से करीब 1,000 किलोमीटर दूर बने रूसी तेल प्रोजेक्ट्स को कामयाबी से तबाह कर दिया है। जेलेंस्की ने साफ कहा था कि इस कार्रवाई का मुख्य मकसद तेल निर्यात से रूस को मिलने वाली अरबों डॉलर की कमाई रोकना और जंग के लिए उसकी आर्थिक सप्लाई काटना है।

अंतरराष्ट्रीय जानकारों ने डर जताया है कि रूसी तेल प्रोजेक्ट्स पर हमलों से दुनिया के बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन ने ईंधन के दाम काबू में रखने और महंगाई रोकने के लिए यूक्रेन को रूसी ऊर्जा ढांचे पर हमले न करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद इस घटना से साफ है कि यूक्रेन ने फिर अपनी आक्रामक मुहिम शुरू कर दी है।

रूसी अधिकारी अब अंदाजा लगा रहे हैं कि इस ताजा हमले से नोवोकुयबिशेव्स्क रिफायनरी को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक अगर रिफायनरी की मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट बंद पड़ गई, तो रूस को रोजाना लाखों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ेगा। रूस-यूक्रेन जंग अब सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रही, वह रूस के अंदरूनी आर्थिक केंद्रों तक पहुंच गई है। यूक्रेन के इन ड्रोन हमलों से रूस की ईंधन सप्लाई पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में रूस इसका क्या जवाब देता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर है।

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