रुबियो बोले, भारत के साथ व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं, जल्द मुंबई और जामनगर आएंगे
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौता अंतिम दौर में है। वे भारत दौरे में मुंबई में जयशंकर से मिलेंगे और जामनगर जाएंगे।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो के भारत दौरे से पहले भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से इंतज़ार किए जा रहे व्यापार समझौते को लेकर मज़बूत संकेत मिले हैं। समरकंद में पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत बहुत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ी है। उनके मुताबिक दोनों देश इस समझौते के 'लैंडिंग पॉइंट' के पास पहुंच गए हैं।
रुबियो ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका अभी भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है और वह इसके बहुत करीब है। इस बयान से अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में काफ़ी दिलचस्पी पैदा हुई है।
भारत दौरे में रुबियो मुंबई में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाक़ात करेंगे। इसके अलावा वे गुजरात के जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े तेल शोधन परिसर का दौरा करेंगे और ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग पर बात करेंगे। इस दौरे को सिर्फ़ दोनों देशों के व्यापार के लिहाज़ से ही नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से भी बहुत अहम माना जा रहा है।
रूसी तेल और गैस के सवाल पर रुबियो ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिका को प्रतिबंधों में छूट देनी पड़ी, क्योंकि इसका असर दुनिया की सप्लाई और कीमतों पर पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि इन सब चीज़ों को संभालना पड़ता है। उनके मुताबिक भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश भी उन बातों में शामिल है, जिन पर राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट पर फ़ैसला लेते वक़्त गौर करते हैं।
रुबियो ने कहा कि हर देश के सामने अपनी पेचीदा वजहें होती हैं। उन्होंने कहा, 'भूगोल एक हक़ीक़त है।' कुछ देशों के लिए दूसरे स्रोतों से ऊर्जा हासिल करना बहुत मुश्किल होता है। उन्होंने साफ़ किया कि यह कोई बहाना नहीं है, लेकिन विदेश नीति बनाते वक़्त इस सबमें संतुलन रखना पड़ता है।
रुबियो के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' के तहत रूसी ईंधन की बिक्री से जुड़ी कुछ सख़्त शर्तों में राहत दी थी। इसी का हवाला देकर उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का बहुत अहम और भरोसेमंद दोस्त है। इसलिए भारत जैसे बड़े देश पर टैरिफ़ या पाबंदियां लगाने से पहले उसकी भारी ऊर्जा ज़रूरतों और आर्थिक सुरक्षा को देखना वॉशिंगटन के लिए ज़रूरी है।
रुबियो ने यह भी बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति टैरिफ़ और पाबंदियों का दुनिया की अर्थव्यवस्था और खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है, इसकी गहराई से पड़ताल कर रहे हैं। इसके लिए 60 दिन की अवधि तय की गई है। उनके मुताबिक रूस पर पाबंदियों का मक़सद चुनिंदा देशों को परेशान करना नहीं है, बल्कि दुनिया की आर्थिक स्थिरता बनाए रखते हुए रूस की कमाई पर रोक लगाना है।
जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की दुनिया की सबसे बड़ी रिफ़ाइनरी है, जो रोज़ाना लाखों बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करती है। इस दौरे का मुख्य मक़सद अमेरिकी कंपनियों और भारत के बीच ऊर्जा क्षेत्र की साझेदारी को मज़बूत करना और हाइड्रोकार्बन व पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में निवेश बढ़ाना बताया गया है।
जयशंकर और रुबियो की बैठक में सिर्फ़ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र, वीज़ा नियम, सप्लाई चेन में सहयोग और इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र की सुरक्षा पर भी विस्तार से बात होगी। कहा गया है कि यह व्यापार समझौता पूरा होने पर भारत और अमेरिका के बीच सालाना व्यापार नई ऊंचाई पर पहुंचेगा, जिससे दोनों देशों के उद्योगों और रोज़गार को बड़ा फ़ायदा होगा।