गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:05 IST

ब्रिक्स फोरम में गोयल-जयशंकर ने रखा भारत का व्यापार रोडमैप, ट्रंप की धमकियों की परवाह नहीं

नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीयूष गोयल और एस. जयशंकर ने सदस्य देशों से बाजार खोलने और व्यापार नियम आसान बनाने की अपील की।

ब्रिक्स फोरम में गोयल-जयशंकर ने रखा भारत का व्यापार रोडमैप, ट्रंप की धमकियों की परवाह नहीं
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमेरिका की टैरिफ बढ़ाने की धमकियों और पश्चिम एशिया में चल रही अशांति के बीच नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम का आयोजन हुआ, जिसमें भारत ने सदस्य और भागीदार देशों के बीच व्यापार को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों को एक-दूसरे के लिए अपना बाजार खोलना चाहिए और व्यापार के नियम आसान बनाने चाहिए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बदलते वैश्विक हालात में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

फोरम को संबोधित करते हुए गोयल ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव की मौजूदगी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में आर्थिक और राजनीतिक-कूटनीतिक रिश्तों के बीच बेहतर तालमेल होना बहुत जरूरी है।

गोयल ने बताया कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार की बड़ी भूमिका है। उनके मुताबिक, ब्रिक्स देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और वैश्विक जीडीपी में इनका हिस्सा लगभग 40 फीसदी है। ग्लोबल ट्रेड में भी ब्रिक्स की हिस्सेदारी करीब एक-चौथाई है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के आपसी व्यापार में भारत की अहम भूमिका है। भारत के निर्यात में इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा भारत को दुनिया की दवा फैक्ट्री कहा जाता है, और वह ब्रिक्स देशों के लिए दवाओं का भरोसेमंद सप्लायर बन सकता है।

वाणिज्य मंत्री ने ब्रिक्स के सदस्य और भागीदार देशों से अपने बाजारों में एंट्री आसान बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि व्यापार बढ़ाने के लिए सिर्फ टैरिफ कम करना काफी नहीं है, बल्कि अलग-अलग देशों में लागू नियमों और बाकी ट्रेड प्रोसेस को भी आसान करना होगा।

गोयल ने कहा कि दूसरे देशों में सामान भेजना कारोबारियों के लिए आसान हो, इसके लिए माल की क्लीयरेंस में लगने वाला समय कम किया जाना चाहिए। उन्होंने गैर-टैरिफ उपायों से जुड़ी व्यापार लागत को भी एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सप्लाई चेन मजबूत और विविध होनी चाहिए, और इसके लिए दोनों तरफ से व्यापार बढ़ाना जरूरी है। कच्चे माल और जरूरी खनिजों जैसी चीजों के लिए बाजार तक पहुंच बेहतर करना भी अहम बताया।

ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि इस साल ब्रिक्स के भीतर संस्थागत सहयोग को 20 साल पूरे हो रहे हैं, जो संगठन के लिए एक अहम पड़ाव है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स की सदस्यता, एजेंडा और सहयोग के तरीकों में बड़े बदलाव आए हैं। भारत की अध्यक्षता में लचीलापन, नयापन, सहयोग और स्थिरता पर खास फोकस किया जा रहा है। जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस वक्त बड़े राजनीतिक और आर्थिक बदलावों से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, महामारी और मौसम से जुड़ी चुनौतियां सीधे अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही हैं। ऐसे हालात में देशों के लिए बदलते हालात को समझना, उसके हिसाब से तैयारी करना और समय पर जवाब देना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है।

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