शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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14:25 IST

एनसीएलटी की मुंबई बेंच देश में सबसे आगे, तिमाही में 4,189 करोड़ की 35 योजनाओं को मंजूरी

जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में देश भर में 107 योजनाएं मंजूर हुईं, जिनमें मुंबई बेंच की 35 योजनाएं सबसे ज्यादा रहीं।

एनसीएलटी की मुंबई बेंच देश में सबसे आगे, तिमाही में 4,189 करोड़ की 35 योजनाओं को मंजूरी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण यानी एनसीएलटी की मुंबई बेंच ने जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में 35 रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी है। इन योजनाओं की कुल कीमत 4,189 करोड़ रुपये से ज्यादा है और इसके साथ मुंबई बेंच देश में पहले नंबर पर रही।

पूरे देश की सभी बेंचों ने मिलकर इस तिमाही में 107 योजनाओं को मंजूरी दी, जिनकी कुल कीमत 11,071.17 करोड़ रुपये है। मुंबई बेंच की 35 योजनाएं इसी आंकड़े का हिस्सा हैं। न्यायाधिकरण की स्थापना के बाद से किसी एक तिमाही में मंजूर हुई योजनाओं की यह सबसे बड़ी संख्या है।

एनसीएलटी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक देश भर में मंजूर हुई योजनाओं में से करीब एक तिहाई मुंबई बेंच ने मंजूर कीं। कुल मंजूर रकम में मुंबई का हिस्सा करीब 38 प्रतिशत है। मुंबई के बाद प्रधान और नई दिल्ली बेंच ने 29 योजनाओं को मंजूरी दी। चंडीगढ़ बेंच ने नौ और अहमदाबाद बेंच ने आठ योजनाओं को हरी झंडी दी।

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही का प्रदर्शन पिछले सालों के मुकाबले काफी बेहतर है। 2025-26 की इसी तिमाही में 60, 2024-25 में 57 और 2023-24 में 82 योजनाओं को मंजूरी मिली थी।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 78 योजनाओं को मंजूरी मिली थी। इस तरह पहली छमाही में मंजूर योजनाओं की संख्या 185 हो गई है। न्यायाधिकरण की स्थापना से अब तक कुल 1,735 योजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है।

काम बढ़ने के बीच सदस्यों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की कमी की चुनौतियां बनी हुई हैं। अध्यक्ष के अलावा 62 सदस्यों के पद मंजूर हैं, लेकिन फिलहाल 48 सदस्य काम कर रहे हैं और 14 पद खाली हैं। चालू साल के आखिर तक चार और सदस्य रिटायर होने वाले हैं।

फिलहाल 13 अदालतों का कामकाज पूरे दिन और 18 अदालतों का आधे दिन चलता है। लंबित मामले घटाने के लिए पुराने मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है, सुनवाई की योजना बनाई जा रही है और कामकाज पर नियमित निगरानी रखी जा रही है।

एनसीएलटी में नियुक्तियों और बुनियादी सुविधाओं के सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया है। केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह क्षेत्रीय बेंचों की बुनियादी सुविधाओं का जायजा लेकर रिपोर्ट पेश करे।

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