एडमिरल पापारो 3 से 8 अक्टूबर तक भारत में, तीनों सेना प्रमुखों और NSA से करेंगे बात
अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैम्युअल जे. पापारो भारत के अधिकृत दौरे पर हैं। समुद्री सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा पर बात होगी।
अमेरिका की इंडो-पैसिफिक कमांड (US INDOPACOM) के कमांडर एडमिरल सैम्युअल जे. पापारो भारत के अधिकृत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। वे 3 से 8 अक्टूबर 2026 के बीच यहां रहेंगे। इसे 5 दिन का दौरा बताया गया है। भारत पहुंचते ही भारतीय रक्षा बलों की तरफ से उनका औपचारिक स्वागत किया गया।
दौरे का मकसद साफ है। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना, दोनों देशों की सेनाओं के आपसी सहयोग को बढ़ाना और बदलते भू-राजनीतिक हालात में इलाके की स्थिरता बनाए रखना। दुनिया की राजनीति में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की अहमियत दिन-ब-दिन बढ़ रही है, और इसी पृष्ठभूमि में यह दौरा हो रहा है।
इन पांच दिनों में एडमिरल पापारो भारत की तीनों सेनाओं के प्रमुखों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करेंगे। इन बैठकों में सिर्फ पारंपरिक सैन्य अभ्यासों की बात नहीं होगी। आज की चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा क्षेत्र में डिजिटल बदलाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उभरती टेक्नोलॉजी के जरिए सहयोग कैसे बढ़ाया जाए, इस पर खास जोर रहेगा।
हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) को दुनिया के व्यापार और ऊर्जा सप्लाई का मुख्य रास्ता माना जाता है। इस इलाके में चीन के बढ़ते सैन्य और समुद्री असर पर लगाम लगाने और खुला, मुक्त और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक बनाने के लिए भारत और अमेरिका का सहयोग निर्णायक बताया जा रहा है। एडमिरल पापारो की इस यात्रा से हिंद महासागर में अमेरिका की लगातार मौजूदगी और भारत के साथ उसके रणनीतिक हित एक बार फिर सामने आए हैं।
समुद्री सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र की जानकारी के आदान-प्रदान (Maritime Domain Awareness) को बेहतर करना दोनों देशों का मुख्य फोकस रहेगा। समंदर में चाचेगिरी, गैरकानूनी मछली पकड़ना, व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल और पक्का किया जा रहा है।
टेक्नोलॉजी और ऊर्जा पर भी बात होगी। आज का दौर तकनीकी मुकाबले का है और तेजी से बदलते डिजिटल जमाने में सेना का आधुनिकीकरण बेहद जरूरी हो गया है। इसी को देखते हुए भारत और अमेरिका डिफेंस एनर्जी रेजिलिएंस (Defense Energy Resilience) और ग्रीन डिफेंस टेक्नोलॉजी पर जोर देंगे। आधुनिक सैन्य ठिकानों के लिए टिकाऊ ऊर्जा सप्लाई और आपातकाल में ऊर्जा सिस्टम की हिफाजत को लेकर रणनीति बनाई जाएगी।
इसके अलावा दोनों देश मिलकर नई सैन्य टेक्नोलॉजी विकसित करने (Joint Technology Co-development) की दिशा में सकारात्मक कदम उठा रहे हैं। इसमें साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष सुरक्षा और आधुनिक कम्युनिकेशन नेटवर्क शामिल हैं। इस सहयोग से भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान और सेना के आधुनिकीकरण को बड़ी रफ्तार मिलने की संभावना जताई जा रही है।
एडमिरल पापारो जिस अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड की अगुआई करते हैं, उसे दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी सैन्य कमांड माना जाता है। इसके अधिकार क्षेत्र में प्रशांत महासागर से लेकर हिंद महासागर तक का विशाल इलाका आता है। उनकी कमान में करीब 4 लाख सैन्य और असैन्य कर्मचारी काम करते हैं।
इसके साथ ही 5 बेहद ताकतवर विमानवाहक जहाज (Aircraft Carriers), करीब 200 अत्याधुनिक युद्धपोत और 1,000 से ज्यादा लड़ाकू विमान इस कमांड के सीधे नियंत्रण में रहते हैं। इतनी बड़ी सैन्य ताकत के प्रमुख का भारत आकर बातचीत करना, भारत के वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ते रणनीतिक वजन को दिखाता है। रक्षा विशेषज्ञों ने भरोसा जताया है कि यह दौरा भारत-अमेरिका दोस्ती को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।