मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:01 IST

2 अक्टूबर को मोबाइल दुकानदार नहीं लेंगे UPI पेमेंट, MDR के विरोध में 'नो UPI डे'

देश भर के मोबाइल दुकानदार प्रस्तावित 0.4% MDR के विरोध में 2 अक्टूबर 2026 को UPI पेमेंट बंद रखेंगे।

2 अक्टूबर को मोबाइल दुकानदार नहीं लेंगे UPI पेमेंट, MDR के विरोध में 'नो UPI डे'
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अगर आप स्कैनर या UPI के भरोसे ही खरीदारी करते हैं, तो इस बार 2 अक्टूबर 2026, यानी गांधी जयंती के दिन आपको दिक्कत हो सकती है। मोबाइल फोन, गैजेट, एक्सेसरीज या दूसरा सामान लेने बाजार जा रहे हैं, तो हो सकता है दुकान पर UPI पेमेंट लिया ही न जाए। वजह यह है कि देश भर के मोबाइल दुकानदारों ने 2 अक्टूबर को 'नो UPI डे' मनाने का फैसला किया है। यह विरोध केंद्र सरकार के प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ है।

पिछले करीब 6 साल से देश में UPI लेन-देन पर जीरो-MDR, यानी कोई शुल्क नहीं, की व्यवस्था चल रही थी। अब सरकार इस नीति में बदलाव कर रही है। आने वाली 15 अक्टूबर से नए नियमों के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के कमर्शियल UPI लेन-देन पर व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क (MDR) देना होगा। दो लोगों के बीच होने वाले आम लेन-देन (Person-to-Person) और बहुत छोटे दुकानदारों को मिलने वाले पेमेंट इससे बाहर रखे गए हैं और उन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

यह आंदोलन राष्ट्रीय संगठन 'ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन' (AIMRA) की अगुवाई में हो रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि कुछ खास UPI लेन-देन पर MDR लगा तो छोटे और मझोले मोबाइल व्यापारियों पर आर्थिक संकट आ जाएगा।

AIMRA के उपाध्यक्ष और दिल्ली-NCR के अध्यक्ष तरविंदर सिंह ने कहा कि 2 अक्टूबर को व्यापारी विरोध जताने के लिए अपनी दुकानों के UPI QR कोड काले कपड़े से पूरी तरह ढक देंगे और किसी भी ग्राहक से ऑनलाइन पेमेंट नहीं लेंगे।

सिंह ने कहा, "हमें अगर सच में डिजिटल इंडिया को कामयाब बनाना है, तो UPI पर जीरो MDR की व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। हमारा विरोध UPI या डिजिटल क्रांति से नहीं है, बल्कि व्यापारी वर्ग पर थोपे जा रहे इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ से है। डिजिटल पेमेंट पूरे रिटेल सेक्टर के लिए किफायती रहेगा, तभी डिजिटल इंडिया का विस्तार तेजी से होगा।" व्यापारियों के UPI लेन-देन पर शून्य शुल्क रखा जाए, यह उनकी मुख्य मांग है।

AIMRA ने वित्त मंत्री को दिए आधिकारिक ज्ञापन में कहा है कि महीने में 5 लाख से 30 लाख रुपये के UPI लेन-देन करने वाले छोटे दुकानदारों को इस MDR की वजह से हर महीने 2,000 से 12,000 रुपये का सीधा नुकसान होगा। इससे उनके शुद्ध मुनाफे का बड़ा हिस्सा इसी शुल्क में चला जाएगा। संगठन के शुरुआती अंदाज के मुताबिक, 0.4% MDR से देश भर के छोटे मोबाइल व्यापारियों पर हर महीने 40 करोड़ रुपये और साल में करीब 500 करोड़ रुपये का भारी बोझ पड़ेगा।

इस विवाद पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 25 सितंबर को बयान दिया। उन्होंने साफ किया कि 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ खास UPI लेन-देन पर लगने वाला 0.4% MDR सिर्फ व्यापारियों को भरना होगा, ग्राहकों को नहीं। वित्त मंत्री ने कहा, "ग्राहकों को बिल्कुल फिक्र करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमने साफ कर दिया है कि यह बोझ उन पर नहीं डाला जाएगा। दुर्भाग्य से कुछ लोगों ने इस नीति को ठीक से समझा नहीं है।"

छोटे व्यापारियों के लिए छूट भी रखी गई है। जो बहुत छोटे व्यापारी UPI QR कोड से महीने में 1 लाख रुपये तक की रकम लेते हैं, उन्हें इस नियम से छूट मिली है और उन्हें जीरो-MDR का फायदा मिलता रहेगा। सब्जी बेचने वालों, सड़क किनारे के विक्रेताओं और सूक्ष्म कारोबारियों पर इसका असर नहीं होगा।

क्या MDR का बोझ ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा? सरकार ने भरोसा दिया है कि व्यापारी MDR दें, तब भी ग्राहकों के लिए किसी सामान या सेवा के दाम नहीं बढ़ेंगे। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की जानकारी के मुताबिक, डिजिटल पेमेंट लेने का खर्च रोज के कारोबार का सामान्य खर्च है। दुकान पर बढ़ते ग्राहक और नकदी संभालने का जोखिम टलने से इसकी भरपाई अपने आप हो जाती है। NPCI ने कहा है कि सुझाया गया MDR दर क्रेडिट कार्ड के मुकाबले बहुत कम है और सिर्फ एक तय सीमा से ऊपर के लेन-देन पर लगेगा, इसलिए दुकानदारों के पास दाम बढ़ाने की कोई वजह नहीं बचती। ग्राहक पहले से तय छपे दाम पर ही खरीदारी करेंगे। NPCI के मुताबिक बैंक भी व्यापारियों से तालमेल रखकर यह पक्का करेंगे कि यह खर्च ग्राहकों पर न डाला जाए।

'ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन' (AICPDF) ने 2 अक्टूबर 2026 के 'नो UPI डे' आंदोलन को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है। यह संगठन देश के करीब 4.5 लाख डिस्ट्रीब्यूटर और 1.3 करोड़ व्यापारियों की नुमाइंदगी करता है और इसके सभी सदस्य आंदोलन में हिस्सा लेंगे।

AICPDF के अंदाज के मुताबिक, UPI लेन-देन पर MDR लागू हुआ तो अकेले FMCG कारोबार और वितरण चेन पर हर साल 7,000 करोड़ से 9,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। महासंघ ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र के डिस्ट्रीब्यूटर और खुदरा व्यापारी पहले से बहुत कम मुनाफे पर काम करते हैं, इसलिए यह शुल्क उनके वजूद पर दबाव डालेगा। यह खर्च ग्राहकों पर डालना मुमकिन नहीं है, इसलिए व्यापारियों का भारी नुकसान होगा।

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