सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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पुणे में कैनसपोर्ट कैंसर मरीजों को दे रही मुफ्त इलाज, घर पर देखभाल और आहार की मदद

पुणे में कैनसपोर्ट कैंसर मरीजों को दे रही मुफ्त इलाज, घर पर देखभाल और आहार की मदद तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 टीम

कैनसपोर्ट संस्था कैंसर समेत गंभीर बीमारियों के मरीजों को इलाज से लेकर काउंसलिंग तक की सेवाएं बिना पैसे के देती है।

बाजार में आम तौर पर होता यह है कि कोई चीज पसंद आई तो दाम पूछा, पैसे दिए और चीज ले ली। पुणे में लगी एक प्रदर्शनी के एक स्टॉल पर यह लेन-देन अलग ही रूप में दिखा। यहां रंगे हुए दीये, हाथ से बनी चीजें और सजावट का सामान रखा है, लेकिन किसी पर कीमत तय नहीं है। ग्राहक को चीज जितनी पसंद आए, उतने पैसे वह अपनी मर्जी से देता है और सामान ले जाता है।

ये सारी चीजें कैंसर से जूझ रहे मरीजों ने बनाई हैं। कैनसपोर्ट संस्था की इस पहल के पीछे मकसद यह है कि मरीजों की कला को दाद मिले, उनमें आत्मविश्वास आए और इसी से मदद के लिए फंड भी जमा हो। कैंसर के साथ दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इलाज से लेकर काउंसलिंग तक कई सेवाएं मुफ्त देकर यह संस्था उनकी जिंदगी में उम्मीद का सहारा बन रही है।

कैनसपोर्ट एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है, जो 1996 में शुरू हुई थी। इसका काम सिर्फ बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं है। संस्था गंभीर बीमारी का सामना कर रहे मरीजों को दर्द से राहत भरी जिंदगी जीने में मदद करती है। इसके साथ ही मरीजों के परिवार को मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक सहारा देने पर भी उसका जोर है। इस काम को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने संस्था को 'पब्लिक हेल्थ चैंपियन अवॉर्ड' देकर सम्मानित किया है। संस्था का काम दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और झारखंड, यानी सात राज्यों में चल रहा है। पुणे में वह 2025 से सेवा दे रही है।

पुणे में अभी 13 टीमों के जरिए मरीजों तक सेवा पहुंचाई जाती है। इनमें पांच डॉक्टर, 13 नर्स और 14 काउंसलर काम कर रहे हैं। दो ओपीडी के जरिए भी मरीजों को सुविधाएं दी जाती हैं। संस्था के मुताबिक दर्द और बाकी शारीरिक लक्षणों के लिए डॉक्टर की सलाह से इलाज, दवाइयां और नर्स की सेवा दी जाती है। मानसिक और भावनात्मक परेशानियों के लिए काउंसलिंग भी बिना पैसे की है। जरूरी जांचें, सरकारी आर्थिक योजनाओं की जानकारी और इलाज को लेकर मार्गदर्शन भी मिलता है।

जो मरीज अस्पताल नहीं आ सकते, उनके लिए डॉक्टर, नर्स, काउंसलर और फिजियोथेरेपिस्ट की प्रशिक्षित टीम घर जाकर देखभाल करती है। इसके अलावा ओपीडी सेवा, दिन भर की देखभाल, अस्पतालों में काउंसलिंग और मोबाइल पैलिएटिव केयर क्लिनिक से भी मदद की जाती है। परिवार वालों को सिखाया जाता है कि घर पर मरीज की देखभाल कैसे करें और दवाइयां कैसे दें। जरूरतमंद मरीजों को पौष्टिक आहार और प्रोटीन वाला सप्लीमेंट दिया जाता है। मरीजों की देखभाल करने वालों को सिलाई या हाथगाड़ी जैसे छोटे धंधे शुरू करने में भी मदद मिलती है।

संस्था का यह काम मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अंबिका राजवंशी के मार्गदर्शन में चल रहा है। मरीजों की बनाई चीजें बिकने से जो रकम आती है और जो दान मिलता है, उसी से इस सेवा को आर्थिक ताकत मिलती है। संस्था की प्रतिनिधि रेश्मा जाधव (काउंसलर) और प्रिया भाले (नर्स) ने कहा कि मरीजों के हाथ की कला से सिर्फ सुंदर चीजें ही नहीं बन रहीं, बल्कि उनकी अपनी और दूसरों की जिंदगी में उम्मीद भी जग रही है।

मदद के लिए संपर्क: साथ साथ राष्ट्रीय पैलिएटिव केयर हेल्पलाइन 1800202777 7 नहीं, बल्कि 18002027777 है। टेलीफोन सहायता का नंबर 9266682182 है।

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