सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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1 नवंबर को वर्ल्ड वेगन डे: वेगन और शाकाहारी में क्या फर्क है और कैसे शुरू हुआ यह दिन

1 नवंबर को वर्ल्ड वेगन डे: वेगन और शाकाहारी में क्या फर्क है और कैसे शुरू हुआ यह दिन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 टीम

हर साल 1 नवंबर को मनाए जाने वाले वर्ल्ड वेगन डे की शुरुआत 1994 में ब्रिटेन की द वेगन सोसायटी ने की थी। वेगन और शाकाहारी आहार के फर्क और वेगन जीवनशैली के दावों पर एक नजर।

दुनिया भर में खान-पान की आदतों से लेकर रहन-सहन तक कई बदलाव दिख रहे हैं। इन्हीं में से एक तेजी से फैलता चलन है वेगन जीवनशैली (Vegan Lifestyle)। हर साल 1 नवंबर को पूरी दुनिया में वर्ल्ड वेगन डे बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ इतना बताने तक सीमित नहीं है कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। इसके जरिए कुदरत के साथ तालमेल बिठाने, जानवरों के प्रति दया रखने और पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया जाता है।

वर्ल्ड वेगन डे की शुरुआत 1994 में यूनाइटेड किंगडम (UK) की संस्था द वेगन सोसायटी (The Vegan Society) ने की थी। संस्था की तब की अध्यक्ष लुईस वॉलिस (Louise Wallis) ने संस्था की 50वीं सालगिरह के मौके पर ऐलान किया था कि 1 नवंबर को वर्ल्ड वेगन डे के तौर पर मनाया जाएगा।

वेगन (Vegan) शब्द इससे पहले, 1944 में, डोनाल्ड वॉटसन और उनके साथियों ने पहली बार इस्तेमाल किया था। शाकाहार (Vegetarianism) और वेगन तरीके का फर्क साफ करने के लिए उन्होंने Vegetarian शब्द के पहले तीन और आखिरी दो अक्षर जोड़कर Vegan शब्द बनाया। तब से यह एक अलग और व्यापक जीवनशैली के रूप में सामने आई।

अक्सर लोग मान लेते हैं कि वेगन और शाकाहारी एक ही हैं, लेकिन दोनों में एक बारीक और अहम फर्क है। शाकाहारी आहार में मांस, मछली या अंडे शामिल नहीं होते, मगर दूध, दही, घी, मक्खन और शहद जैसी जानवरों से मिलने वाली चीजें इस्तेमाल होती हैं। वेगन जीवनशैली पूरी तरह वनस्पति पर आधारित (Plant-based) होती है। इसमें मांस और अंडे के साथ दूध, दही, घी और शहद जैसी कोई भी animal-based चीज नहीं खाई जाती। इसके अलावा वेगन लोग लेदर (चमड़ा), ऊन, रेशम या जानवरों पर टेस्ट (Animal Testing) किए गए सौंदर्य प्रसाधन भी इस्तेमाल करने से बचते हैं।

सेहत के मोर्चे पर बात करें तो वैज्ञानिक शोध और मेडिकल अध्ययनों के मुताबिक संतुलित वनस्पति आधारित आहार सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। इन्हीं के हवाले से कहा गया है कि वेगन आहार में सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल बहुत कम होता है, इसलिए दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर काबू में रहते हैं और हार्ट डिजीज का खतरा घटता है। फाइबर, फल, सब्जियां और दालें-दलहन भरपूर होने से पाचन तंत्र मजबूत रहता है और वजन काबू में रखने में मदद मिलती है। यह भी कहा गया है कि ऐसा आहार ब्लड शुगर पर नियंत्रण रखने और इंसुलिन की संवेदनशीलता सुधारने में मदद करता है। एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर वनस्पति आधारित आहार से शरीर की सूजन घटती है और कैंसर समेत कई बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है।

पर्यावरण के लिहाज से भी इस जीवनशैली की बात होती है। आज दुनिया क्लाइमेट चेंज (Climate Change) की गंभीर समस्या से जूझ रही है। पशुपालन और जानवरों से जुड़े उत्पादों के उद्योगों से बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों (Greenhouse Gases) का उत्सर्जन होता है और पानी भी बहुत ज्यादा खर्च होता है। वेगन जीवनशैली अपनाने से पशुपालन में लगने वाली जमीन और पानी की बर्बादी रुकती है, जिससे कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) घटाने में मदद मिलती है। साथ ही जानवरों पर होने वाले अत्याचार और उनके कत्ल को रोकने के लिहाज से भी इस जीवनशैली को नैतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।

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