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पेरिस के प्रदर्शन में सुपरहीरो बनकर उतरे हजारों लोग, देशभर में 4.10 लाख सड़क पर

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और महंगाई के खिलाफ शनिवार को हुए प्रदर्शन में लोग कैप्टन अमेरिका और ब्लैक पैंथर जैसे कपड़ों में दिखे। कई शहरों में पुलिस से झड़प हुई।

पेरिस के प्रदर्शन में सुपरहीरो बनकर उतरे हजारों लोग, देशभर में 4.10 लाख सड़क पर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

फ्रांस में शनिवार को एक अजीब मगर बेहद तीखा प्रदर्शन देखने को मिला। देश की बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों में स्टाफ की कमी, भारी महंगाई और मैक्रों सरकार की नीतियों के खिलाफ पूरे देश में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि हजारों लोगों ने विरोध जताने के लिए मार्वल और डीसी कॉमिक्स के मशहूर सुपरहीरो के कपड़े पहन रखे थे।

पेरिस के बीचोबीच प्रदर्शनकारी कैप्टन अमेरिका, ब्लैक पैंथर, स्पाइडर-मैन, सुपरमैन, डेडपूल और यहां तक कि ऐतिहासिक योद्धा नेपोलियन बोनापार्ट के भेस में उतरे। ये लोग सिर्फ कपड़े पहनकर नहीं आए थे। सड़क पर अपने किरदार के अंदाज में एक्शन पोज देते, बैरिकेड पर चढ़ते और नारे लगाते हुए उन्होंने भीड़ का जोश बढ़ाया। कई जगह कैप्टन अमेरिका की ढाल लिए लोग पुलिस के वॉटर कैनन का पानी झेलते दिखे। इनके वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं।

प्रदर्शन में शामिल हजारों छात्रों और आम लोगों ने मुंह पर मास्क, आंखों पर सेफ्टी गॉगल्स और सिर पर हेलमेट पहन रखे थे। यह सिर्फ फैशन या भेस बदलने का मामला नहीं था। पुलिस के लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों से बचने के लिए प्रदर्शनकारियों ने पहले से यह तैयारी की थी। सोशल मीडिया के वीडियो में लोग इसी सुरक्षा के साथ पुलिस बैरिकेड के सामने धरना देकर बैठे साफ नजर आ रहे हैं।

फ्रांस के गृह मंत्रालय के जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देशभर में फैले इस प्रदर्शन में करीब 4,10,000 लोग सीधे शामिल हुए। राजधानी पेरिस में इसका असर सबसे ज्यादा दिखा, जहां एक ही दिन में करीब 1,10,000 लोग सड़कों पर उतरे। ऐतिहासिक प्लेस दे ला रिपब्लिक इलाके में छावनी जैसा माहौल बन गया था।

छात्र संगठन, शिक्षक, मजदूर यूनियन और यलो वेस्ट आंदोलन के लोग एक साथ आ गए, जिससे प्रदर्शन की ताकत काफी बढ़ गई। बताया जा रहा है कि स्कूलों में टीचरों की कमी, क्लास में जरूरत से ज्यादा भीड़, उच्च शिक्षा की बढ़ी हुई फीस और जीना मुश्किल करने वाले रहन-सहन के खर्च के खिलाफ यह जनता का गुस्सा है।

पेरिस के साथ मार्सिले, बोर्डो और लियोन जैसे कई बड़े शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने पहले बैरिकेड लगाए। जब गुस्साई भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस छोड़ी। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक कुछ उपद्रवी और कट्टरपंथी गुट प्रदर्शन में घुस आए और पुलिस पर पत्थर, बोतलें और जलते पटाखे फेंके, जिससे हिंसा भड़की। हालात हाथ से निकलते देख पुलिस अब तक करीब 1,000 प्रदर्शनकारियों को मौके से हिरासत में ले चुकी है।

इस प्रदर्शन की गूंज राजनीति में भी सुनाई दे रही है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री इमैनुएल लेकोर्नू की सरकार ने आंदोलन पर काबू पाने के लिए जो सख्त रुख अपनाया है, उसकी तीखी आलोचना हो रही है। प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाने की कोशिश को स्थानीय अदालत ने नाकाम कर दिया, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर जमकर हमला बोला है। शिक्षा के बजट में कटौती और सरकारी सेवाओं के निजीकरण की नीति से नौजवान और मजदूर तबका बेहद नाराज है। छात्र संगठनों की मुख्य मांग है कि शिक्षा क्षेत्र के लिए 10 अरब यूरो का आपातकालीन पैकेज लागू किया जाए।

बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए गृहमंत्री लॉरेंट न्यूनेस (Laurent Nuñez) ने पूरे देश में 70,000 से ज्यादा पुलिस और जवान तैनात किए हैं। भीड़ पर नजर रखने के लिए हवा में पुलिस के हेलिकॉप्टर चक्कर काट रहे हैं, जबकि सड़कों पर बख्तरबंद गाड़ियां और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां तैयार रखी गई हैं। पिछले हफ्ते के प्रदर्शन में कई दुकानों में तोड़फोड़, आगजनी और लूटपाट हुई थी, इसलिए इस बार कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बेहद सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं।

यह आंदोलन सिर्फ फ्रांस तक नहीं है। फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल और अल्बानिया जैसे यूरोपीय देशों में बढ़ती महंगाई, ऊर्जा के चढ़े दाम और बिगड़ती शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों की नाराजगी चरम पर है। यूरोप भर के इन प्रदर्शनों में अब तक अलग-अलग देशों में कुल 2,700 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। रोजगार की अनिश्चितता और शिक्षा प्रणाली की खामियों की वजह से यूरोप का नौजवान सड़क पर उतर रहा है।

फ्रांस में स्कूलों और यूनिवर्सिटियों की नाकाबंदी से हजारों छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भी फ्रांस की हिंसक घटनाओं और पुलिस के ज्यादा ताकत इस्तेमाल करने पर चिंता जताई है। अगर आने वाले दिनों में सरकार प्रदर्शनकारियों से बात करके रास्ता नहीं निकालती, तो आंदोलन के और भड़कने की आशंका जताई जा रही है।

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