गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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16:34 IST

फ्रांस में छात्रों का आंदोलन देशभर में फैला, ट्रंप ने पोस्ट में इस्लाम और प्रवासन से जोड़ा

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों के फंड में कटौती के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन पूरे देश में फैल गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इसे अनियंत्रित प्रवासन से जोड़ा है।

फ्रांस में छात्रों का आंदोलन देशभर में फैला, ट्रंप ने पोस्ट में इस्लाम और प्रवासन से जोड़ा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की बिगड़ती हालत और स्कूलों के फंड में कटौती को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। स्कूलों को ठीक से फंड मिले और पढ़ाई का स्तर सुधरे, इसी मांग पर शुरू हुआ आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है। शुरुआत में इसमें सिर्फ स्कूली बच्चे थे, लेकिन अब टीचर, कॉलेज के युवा और पैरेंट्स भी बड़ी संख्या में शामिल हो गए हैं।

मंगलवार को पूरे फ्रांस में 2,66,000 से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे। इसका असर यह हुआ कि देशभर में ट्रैफिक और पढ़ाई, दोनों ठप पड़ गए। आंदोलन के तीसरे हफ्ते में दाखिल होने की बात भी कही जा रही है। पेरिस, मार्सेल, नैंट, तुलूज़, स्ट्रासबर्ग, ल्योन और रेन जैसे बड़े शहरों में प्रदर्शनकारियों का रुख काफी तीखा रहा। सड़कों पर आगजनी हुई, सरकारी इमारतों पर पत्थर फेंके गए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

भीड़ को हटाने और हालात काबू में करने के लिए फ्रांस की पुलिस को आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारी और भड़क गए और कई जगह पुलिस के साथ सीधी झड़पें हुईं। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने देशभर में 2,000 से ज्यादा स्कूलों पर ताला लगा दिया है, जबकि 1,000 से ज्यादा स्कूलों की क्लास ऑनलाइन चल रही हैं। आंदोलन से जुड़े एक बयान में कहा गया कि लगभग 900 स्कूल प्रभावित हुए हैं और 6,100 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें ज्यादातर नाबालिग हैं। हाई स्कूल के छात्र टीचरों की कमी, भरी हुई क्लास और खराब होती इमारतों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस आंदोलन पर टिप्पणी करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके फ्रांस की हिंसा को सीधे अवैध प्रवासन और आबादी के असंतुलन से जोड़ा। ट्रंप के मुताबिक फ्रांस में जो हो रहा है, उसका छात्रों की शिक्षा व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है, "फ्रांस में जो कुछ हो रहा है, वह बेकाबू और बड़े पैमाने के प्रवासन का सीधा नतीजा है। यह सिर्फ स्कूलों या शिक्षा का सवाल नहीं रह गया, बल्कि कभी महान रहे एक देश पर इस्लाम के कब्जे की कोशिश है।"

ट्रंप ने आगे यह भी आरोप लगाया कि इस्लामी ताकतें फ्रांस की लोकतांत्रिक व्यवस्था को हटाकर देश पर अपना दबदबा कायम करना चाहती हैं और यह आंदोलन उसी साजिश का हिस्सा है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल है और दुनियाभर से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

फ्रांस सरकार के लिए यह आंदोलन संभालना बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ सड़कों की हिंसा रोकनी है, तो दूसरी तरफ ठप पड़ी शिक्षा व्यवस्था को फिर पटरी पर लाना है। सरकार ने छात्र और टीचर संगठनों से बातचीत की तैयारी दिखाई है, मगर फिलहाल प्रदर्शनकारी किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। उनका आरोप है कि शिक्षा की बुनियादी सुविधाओं का स्तर गिरा है और स्कूलों में स्टाफ की कमी है। जब तक सरकार शिक्षा बजट बढ़ाने का साफ ऐलान नहीं करती, वे आंदोलन वापस नहीं लेंगे। ट्रंप के बयान से आंदोलन को राजनीतिक और धार्मिक रंग मिलने के बाद फ्रांस सरकार पर देश के भीतर और बाहर, दोनों तरफ से भारी दबाव बन गया है।

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