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नायलॉन मांजा: नागपुर ग्रामीण पुलिस की सिलवासा कार्रवाई की हाईकोर्ट ने की तारीफ

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने सिलवासा की यूनिट से 6 करोड़ रुपये से ज्यादा का माल पकड़ने पर नागपुर ग्रामीण पुलिस की सराहना की।

नायलॉन मांजा: नागपुर ग्रामीण पुलिस की सिलवासा कार्रवाई की हाईकोर्ट ने की तारीफ तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने प्रतिबंधित नायलॉन मांजे के खिलाफ चल रही लड़ाई में नागपुर ग्रामीण पुलिस की तारीफ की है। पुलिस ने इस खतरनाक पतंग धागे के एक बड़े स्रोत का पता सिलवासा की एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तक लगाया, जहां 6 करोड़ रुपये से ज्यादा का माल जब्त किया गया।

जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस रजनीश व्यास की डिवीजन बेंच शुक्रवार को नायलॉन मांजे की समस्या पर खुद संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान बेंच ने पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), नागपुर और उनकी टीम की कोशिशों को सराहा। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कामयाबी देर से मिली, क्योंकि 12 अक्टूबर को सप्लाई नेटवर्क की जांच न होने पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी, उसके बाद ही यह कार्रवाई हुई।

बेंच ने पहले उन अफसरों के नाम मांगे थे, जिन पर प्रतिबंधित धागे के स्रोतों का पता लगाने में प्रगति न होने की जिम्मेदारी बताई गई थी। उसके बाद की पुलिस कार्रवाई से जांच में बड़ा सुराग मिलता दिख रहा है।

कोर्ट में दाखिल हलफनामे में एसपी (ग्रामीण) ने बताया कि सप्लाई नेटवर्क की जानकारी मिलने पर पुलिस ने छापे मारे और सिलवासा में बनाने वाले स्रोत तक पहुंची। हलफनामे में कुछ और संदिग्ध स्रोतों का भी जिक्र है, जिन्हें पुलिस अब ढूंढने की कोशिश कर रही है। बेंच ने कहा कि इस जांच से साफ है कि पुलिस जब ठान ले तो समस्या की जड़ तक पहुंच सकती है।

विदर्भ के बाकी 10 जिलों में भी ऐसी ही कार्रवाई की उम्मीद कोर्ट ने जताई है। उसे उम्मीद है कि पुलिस प्रतिबंधित नायलॉन मांजा सप्लाई करने वाले नेटवर्क का पता लगाने के लिए यही तरीका वहां भी अपनाएगी। अफसरों को सभी जिलों की जानकारी वाला एक विस्तृत हलफनामा 29 अक्टूबर तक देना होगा।

इस निर्देश का मकसद कार्रवाई को नागपुर से आगे बढ़ाना और उन सप्लाई चेन को तोड़ना है, जिनकी वजह से इलाके में यह खतरनाक धागा मिल रहा है। कुछ पतंगबाज नायलॉन मांजे का खूब इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके तेज और मजबूत धागे इंसानों, पक्षियों और जानवरों के लिए गंभीर खतरा हैं। कोर्ट चाहता है कि एजेंसियां सिर्फ स्थानीय जब्ती तक न रुकें, बल्कि इसे बनाने और बेचने वालों तक पहुंचें। एडवोकेट निश्चय जाधव ने न्यायमित्र के रूप में कोर्ट की मदद की। याचिका पर अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी।

बेंच ने जब्त किए गए नायलॉन मांजे के निपटारे का मामला भी देखा, जो पहले महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने कोर्ट के सामने रखा था। MPCB ने नागपुर, भंडारा, गोंदिया और वर्धा के जिला कलेक्टरों को बताया था कि जब्त माल सीमेंट फैक्ट्री में नष्ट किया जा सकता है। शुक्रवार की सुनवाई में राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि जब्त मांजे को क्रश कर दिया गया है।

चूंकि संबंधित सीमेंट फैक्ट्री चंद्रपुर में है, इसलिए कोर्ट ने अफसरों को जरूरी इजाजत लेकर जब्त माल का सही तरीके से निपटारा करने को कहा। इसके लिए उन्हें 15 दिन मिले हैं और उसके बाद निपटारे की पुष्टि करने वाला बयान देना होगा। मकसद यह है कि जब्त मांजा गोदाम में पड़ा न रहे और दोबारा बाजार में न पहुंचे।

जिन पुलिस अफसरों के नाम पिछली सुनवाई में मांगे गए थे, उन पर कार्रवाई का सवाल भी बेंच के सामने आया। कोर्ट ने अनुशासनात्मक कार्रवाई पर अंतिम राय नहीं बनाई, लेकिन कहा कि अगर अफसर सप्लाई के स्रोत ढूंढने में मेहनत और असाधारण लगन दिखाएं तो वह उनके खिलाफ आगे न बढ़ने पर विचार कर सकता है। यानी जवाबदेही का सवाल खुला है और अफसरों को जांच में नतीजे दिखाने का मौका मिला है।

29 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट पूरे विदर्भ में सप्लाई चेन की जांच की प्रगति और जब्त माल के निपटारे के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा।

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