सिल्वासा के गुमनाम कारखाने से 6 करोड़ का नायलॉन मांजा जब्त, हाईकोर्ट ने जताई संतुष्टि
नायलॉन मांजे की सप्लाई का स्रोत ढूंढने की पुलिस जांच को सिल्वासा में बड़ी कामयाबी मिली है। मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने विदर्भ के बाकी दस जिलों में भी ऐसी जांच के निर्देश दिए हैं।
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जानलेवा नायलॉन मांजे के कारोबार की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में पुलिस को आखिरकार बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने सिल्वासा (दादरा और नगर हवेली) में नायलॉन मांजे का एक बड़ा स्रोत ढूंढ निकाला है। वहां एक अज्ञात कारखाने में यह मांजा बन रहा था और करीब 6 करोड़ रुपये का माल जब्त किया गया है।
इस कार्रवाई पर मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने पुलिस की जांच से संतुष्टि जताई। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिए कि विदर्भ के बाकी जिलों में भी इसी तरह जांच की जाए।
इससे पहले कोर्ट नायलॉन मांजे की सप्लाई का स्रोत ढूंढने में पुलिस की देरी पर नाराजगी जता चुकी थी। पिछली सुनवाई में कोर्ट के सामने आया था कि पुलिस ने सप्लाई चेन की जड़ तक पहुंचने के लिए काफी जांच नहीं की है। इसी वजह से न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की बेंच ने सख्त रुख अपनाया था।
उसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और अलग-अलग जगहों पर छापे मारे। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया, जिसमें इस कार्रवाई की जानकारी दी गई। पुलिस की टीम ने सिल्वासा में मांजे की सप्लाई का बड़ा स्रोत खोजा। वहां एक अज्ञात कारखाने में नायलॉन मांजे का उत्पादन होता पाया गया। इस कार्रवाई में अंदाजन 6 करोड़ रुपये का माल जब्त हुआ।
पुलिस के हलफनामे में नायलॉन मांजे के दूसरे संभावित स्रोतों का भी जिक्र है। कोर्ट ने इस जानकारी पर गौर किया और पुलिस की जांच से संतुष्टि जताई। कोर्ट ने अहम टिप्पणी की कि अगर अपराध की जड़ तक पहुंचने का इरादा हो, तो पुलिस यह कर सकती है।
इसी दौरान कोर्ट ने कहा कि नागपुर जिले में नायलॉन मांजे की सप्लाई के स्रोत ढूंढने के लिए जो जांच प्रक्रिया अपनाई गई, वही विदर्भ के बाकी दस जिलों में भी चलाई जाए। कोर्ट ने साफ किया कि इन सभी जिलों के हालात का जायजा लेकर पुलिस 29 अक्टूबर तक हलफनामा पेश करे। यानी अब विदर्भ में नायलॉन मांजे की पूरी सप्लाई चेन पर पुलिस की नजर रहेगी।
जब्त किए गए नायलॉन मांजे को नष्ट करने पर हुई सुनवाई में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की तरफ से पेश वकील सन्याल ने 23 दिसंबर 2025 के एक पत्र का हवाला दिया। इस पत्र में नागपुर, भंडारा, गोंदिया और वर्धा के जिलाधिकारियों को बताया गया था कि नायलॉन मांजा एक सीमेंट कारखाने में नष्ट किया जा सकता है। अतिरिक्त सरकारी वकील उके ने बताया कि जब्त किए गए मांजे का निपटारा कर दिया गया है।
नगर निगम की तरफ से पेश एड. जेमिनी कसाट ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने ऐसे एक सीमेंट कारखाने की जानकारी चंद्रपुर को दी थी। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जब्त नायलॉन मांजे को नष्ट करने के लिए जरूरी इजाजतें लेकर 15 दिन के अंदर कोर्ट को इसकी सूचना दें।
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