कथित 40 करोड़ कर्ज घोटाला: अरविंद निलंगेकर की दोषमुक्ति की अर्जी खारिज
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने भाजपा विधायक संभाजी पाटील निलंगेकर के भाई की दोषमुक्ति की अर्जी खारिज करने की जानकारी है।
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लातूर : भाजपा विधायक संभाजी पाटील निलंगेकर के भाई अरविंद पाटील निलंगेकर से जुड़े कथित 40 करोड़ रुपये के कर्ज घोटाले में अहम मोड़ आया है। जानकारी है कि मुंबई हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने उनकी दोषमुक्ति की अर्जी खारिज कर दी है। इसके बाद मामले में लगे आरोपों पर ट्रायल की सुनवाई आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है।
यह मामला 2009 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र से लिए गए कर्ज से जुड़ा है। मिली जानकारी के मुताबिक मे. व्हिक्टोरिया एग्रो फूड प्रोसेसिंग प्रा. लि. नाम की कंपनी को दोनों बैंकों से करीब 40 करोड़ रुपये का कर्ज मिला था। बताया जाता है कि इस कर्ज के लिए कुछ अचल संपत्ति गिरवी रखी गई थी।
आरोप है कि कर्ज के लिए दर्ज कराए गए गिरवी के दस्तावेज़ में कथित तौर पर हेरफेर किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि मूल दस्तावेज में निलंगा के सर्वे नंबर 289/अ की आठ हेक्टर जमीन का जिक्र था। बाद की एंट्रियों में सर्वे नंबर 5-अ की सिर्फ 740 वर्ग फुट की संपत्ति गिरवी दिखाई गई।
मामले में यह बात भी सामने आई कि कंपनी ने बैंक के 25.50 करोड़ रुपये वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए चुका दिए थे। लेकिन जानकारी के अनुसार सीबीआई की दलील रही कि बैंक की बकाया रकम भर देने से कथित जालसाजी, धोखाधड़ी या साजिश के आरोपों से अपने आप छुटकारा नहीं मिल जाता।
जांच में कुछ और बातों पर भी गौर किया गया। इनमें संपत्ति की वैल्यूएशन के लिए कागजात देना, जगह के मुआयने के वक्त मौजूद रहना और कर्ज से जुड़े फॉर्म पर दस्तखत करना शामिल है।
इस बीच जानकारी है कि अरविंद पाटील निलंगेकर ने लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के निदेशक पद के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है। इसी वजह से अदालत के इस मामले की चर्चा राजनीतिक और सहकारिता क्षेत्र में शुरू हो गई है।
अब सबकी नजर इस पर है कि मामले की अगली सुनवाई में क्या होता है और अदालत के सामने कौन से सबूत आते हैं। फिलहाल दोषमुक्ति की अर्जी खारिज होने के बाद ट्रायल आगे चलेगा और आरोपों पर फैसला अदालत में ही होगा।