नायलॉन मांजा माफिया पर नागपुर ग्रामीण की सर्जिकल स्ट्राइक
बंद कारखाने का ताला तोड़कर खोली तस्करी की पोल, 6.26 करोड़ का माल जब्त, देशभर में फैला था नेटवर्क
नागपुर.
लोगों की गर्दन काटने और बेजुबान पक्षियों की जान लेने वाले प्रतिबंधित नायलॉन मांजे के कारोबार पर नागपुर ग्रामीण पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है. पुलिस ने सीधे मांजा बनाने वाली फैक्ट्री तक पहुंचकर तस्करी के नेटवर्क की जड़ पर वार किया है. दादरा-नगर हवेली के औद्योगिक क्षेत्र में बंद पड़ी कंपनी 'मार्मिक इंडस्ट्रीज' में छापा मारकर 6 करोड़ 26 लाख रुपये का प्रतिबंधित नायलॉन मांजा, अत्याधुनिक मशीनें और कच्चा माल जब्त किया है. इस कार्रवाई से नायलॉन मांजे के उत्पादन और सप्लाई नेटवर्क में खलबली मच गई है.
नायलॉन मांजे से होने वाले जानलेवा हादसों और पक्षियों की सुरक्षा को लेकर मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया था. अदालत ने नागपुर ग्रामीण पुलिस से पूछा था कि प्रतिबंधित मांजे के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है. साथ ही 25 अक्टूबर तक शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया था. इसके बाद पुलिस ने जांच तेज करते हुए सीधे उस ठिकाने पर धावा बोला, जहां से खतरनाक मांजे का उत्पादन किया जा रहा था.
कंटेनर से शुरू हुई जांच, गुजरात में मिला फर्जी पता
मामले की शुरुआत नागपुर ग्रामीण पुलिस के कलमेश्वर तहसील स्थित गोंडखैरी के वीआरएल लॉजिस्टिक परिसर से हुई. यहां कंटेनर के जरिए प्रतिबंधित नायलॉन मांजे की ढुलाई किए जाने की सूचना पर पुलिस ने छापा मारा. कार्रवाई में 14 लाख 40 हजार रुपये का मांजा और 20 लाख रुपये का कंटेनर, कुल 34 लाख 40 हजार रुपये का माल जब्त किया गया. मांजा नागपुर ला रहे चालक छविनाथ मोहन निषाद, निवासी उत्तर प्रदेश, को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ और जांच में मिली रसीदों के आधार पर पुलिस गुजरात पहुंची, लेकिन वहां दिया गया पता फर्जी निकला. पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया तो जांच की दिशा दादरा-नगर हवेली के औद्योगिक क्षेत्र की ओर मुड़ गई. यहीं से प्रतिबंधित मांजे के उत्पादन का सुराग मिला.
बंद कंपनी के भीतर चल रहा था करोड़ों का खेल!
जांच में 'मार्मिक इंडस्ट्रीज' नामक कंपनी बंद मिली. पुलिस ने तलाशी के लिए अदालत से अनुमति मांगी. मंजूरी मिलते ही 21 अक्टूबर को स्थानीय प्रशासन के समन्वय से कंपनी का ताला खुलवाया गया. अंदर तलाशी ली गई तो प्रतिबंधित मांजे का विशाल भंडार और उसे तैयार करने वाली मशीनें सामने आईं. पुलिस ने 88 हजार से अधिक चकरी, 5 करोड़ 9 लाख 3 हजार 100 रुपये का तैयार नायलॉन मांजा और करीब 95 लाख रुपये की अत्याधुनिक मशीनें, कच्चा माल, पाउडर तथा पैकिंग सामग्री जब्त की. कुल जब्ती का आंकड़ा 6.26 करोड़ रुपये से अधिक है. इस बरामदगी ने प्रतिबंधित मांजे के कारोबार के बड़े पैमाने का खुलासा किया है।
दस ब्रांड के नाम पर देशभर में सप्लाई!
जांच में सामने आया कि कारखाने में 'वुल्फर', 'स्टिंगर', 'बॉयफ्रेंड', 'डेंजर मैन', 'वुल्फर सायनर', 'ब्लैक स्पाइडर', 'वुल्फर सुपर', 'मसल मैन', 'वुल्फर स्टिंगर' और 'यूनिसेफ' जैसे नामों से खतरनाक नायलॉन मांजा तैयार किया जा रहा था। तैयार मांजे को देश के अलग-अलग राज्यों में भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
अब नेटवर्क के सरगनाओं पर नजर
करोड़ों का माल जब्त होने के बाद अब जांच का सबसे अहम सवाल है कि इस पूरे कारोबार के पीछे कौन-कौन है. देशभर में मांजे की सप्लाई किन लोगों तक पहुंचती थी. उत्पादन, पैकिंग और परिवहन की इस श्रृंखला में और कौन शामिल है. अबतक की जांच में इस कारखाने से नागपुर में नायलान मांजे की नियमित आपूर्ति किए जाने का पता चला है. पूर्व में भी नायलान मांजा की बरामदगी होने पर कारखाने को सील किया गया था. अदालत के आदेश पर उसे पून: आरंभ किया गया. नायलॉन मांजे के कारण हर साल लोगों को जान गवानी पड़ती है. हजारों की संख्या में पक्षियों की भी मौत होती है. ऐसे में उत्पादन के ठिकाने पर की गई यह कार्रवाई तस्करी के नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है. अब देखना होगा कि पुलिस इस कार्रवाई के बाद पूरे नेटवर्क को कितनी दूर तक ध्वस्त कर पाती है. यह कार्रवाई अधीक्षक हर्ष पोद्दार और अपर अधीक्षक अनिल मस्के के मार्गदर्शन में की गई.
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