नांदेड में फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में किसान की लाश, जरांगे पाटील बोले, आत्महत्या मत करो
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नांदेड की घटना पर मनोज जरांगे पाटील ने किसानों से हाथ जोड़कर आत्महत्या न करने की अपील की और फाइनेंस कंपनियों को पैसे न देने को कहा।
नांदेड में एक प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में किसान की लाश मिली। इस घटना से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटील ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
जरांगे पाटील ने साफ किया कि वे उस किसान के परिवार से मिलने जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा वे सरकार के दरबार में पूरी ताकत से उठाएंगे। इसी मौके पर उन्होंने किसानों से भावुक होकर अपील की कि वे आत्महत्या जैसा कदम न उठाएं।
किसानों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए जरांगे पाटील भावुक हो गए। उनका कहना था कि संकट एक के बाद एक पीछे लगे हुए हैं, लेकिन सूखे का यह संकट भी निकल जाएगा। इसलिए किसान कोई खतरनाक कदम न उठाएं। हाथ जोड़कर उन्होंने कहा, "आत्महत्या मत करो, मैं आपके पैर पड़ता हूं। बच्चों का बहुत बुरा हाल होता है।"
क्रांतिकारी शेतकरी संघटना ने फाइनेंस कंपनी का दफ्तर तोड़ दिया था। जरांगे ने इस घटना पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वे किसान के परिवार के साथ पूरी ताकत से खड़े रहेंगे। साथ ही उन्होंने फाइनेंस कंपनियों के वसूली के तरीके पर ऐतराज जताया।
जरांगे ने अपील की कि फाइनेंस वालों को पैसे नहीं देने हैं, महाराष्ट्र में कोई भी पैसे न भरे। उनके इस बयान से कर्ज वसूली का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
राज्य सरकार पर भी जरांगे पाटील ने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि मराठा समाज के कुछ लोगों को उनके खिलाफ बोलने के लिए आगे किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के समर्थक उनके खिलाफ माहौल बना रहे हैं। फिर भी उन्होंने साफ कहा कि वे ऐसी आलोचना का जवाब देते नहीं बैठेंगे।
आने वाली राजनीति पर बोलते हुए जरांगे पाटील ने 2029 के चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सही वक्त पर वे मतदान को लेकर अपना रुख जाहिर करेंगे। उनकी अपेक्षा है कि सत्ता में मराठा समाज के चार से पांच मंत्री जरूर होने चाहिए।
जरांगे पाटील ने इस बात का दुख भी जताया कि दूसरे समाजों को मुश्किल के वक्त अपने समाज के मंत्रियों का सहारा मिलता है, मगर मराठा समाज को वैसा सहारा नहीं मिल रहा। एक तरफ किसानों के सवालों पर आक्रामक रुख और दूसरी तरफ 2029 की राजनीति के इशारे, इन दोनों वजहों से उनके बयानों की इस वक्त खूब चर्चा हो रही है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।