दिवाली की भीड़ में बिना टिकट वालों पर नजर, पश्चिम रेलवे का 'ऑपरेशन दीप' 14 नवंबर तक
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पश्चिम रेलवे ने मुंबई विभाग के स्टेशनों और गाड़ियों में टिकट चेकिंग बढ़ा दी है। मोहिम 14 नवंबर तक चलेगी।
दिवाली की छुट्टियों में रेलवे से सफर करने वालों की तादाद बढ़ रही है। इसी बीच बिना टिकट सफर करने वालों को रोकने के लिए पश्चिम रेलवे ने एक खास मुहिम शुरू की है। इस मुहिम का नाम 'ऑपरेशन दीप' रखा गया है।
ऑपरेशन दीप के तहत मुंबई विभाग के स्टेशनों और गाड़ियों में टिकट चेकिंग का दायरा बढ़ाया गया है। यह मुहिम 14 नवंबर तक चलेगी। इसमें बिना टिकट सफर करने वाले, रिजर्व डिब्बों में बिना इजाजत घुसने वाले और गलत श्रेणी से सफर करने वाले यात्री निशाने पर रहेंगे। जो भी नियम तोड़ेगा, उससे जुर्माना वसूला जाएगा।
त्योहार के दिनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ती है, तो टिकट चेकिंग का काम भी मुश्किल हो जाता है। बिना टिकट वालों की वजह से वैध टिकट लेकर चलने वाले यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इसीलिए चेकिंग की योजना और बड़े पैमाने पर बनाई गई है। स्टेशनों पर होने वाली नियमित चेकिंग के साथ अचानक चेकिंग, जाल बिछाकर की जाने वाली कार्रवाई और खास टीमों के जरिए गाड़ियों के अंदर भी जांच की जाएगी।
ऑपरेशन दीप चार चरणों पर टिका है: खोज, जांच, नियमों पर अमल और जुर्माने की वसूली। 'डी' का मतलब डिटेक्टिव है, जिसमें बिना टिकट यात्रियों को ढूंढा जाएगा। 'ई' यानी एग्जामिन में टिकट और जरूरी कागजात की जांच होगी। दूसरा 'ई' इन्फोर्स के लिए है, जिसमें रेलवे के नियम लागू कराए जाएंगे। 'पी' का मतलब पेनलाइज है, यानी इस चरण में नियम तोड़ने वालों से जुर्माना लिया जाएगा।
चेकिंग के दौरान होने वाले विवाद, स्टाफ की सुरक्षा और यात्रियों से बातचीत को ज्यादा पारदर्शी रखने के लिए पश्चिम रेलवे ने बॉडी-वॉर्न कैमरों का प्रयोग शुरू किया है। मुंबई सेंट्रल विभाग के टिकट चेकिंग स्टाफ को ये कैमरे और खास काले रंग की जैकेट दी गई हैं। शुरुआत में 15 बॉडी कैमरे और 30 जैकेट दी गई हैं। प्रयोग के तौर पर चल रही इस पहल से रेलवे चेकिंग की पूरी प्रक्रिया पर ज्यादा नियंत्रण रखना चाहती है।
बिना टिकट सफर रोकने के लिए पश्चिम रेलवे सिर्फ नियमित चेकिंग के भरोसे नहीं है। स्टेशन चेकिंग, ट्रैप यानी जाल बिछाकर चेकिंग, अचानक छापा, फोर्ट्रेस चेक और मेगा टिकट चेकिंग मुहिम जैसे कई तरीके अपनाए जा रहे हैं। मेल, एक्सप्रेस और स्पेशल गाड़ियों में भी यह कार्रवाई होती है। रेलवे कानून के प्रावधानों के मुताबिक बिना टिकट सफर करने पर कम से कम 500 रुपये का जुर्माना लगता है। इसलिए पश्चिम रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे सफर से पहले वैध टिकट जरूर निकालें।
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