संजय राउत का अजित पवार गुट से तंज, पद के लिए भिखारी की तरह दरवाजे पर न खड़े हों
वित्त मंत्री पद की मांग पर शिवसेना ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने अजित पवार गुट को स्वाभिमान की सलाह दी और भाजपा पर भी निशाना साधा।
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शिवसेना ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस के अजित पवार गुट को लेकर ऐसी बात कही है कि एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वित्त मंत्री पद की मांग पर बोलते हुए राउत ने इस गुट को भिखारी कहा।
राज्य की राजनीति में इन दिनों बड़ी हलचल चल रही है। मनोज जरांगे पाटील ने 500 करोड़ की जिस कथित ऑडियो क्लिप का जिक्र किया, उसके बाद एकदम खलबली मच गई। इसी को लेकर महायुति में विवाद चल ही रहा था कि अजित पवार गुट ने मुख्यमंत्री फडणवीस से वित्त मंत्री पद की मांग कर दी। उसी मांग पर अब राउत की टिप्पणी आई है।
संजय राउत ने आज, यानी सोमवार 26 अक्टूबर को मीडिया से बात की और कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। लेकिन सबसे कड़ी आलोचना उन्होंने इसी बात पर की कि अजित पवार गुट के नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलकर वित्त मंत्री पद मांगा।
राउत ने कहा कि वित्त मंत्री का पद कोई बहुत बड़ा विषय नहीं है। इसी के साथ उन्होंने यह राय भी रखी कि अजित पवार को तो मुख्यमंत्री पद मिलना चाहिए था।
राउत के शब्द थे कि अजित पवार अनुभवी और सक्षम नेता थे और उनका एक अलग रौब था। फिर उन्होंने अजित पवार गुट पर तंज कसते हुए कहा, "आपको तो पद के लिए भिखारी की तरह दरवाजे पर खड़ा होना पड़ता है, स्वाभिमान नाम की कोई चीज रखिए।"
राउत यहीं नहीं रुके। उन्होंने भाजपा पर भी आरोप लगाया कि उसके नेता जबान के पक्के नहीं हैं। उनके मुताबिक भाजपा राजनीतिक सुविधा के लिए लोगों को पास तो बुला लेती है, पर बाद में दगाबाज़ी करती है। राउत ने यह दावा भी किया कि अजित पवार के मन में भी भाजपा के काम करने के तरीके को लेकर नाराज़गी थी और वे सरकार से बाहर निकलने की सोच रहे थे।
इसलिए राउत ने अजित पवार गुट को सलाह दी कि पदों के लिए बार-बार मांग करने के बजाय अपना स्वाभिमान संभालकर रखें।
500 करोड़ की ऑडियो क्लिप के मुद्दे पर भी राउत ने टिप्पणी की। सांसद श्रीकांत शिंदे ने 500 करोड़ को लेकर जो बयान दिया था, उस पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने बड़े आर्थिक आंकड़ों पर चुटकी ली। उनका कहना था कि कुछ लोगों को हजारों करोड़ की रकम भी मामूली लगती है, जबकि आम आदमी के लिए कुछ हजार रुपये भी बड़ी बात होते हैं।
कुल मिलाकर, वित्त मंत्री पद की मांग से शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ एक विभाग तक सीमित नहीं रहा। अजित पवार गुट के स्वाभिमान, भाजपा के साथ सत्ता के समीकरण और महायुति की अंदरूनी राजनीति को लेकर अगले कुछ दिन आरोप-प्रत्यारोप चलने की संभावना है।
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