नागपुर में ठंड की दस्तक: बच्चों और बुजुर्गों के लिए सर्दी, खांसी और सांस की दिक्कत का खतरा
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नागपुर में ठंडक बढ़ने के साथ बच्चों और बुजुर्गों के लिए सेहत की सावधानियों पर जारी सलाह।
नागपुर में मौसम बदल रहा है और ठंडक बढ़ने लगी है। सलाह में बताया गया है कि ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर खास सावधानी रखना जरूरी है। कहा गया है कि सुबह और शाम के तापमान में फर्क आने से सर्दी, जुकाम, खांसी और सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
सलाह के मुताबिक परिवारों को कपड़ों, खानपान और रोजमर्रा की दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए। अस्थमा, हृदय रोग या दूसरी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अपने लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
छोटे बच्चों के बारे में कहा गया है कि उन्हें मौसम के हिसाब से गर्म कपड़े पहनाए जाएं। सुबह और शाम बाहर ले जाते वक्त उनका सिर, गर्दन और पैर ढककर रखें। साथ ही यह भी बताया गया है कि जरूरत से ज्यादा कपड़े पहनाने पर पसीना आ सकता है, इसलिए आरामदायक कपड़े चुनें। बच्चों को पौष्टिक खाना और काफी तरल पदार्थ देने को कहा गया है। अगर बच्चे को तेज बुखार हो, खांसी लगातार बनी रहे, सांस लेने में दिक्कत हो या वह अजीब तरह से सुस्त दिखे, तो डॉक्टर से संपर्क करने की बात कही गई है।
बुजुर्गों के लिए सलाह है कि सुबह जल्दी और देर शाम बाहर निकलें तो गर्म कपड़े पहनें, घर के अंदर हल्की शारीरिक गतिविधि करें और पूरी नींद लें। मधुमेह, अस्थमा या हृदय रोग वाले बुजुर्ग अपनी नियमित दवाएं लेते रहें और डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं में कोई बदलाव न करें। सीने में दर्द हो, सांस फूले या अचानक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सा मदद लेने को कहा गया है।
खानपान को लेकर बताया गया है कि ठंड में भी शरीर को पानी की जरूरत रहती है, इसलिए थोड़े थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहें। खाने में मौसमी फल, सब्जियां और दालें शामिल करने की बात कही गई है। सूप और गुनगुने पेय से आराम मिल सकता है, पर इन्हें बीमारी का इलाज न समझा जाए। बच्चों और बुजुर्गों को बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक या कफ सिरप न देने को भी कहा गया है।
कमरा गर्म रखने के लिए हीटर चलाएं तो सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। बंद कमरे में अंगीठी या कोयला जलाने से बचने को कहा गया है, क्योंकि इससे जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का खतरा हो सकता है। नागपुर जिले के मौसम से जुड़ी चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह भी दी गई है।
लगातार बुखार, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी या शरीर में पानी की कमी के लक्षण दिखें तो डॉक्टर से मिलने को कहा गया है। छोटे बच्चों में दूध कम पीना, पेशाब कम आना या असामान्य सुस्ती भी गंभीर संकेत हो सकते हैं। सलाह में कहा गया है कि वक्त पर डॉक्टर की राय लेने से मौसमी बीमारियों की जटिलताओं से बचने में मदद मिल सकती है।
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