सावली में बाघ के हमलों में दो किसानों की मौत, वडेट्टीवार ने वनविभाग को चेताया
चंद्रपूर जिले के सावली तालुका में बाघ के लगातार हमलों से गांवों में दहशत, विधायक विजय वडेट्टीवार ने आंदोलन की चेतावनी दी
चंद्रपूर जिले के सावली तालुका में बाघ के हमलों ने दो किसानों की जान ले ली है, और इस मामले पर विधिमंडल पक्षनेता विजय वडेट्टीवार ने वनविभाग के काम करने के तरीके पर सख्त नाराजगी जताई है। सावली वनपरिक्षेत्र के निलसनी-पेठगाव इलाके में गुरे चराते वक्त एक किसान पर बाघ ने हमला किया, जिसमें उसकी मौत हो गई। इसके कुछ ही दिन बाद, 21 सितंबर को सामदा बुज इलाके में हेमंत अशोक भुरसे नाम के किसान की भी ऐसे ही हमले में जान चली गई।
एक के बाद एक हो रही इन घटनाओं से जंगल से सटे गांवों के लोगों में डर का माहौल बन गया है। वडेट्टीवार ने साफ कहा है कि अगर नरभक्षी बाघ पर तुरंत काबू नहीं पाया गया, तो वे वनविभाग के खिलाफ तीव्र जनआंदोलन खड़ा करेंगे।
सावली तालुका के कई गांवों के लोगों का रोज का नाता खेती और जंगल से जुड़ा है। खरीफ के सीजन का काम चल रहा है, ऐसे में किसानों का खेत जाना जरूरी है, लेकिन बाघ की दहशत की वजह से घरवालों की धड़कनें उनके खेत निकलने से पहले ही बढ़ जाती हैं। "लोग खेती कैसे करें? गुरे कहां चराएं? परिवार का पेट कैसे भरें? हर बार वनविभाग सिर्फ गश्त बढ़ाने की बात कहकर मामला निपटा देता है, क्या इससे सवाल हल होगा?" ऐसा सवाल वडेट्टीवार ने उठाया।
गुरे चराने गए लोगों पर ही हमले हो रहे हैं, इसलिए गांव के लोगों की सुरक्षा का सवाल अब बड़ा मुद्दा बन गया है। वडेट्टीवार ने कहा, "अगर किसान को अपने ही खेत में जाने से डर लगे, तो यह सामान्य हालात नहीं है।" उन्होंने बताया कि घटना होने के बाद अफसर मौके पर पहुंचते हैं, पंचनामा करते हैं और गश्त बढ़ाने की जानकारी दे देते हैं, लेकिन लोगों का असली सवाल जस का तस रहता है कि बाघ का खतरा कम करने के लिए पक्के और कानूनी उपाय आखिर कब होंगे।
वडेट्टीवार ने साफ किया कि उन्हें वन्यजीवों की सुरक्षा से कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन जंगल के किनारे रहने वाले आम लोगों की जान बचाना भी सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा, "वन्यजीव संरक्षण के नाम पर इंसानों की जिंदगी की कीमत शून्य नहीं की जा सकती। लोगों की जान खतरे में है, तो प्रशासन को कागजी रिपोर्ट, सूचना और मीटिंगों से आगे बढ़कर असल में कुछ करना होगा।"
वडेट्टीवार ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी कि "जनता के सब्र की परीक्षा मत लीजिए, किसी और मासूम की जान जाने का इंतजार मत कीजिए। सावली तालुका के लोगों की जान की जिम्मेदारी सरकार को खुद लेनी होगी। अगर तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हम लोगों को साथ लेकर सड़क पर उतरेंगे और तीव्र जनआंदोलन खड़ा करेंगे।"
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।