अभिनेता नाना पाटेकर का 75 की उम्र में निधन, निशानेबाज़ी में जीता था राष्ट्रीय स्तर का रजत
मराठी और हिंदी फिल्मों के वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। अभिनय के साथ वे रायफल शूटर भी थे और राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीत चुके थे।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मराठी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर का आज 75 साल की उम्र में निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने से उनकी जान गई। उनके जाने से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। अंतिम संस्कार पुणे के डोणजे में उनके घर पर होगा।
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में नाना पाटेकर की अलग पहचान थी। उन्हें तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था और भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया था। खबरों में उनके गोवा के घर में दिल का दौरा पड़ने की बात भी सामने आई है। पर्दे की दुनिया के साथ-साथ खेल से भी उनका गहरा रिश्ता रहा है।
अभिनेता होने के साथ नाना पाटेकर रायफल शूटर यानी निशानेबाज भी थे। वे राष्ट्रीय स्तर की रायफल शूटिंग में शामिल हुए थे और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उन्होंने मेडल भी जीता था। इस तरह खेल के मैदान में भी उन्होंने खुद को साबित किया था।
निशानेबाजी की शुरुआत भी एक फिल्म के किरदार से हुई। उस रोल के लिए उन्होंने रायफल शूटिंग सीखना शुरू किया था। उन्होंने भारतीय सैनिकों के साथ जी-3 रायफल शूटिंग की ट्रेनिंग भी ली थी। बताया गया है कि उन्होंने 40 साल की उम्र में निशानेबाजी सीखनी शुरू की थी। मेहनत, जिद और भारी संघर्ष के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर मेडल जीता।
उनकी फिल्म प्रहार का किस्सा भी खेल से जुड़ा है। फिल्म में किरदार बिल्कुल सटीक और असली लगे, इसलिए उन्होंने भारतीय सेना के साथ निशानेबाजी की कड़ी ट्रेनिंग ली थी। इस दौरान उन्हें बड़ा अनुभव मिला, जो फिल्म में अभिनय करते वक्त उनके काम आया।
साल 2004 में मध्य प्रदेश के इंदौर में बीएसएफ की रिओटी रेंज पर 48वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी प्रतियोगिता हुई थी। इसी प्रतियोगिता में नाना ने 300 मीटर बिग-बोर मुकाबले में रजत पदक जीता था। उनके अभिनय और समाजसेवा की चर्चा हमेशा होती रही है, लेकिन यह उपलब्धि बताती है कि पर्दे के बाहर भी वे असल जिंदगी में कमांडो जैसे ही जज्बे वाले थे।