बुधवार, 16 सितमबर 2026

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22:40 IST

चंद्रपुर में बांबू सप्ताह में ग्रामीण रोजगार और उद्योग पर चर्चा, तज्ज्ञों का मार्गदर्शन

चंद्रपुर में बांबू सप्ताह में ग्रामीण रोजगार और उद्योग पर चर्चा, तज्ज्ञों का मार्गदर्शन
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

चंद्रपूर के वन प्रबोधिनी में जागतिक बांबू सप्ताह-२०२६ के दूसरे दिन का सत्र हुआ। इस दौरान अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक आर. एम. रामानुजम ने कहा कि बांबू आधारित उद्योगों में आगे बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए वन विभाग, रिसर्च संस्थाएं, उद्योग और किसानों के बीच तालमेल जरूरी है।

रामानुजम ने कहा कि बांबू को सिर्फ लगाने की चीज मानकर नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह टिकाऊ रोजी-रोटी का जरिया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ता है और गांव की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। यह बात उन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कही।

'बांबू फॉर द फ्यूचर फ्रॉम ट्रेडिशन टू इनोवेशन' थीम पर आधारित यह सप्ताह १४ से १८ सितंबर तक चल रहा है। इसका मकसद बांबू को सिर्फ पारंपरिक इस्तेमाल तक सीमित न रखकर विज्ञान, रिसर्च, नई टेक्नोलॉजी, टिकाऊ विकास, वैल्यू एडिशन और इनोवेशन से जोड़ना है। दूसरे दिन के अलग-अलग सत्रों में वन विभाग के सीनियर अफसरों, वैज्ञानिकों, रिसर्चरों, प्रोफेसरों, उद्यमियों और बांबू क्षेत्र के जानकारों ने मार्गदर्शन दिया।

इस मौके पर बांबू संशोधन व प्रशिक्षण केंद्र, चिचपल्ली के डायरेक्टर और चंद्रपूर वन प्रबोधिनी के अपर संचालक (प्रशिक्षण) उमेश वर्मा, नीरी नागपुर के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. लाल सिंग, न्यू इरा क्लीन टेक सोल्यूशन्स प्रा. लि., भद्रावती के सीनियर मैनेजर (स्ट्रैटेजी) आयुष राज सिन्हा, एसएमएमसीए नागपुर के आर्किटेक्चर डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. तारिका दगडकर, चंद्रपूर वन प्रबोधिनी के उपसंचालक विश्वनाथ चव्हाण, हनुमंत जाधव, अश्विनी जाधव, सत्र संचालक संभाजी गवळी और रामदास पुजारी, बीआरटीसी के वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश शेंडे तथा ज्ञान प्रबोधिनी इनोवेशन फाउंडेशन, पुणे के सीईओ वैभव मोगरेकर मौजूद रहे।

प्रस्तावना में उमेश वर्मा ने जागतिक बांबू सप्ताह आयोजित करने के पीछे की सोच बताई और बीआरटीसी की तरफ से चलाई जा रहीं अलग-अलग योजनाओं की जानकारी दी। आयुष राज सिन्हा ने टिकाऊ बांबू विकास, नई टेक्नोलॉजी और उद्योग क्षेत्र में आगे की संभावनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि रिसर्च से निकलने वाली टेक्नोलॉजी को असली उद्योग और बाजार तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत कड़ी बनानी जरूरी है।

डॉ. लाल सिंग ने बांबू के जरिए पर्यावरण की बहाली और इकोसिस्टम बचाने के विषय पर मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि पर्यावरण और आर्थिक जरूरतों में संतुलन बनाने के लिए बांबू का ज्यादा असरदार इस्तेमाल किया जा सकता है। वैभव मोगरेकर ने 'वैल्यू एडिशन से बांबू को नई दिशा' विषय पर मार्गदर्शन दिया।

इसके अलावा संजीवनी एग्रो मशिनरी, नागपुर के अनिल चौक, बिलासपुर की डॉ. गुंजन पाटील, नागालैंड के डॉ. भूपेश गिरीधरण और तेलंगाना के श्रवण कुमार चिवुकुला ने ऑनलाइन माध्यम से बांबू क्षेत्र के अलग-अलग विषयों पर मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम का संचालन बीआरटीसी की सुपरवाइजर योगिता साठवणे और विभागप्रमुख सुमेध लिचडे ने किया। रिटायर्ड सहायक वनसंरक्षक रामदास पुजारी ने धन्यवाद माना। इस दौरान डॉ. आंबेडकर कॉलेज, सरदार पटेल कॉलेज, सुशीलाबाई मामीडवार सोशल वर्क कॉलेज, जनता कॉलेज, एफईएस गर्ल्स कॉलेज और राजीव गांधी कॉलेज के टीचर और स्टूडेंट्स बड़ी तादाद में मौजूद रहे। इस मौके पर हिस्सा लेने वाले स्टूडेंट्स को सर्टिफिकेट भी बांटे गए।

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