आचार संहिता के बीच नागपुर मनपा के काम छोटे टुकड़ों में, ऑफलाइन टेंडर पर उठे सवाल
आचार संहिता के दौरान नागपुर महानगरपालिका पर कुछ कामों को अत्यावश्यक बताकर छोटे हिस्सों में बांटने और ऑफलाइन टेंडर निकालने की चर्चा है।
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नागपुर महानगरपालिका क्षेत्र में आचार संहिता लगी हुई है और इसी बीच विकास कामों को लेकर नई चर्चा छिड़ गई है। बताया जा रहा है कि कुछ कामों को 'इमरजेंसी' या अत्यावश्यक बताकर कम राशि के छोटे-छोटे हिस्सों में आगे बढ़ाया जा रहा है।
इन कामों के लिए ऑफलाइन टेंडर निकाले जाने की बात भी सामने आ रही है। इससे एक तरफ नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ मनपा के उपलब्ध बजट और साल के आखिर तक होने वाले खर्च की स्थिति को लेकर भी तरह-तरह की बातें हो रही हैं।
आचार संहिता के दौरान नियमित विकास कामों पर प्रशासन के सामने कई प्रक्रियागत पाबंदियां रहती हैं। सूत्रों ने जानकारी दी कि ऐसे में अत्यावश्यक कामों को तरजीह देने की व्यवस्था का सहारा लेकर कुछ काम आगे बढ़ाए जा रहे हैं। अगर बड़े या पहले से तय कामों को टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग प्रस्ताव या टेंडर के जरिए कराया जाता है, तो पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और उसकी जरूरत की जांच अहम हो जाती है।
सूत्रों के मुताबिक कुछ कामों को फौरी जरूरत का हवाला देकर टुकड़ों में कराने की चर्चा है। इससे सवाल उठता है कि क्या ये सचमुच इमरजेंसी वाले काम हैं, या पहले से तय कामों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर मंजूरी और टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
हालांकि हर काम की प्रशासकीय मंजूरी, तकनीकी मंजूरी, अनुमानित लागत और टेंडर की शर्तों की अलग से जांच जरूरी होगी। सिर्फ चर्चा या आरोप के आधार पर किसी प्रक्रिया को नियम के खिलाफ नहीं माना जा सकता।
उधर नागपुर मनपा के अलग-अलग विभागों के बजट को लेकर भी अंदरखाने बातचीत तेज होने की बात सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि कुछ मदों में बजट का बड़ा हिस्सा पहले ही खर्च हो चुका है। लेकिन 'मनपा का बजट खत्म हो गया' यह दावा आधिकारिक आंकड़ों के बिना फिलहाल पक्के तथ्य के तौर पर नहीं कहा जा सकता।
असल हालत जानने के लिए मनपा का संशोधित बजट, विभागवार आवंटन, अब तक का असल खर्च, प्रशासकीय मंजूरियां, जारी किए गए वर्क ऑर्डर और बची हुई रकम की जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी है। तब साफ होगा कि किस मद में कितनी राशि तय हुई और उसमें से कितनी सचमुच खर्च हुई।
आचार संहिता के बीच ऑनलाइन टेंडर के दौर में ऑफलाइन टेंडर निकाले जाने की जानकारी ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। सवाल है कि किन हालात में ऑफलाइन तरीका अपनाया जा रहा है, इन कामों को अत्यावश्यक घोषित करने का आधार क्या है और हर काम के लिए सक्षम अधिकारी की इजाजत ली गई है या नहीं। अगर काम सचमुच इमरजेंसी के हैं, तो उनकी जरूरत, समय सीमा और प्रशासनिक वजह साफ होनी चाहिए।
वहीं किसी बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटा गया हो, तो हर हिस्से की अपनी जरूरत और लागत को परखना भी अहम है। जानकारों की मानें तो चुनाव को लेकर आचार संहिता भले लगी हो, पर राजनीतिक दबाव की वजह से इस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।