नागपुर में पटाखा दुकानों के 831 अस्थायी लाइसेंस जारी, देर रात आतिशबाजी की शिकायतें बरकरार
नागपुर मनपा के अग्निशमन विभाग ने 2026 में पटाखा दुकानों के लिए 831 अस्थायी प्रमाणपत्र जारी किए हैं, जबकि हाई कोर्ट के कड़े निर्देश लागू हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर जिले में पटाखों को लेकर हाई कोर्ट पहले ही कड़े और साफ निर्देश जारी कर चुका है। लेकिन इन आदेशों का पालन कितनी सख्ती से होगा, यह देखने वाली बात होगी। वजह यह है कि नागपुर मनपा के अग्निशमन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार पटाखा दुकानों के लिए पिछले साल से ज्यादा लाइसेंस (एनओसी) जारी हुए हैं।
अग्निशमन विभाग ने 2015 से 2026 तक के आंकड़े जारी किए हैं। इनके अनुसार 2026 में विभाग ने कुल 831 अस्थायी प्रमाणपत्र जारी किए। पिछले 12 वर्षों में सबसे ज्यादा 982 प्रमाणपत्र 2016 में जारी हुए थे, जबकि सबसे कम 582 प्रमाणपत्र 2020 में जारी हुए।
2020 में संख्या सबसे निचले स्तर 582 पर पहुंच गई थी। उसके बाद इसमें फिर बढ़ोतरी हुई और 2024 से 2026 तक यह आंकड़ा लगातार 800 से ऊपर बना हुआ है।
अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार बाजार में नए-नए तरीकों से प्रदूषण रहित पटाखे उतारे जा रहे हैं, पर उनकी आवाज काफी तेज होती है। हाई कोर्ट ने रात 10 बजे के बाद पटाखे फोड़ने पर पाबंदी लगा रखी है। इसका पालन होना जरूरी है। मगर अब तक का अनुभव यह है कि खास तौर पर रात 12 बजे के बाद कई इलाकों में पटाखे फोड़े जाते हैं। इसकी शिकायतों के कॉल अग्निशमन विभाग के पास आते रहते हैं। इन शिकायतों से निपटना विभाग के लिए चुनौती होगी।
केंद्र के हिसाब से देखें तो गंजीपेठ अग्निशमन केंद्र से 2015 में 77 और 2016 में 74 प्रमाणपत्र जारी हुए थे। 2020 में यहां सबसे कम 35 प्रमाणपत्र दिए गए, जबकि 2026 में संख्या 54 दर्ज हुई।
सक्करदरा अग्निशमन केंद्र ने 2015 में 180 प्रमाणपत्र जारी किए थे। 2023 में 170 और 2024 में 174 प्रमाणपत्र जारी हुए। 2025 में यह संख्या घटकर 98 रह गई, फिर 2026 में बढ़कर 123 हो गई।
लकड़गंज अग्निशमन केंद्र से 2015 में 81 प्रमाणपत्र जारी हुए थे। 2024 में 186, 2025 में 154 और 2026 में 157 प्रमाणपत्र जारी किए गए।
सुगतनगर अग्निशमन केंद्र ने 2015 में 141 और 2016 में 150 प्रमाणपत्र दिए थे। 2020 में आंकड़ा घटकर 93 हुआ और 2026 में इस केंद्र ने 110 प्रमाणपत्र जारी किए।
नरेंद्रनगर अग्निशमन केंद्र से 2018 में सबसे ज्यादा 385 प्रमाणपत्र जारी हुए थे। 2020 में यह संख्या घटकर 69 रह गई थी। इसके बाद 2025 में 107 और 2026 में 128 प्रमाणपत्र दिए गए।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।