नागपुर महापालिका के कर्मचारी पर 50 लाख की कोविड सहायता के लिए दस्तावेज़ों में हेराफेरी का मामला दर्ज
लकड़गंज पुलिस ने 12 अक्टूबर को केस दर्ज किया; आरोपों की जांच जारी है।
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नागपुर महानगरपालिका (NMC) के एक टैक्स कलेक्टर पर सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करके 50 लाख रुपये की सरकारी सहायता हासिल करने की कोशिश का आरोप लगा है। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया है। इससे कोविड-19 राहत योजना के तहत आने वाले दावों की जांच-पड़ताल पर गंभीर सवाल उठे हैं।
जिस कर्मचारी पर मामला दर्ज हुआ है, उसका नाम अमित लक्ष्मण थोम्बरे (31) है। वह NMC के लकड़गंज ज़ोन में टैक्स कलेक्टर के पद पर काम करता है। उस पर आरोप है कि उसने दफ्तर के असली दस्तावेज़ों से छेड़छाड़ की और गलत जानकारी दी, ताकि वह उस आर्थिक मदद का फायदा ले सके जो कोविड-19 महामारी के दौरान जान गंवाने वाले नगर निगम कर्मचारियों के परिवारों के लिए रखी गई थी।
लकड़गंज पुलिस ने यह केस 12 अक्टूबर को दर्ज किया। शिकायत NMC के ज़ोन 8 से जुड़े टैक्स सुपरिंटेंडेंट प्रभाकर काले (53) ने की थी। आरोपों की जांच चल रही है।
शिकायत के मुताबिक थोम्बरे के पिता लक्ष्मण लकड़गंज ज़ोन दफ्तर में चपरासी थे और महामारी के दौरान उनकी मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद थोम्बरे को अनुकंपा के आधार पर नगर निगम में नौकरी मिली।
सरकार के एक सर्कुलर के तहत महामारी में मरने वाले पात्र सरकारी और निगम कर्मचारियों के परिवारों को तय शर्तों के साथ 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल सकती थी।
जांच करने वालों को शक है कि थोम्बरे ने इस मुआवज़े के लिए पात्र बनने की कोशिश में सरकारी दस्तावेज़ों में हेरफेर किया और उनमें गलत जानकारी डाली। दावे की जांच के दौरान ये कथित गड़बड़ियां सामने आईं, जिसके बाद निगम प्रशासन ने शिकायत की प्रक्रिया शुरू की।
पूरा मामला इस बात पर टिका है कि मुआवज़े के दावे के साथ लगाए गए सरकारी रिकॉर्ड असली थे या नहीं। अब पुलिस को यह साबित करना होगा कि कौन से दस्तावेज़ कथित तौर पर बदले गए, कौन सी जानकारी गलत बताई गई और क्या ये कथित बदलाव ऐसा आर्थिक फायदा लेने के लिए किए गए थे, जो उसे वैसे नहीं मिल सकता था।
गड़बड़ियां किन हालात में पकड़ में आईं, कथित बदलाव किस तरह के थे और आरोपी की ठीक-ठीक क्या भूमिका थी, ये जांच के अहम पहलू माने जा रहे हैं।
इतनी बड़ी रकम पाने की कथित कोशिश से मुआवज़ा योजनाओं के दावों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं, खासकर तब जब लाभ सरकारी नौकरी के रिकॉर्ड और पात्रता के दस्तावेज़ों पर निर्भर करता हो।
जांच करने वालों को यह भी पता लगाना होगा कि विवादित दस्तावेज़ संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया से कैसे गुज़रे, अगर गुज़रे थे, और क्या दावा तैयार करने, जांचने या आगे बढ़ाने में किसी और का भी हाथ था। ये बातें अभी तय नहीं हुई हैं।
लकड़गंज पुलिस ने शिकायत और शुरुआती पूछताछ के आधार पर केस दर्ज किया है। आगे की जांच इस बात की चल रही है कि रिकॉर्ड से कथित छेड़छाड़ कितनी हुई और क्या मुआवज़े के दावे पर कोई रकम सच में दी भी गई थी।
थोम्बरे के खिलाफ लगे आरोप अभी जांच और अदालती फैसले के दायरे में हैं।