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20:36 IST

नागपुर के तीन गोरखनाथ मंदिरों की जमीन पर कब्जे का आरोप, नाथजोगी समाज ने मांगी जांच

महाराष्ट्रीय संपूर्ण नाग जोगी समाज सुधार संस्था के सलाहकार योगी शंकरनाथ जाधव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन मंदिरों की जमीन और संपत्ति के इस्तेमाल पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की।

नागपुर के तीन गोरखनाथ मंदिरों की जमीन पर कब्जे का आरोप, नाथजोगी समाज ने मांगी जांच तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर और आसपास के इलाकों में तीन गोरखनाथ मंदिरों की जमीन और संपत्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नाथजोगी समाज ने मंदिरों की जमीन पर कथित कब्जे, प्राचीन मूर्तियां हटाए जाने और मंदिरों का मूल स्वरूप बदले जाने के आरोप लगाए हैं। समाज ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

यह मुद्दा सोमवार, 13 अक्टूबर को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया गया। महाराष्ट्रीय संपूर्ण नाग जोगी समाज सुधार संस्था के सलाहकार योगी शंकरनाथ जाधव ने जागनाथ बुधवारी के महायोगी गोरखनाथ मंदिर के साथ रामटेक और लकड़गंज के मंदिरों की संपत्तियों के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए।

जाधव के मुताबिक जागनाथ बुधवारी के गोरखनाथ मंदिर के लिए वर्ष 1909 में पंजीकृत दानपत्र के जरिए करीब 2,700 वर्ग फुट जमीन दान की गई थी। उनका दावा है कि इस जमीन का इस्तेमाल सिर्फ मंदिर के काम के लिए होना था, लेकिन दस्तावेजों में कथित हेरफेर करके उस पर निजी कब्जा पाने की कोशिश की गई। इस मामले में उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी अमोल ठाकरे पर भी आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब उपलब्ध नहीं हो सका है।

जाधव का आरोप है कि मंदिर में स्थापित महायोगी गोरखनाथ, साईंबाबा और भगवान दत्तात्रेय की मूल मूर्तियां उनकी जगह से हटा दी गईं। उनके अनुसार पुराना तहखाना और प्राचीन निर्माण भी तोड़ा गया, जिससे मंदिर का मूल स्वरूप बदल गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि समाज के विरोध के बाद दूसरी मूर्तियां लाकर महंतों की समाधियों पर लगा दी गईं। मंदिर के प्रवेश द्वार पर टिनशेड और लोहे का गेट लगाए जाने से पारंपरिक पूजा-अर्चना में बाधा आने का आरोप भी लगाया गया।

रामटेक के आदिनाथ गोरखनाथ मंदिर की करीब 55 एकड़ जमीन के इस्तेमाल पर भी नाथजोगी समाज ने आपत्ति जताई है। जाधव का आरोप है कि इस जमीन के कुछ हिस्से होटल और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। लकड़गंज के विमलेश्वर गोरखनाथ मंदिर की करीब 15,000 वर्ग फुट जमीन पर दुकानें बनाए जाने और धार्मिक संपत्ति का व्यावसायिक इस्तेमाल होने का दावा भी किया गया है।

समाज ने तीनों मंदिरों के भूमि रिकॉर्ड, असली कब्जे, निर्माण की अनुमतियों, कथित अतिक्रमण और प्रबंधन व्यवस्था की विस्तृत जांच की मांग की है। जाधव ने यह भी आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ और उनसे जुड़ी धार्मिक संस्था के नाम का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जाधव के मुताबिक नाथजोगी समाज करीब दो दशकों से मंदिरों की संपत्तियों को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि चैरिटी कमिश्नर के सामने लगातार कोशिशों के बावजूद समाज को न्याय नहीं मिला।

अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपकर तीनों मंदिरों की संपत्तियों की जांच की मांग की जाएगी। विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी मामले में दखल देने की अपील की गई है।

जाधव ने कहा कि 22 अक्टूबर को गोरखनाथ प्रकट दिवस है। उन्होंने सरकार से अपील की कि उससे पहले दखल देकर जांच कराई जाए और समाज की मांगों पर कार्रवाई हो। ऐसा न होने पर उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से तीव्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोरखनाथ मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष मनीष पुंड, सचिव पुरुषोत्तम कोकाटे, कोषाध्यक्ष साहिल जाधव और समाज के दूसरे पदाधिकारी मौजूद थे।

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