मुनगंटीवार ने आसोलामेंढा-गोसेखुर्द की सिंचाई समस्याएं देखीं, 20 अक्टूबर को जंक्शन लाइन में पानी
विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने चंद्रपूर में सिंचाई समीक्षा बैठक ली। 20 अक्टूबर को जंक्शन लाइन में पानी छोड़ने की योजना है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
चंद्रपुर के डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी सार्वजनिक पुस्तकालय में 15 अक्टूबर को सिंचाई की समीक्षा बैठक हुई। विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने इसमें आसोलामेंढा और गोसेखुर्द परियोजना से जुड़े किसानों की सिंचाई की दिक्कतों का जायज़ा लिया। नहरों के अधूरे काम, पाइपलाइन में रिसाव, कम पानी की सप्लाई और सिंचाई सुविधाओं की कमी जैसी परेशानियों पर उन्होंने विस्तार से बात की।
मुनगंटीवार ने निर्देश दिए कि किसानों को पानी के लिए संघर्ष न करना पड़े और पानी के बिना उनकी फसल का नुकसान न हो। इसके लिए पूरे बल्लारपुर निर्वाचन क्षेत्र को सिंचाई सुविधाओं से भरपूर बनाने का एक सोचा-समझा प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने यह भी साफ किया कि संबंधित विभाग आपस में तालमेल बिठाकर काम करें और सिंचाई के सवाल पहले हल करें।
बैठक में मुनगंटीवार ने बताया कि अगले आठ दिनों में जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन के साथ पानी की सप्लाई के मुद्दों पर बड़ी बैठक होगी। मृदा और जल संरक्षण मंत्री संजय राठौड़ के साथ भी बैठक करके जल संरक्षण के कामों का लंबी अवधि का कार्यक्रम बनाने के निर्देश उन्होंने दिए।
चंद्रपुर जिले के सभी 15 तालुकों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल कराने की कोशिशों का ज़िक्र करते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि सूखे से निपटने के उपायों का फायदा किसानों तक असरदार तरीके से पहुंचना चाहिए। उनके मुताबिक सूखे के हालात में जानवरों के चारे का इंतज़ाम, पीने के पानी की योजनाओं के लिए फंड और जल संरक्षण के काम तेज़ किए जा सकते हैं। इसके लिए अलग फॉलोअप व्यवस्था खड़ी करके सरकार से मिलने वाले मौकों का पूरा इस्तेमाल करने को उन्होंने कहा।
मुनगंटीवार की पहल से SB4 जंक्शन लाइन के ज़रिए आठ गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की कोशिशों को रफ्तार मिली है। उन्होंने इच्छा जताई कि इस जंक्शन लाइन का पानी किसी गरीब किसान के हाथों छोड़ा जाए। उनका कहना था कि गरीब किसान के लिए पानी की हर बूंद रिज़र्व बैंक की तिजोरी की दौलत जितनी कीमती होती है। इस पहल का मकसद है कि किसानों की मेहनत को पानी का साथ मिले और उनकी फसलों में नई जान आए।
मौके के मुआयने और समीक्षा बैठक के बाद 20 अक्टूबर को जंक्शन लाइन में पानी छोड़ने की योजना बनाई गई है। इससे राजोली, चिखली, गांगलवाडी, डोंगरगाव, चिटकी, लोनखैरी, नवेगाव (लोन) और बेंदेवाही, इन आठ गांवों के किसानों की उम्मीदें बढ़ी हैं।
पोंभुर्णा, मूल, बल्लारपुर और चंद्रपुर, इन चार तालुकों के सिंचाई विभाग के अधिकारियों की सूची बनाकर अगले तीन साल में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने के निर्देश मुनगंटीवार ने दिए। यह काम सिंचाई, जल संरक्षण और व्यक्तिगत सिंचाई योजनाओं के ज़रिए होना है। पूरे निर्वाचन क्षेत्र को सिंचाई वाला बनाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बने, व्यक्तिगत सिंचाई के लिए वन विभाग के CAMPA फंड की संभावना जांची जाए, और ह्यूमन परियोजना के कोर क्षेत्र के कुछ हिस्सों के लिए नई योजना से वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार हो, यह भी उन्होंने कहा।
आसोलामेंढा और गोसेखुर्द की समीक्षा में मुनगंटीवार ने नहरों के अधूरे काम, कम पानी की सप्लाई और पाइपलाइन के रिसाव जैसे सवाल पहले निपटाने को कहा। बैठक में सामने आया कि आसोलामेंढा परियोजना की मुख्य नहर की क्षमता 65 क्यूमेक्स है, लेकिन असल में 42 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे सिंचाई पर असर पड़ रहा है। पोंभुर्णा तालुका की पाइपलाइन लीकेज और मूल तालुका के जानाला, सुशी दाबगाव, केलझर और वेलवा की सिंचाई की दिक्कतों पर भी चर्चा हुई। वेलवा में पानी के बिना धान की फसल का नुकसान हो रहा है और तालाब के गहरीकरण का सवाल भी अटका हुआ है, यह बात बैठक में रखी गई।
नहरों का रिसाव ठीक करते समय खेत की फसल को नुकसान हो तो संबंधित विभाग किसानों को मुआवज़ा दे, और सिंचाई के लिए ज़रूरी बिजली भी उपलब्ध कराए, ऐसे निर्देश मुनगंटीवार ने दिए। अटके सवालों के हल के लिए स्थानीय, नागपुर और मुंबई स्तर पर तुरंत पत्राचार करके संबंधित मंत्रियों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने मामला रखने की सूचना भी उन्होंने की। उन्होंने साफ किया कि सिंचाई के सवाल तय समय में सुलझें और मौजूद जल स्रोतों का सही इस्तेमाल करके पानी किसानों के खेत तक पहुंचे।