नागपुर के जलाशयों में 58% पानी, पेयजल की बर्बादी पर 5,000 रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव
कम बारिश से नागपुर को पानी देने वाले जलाशयों में भंडार घटकर 58 प्रतिशत रह गया है। मनपा ने पानी की बर्बादी, अवैध नल कनेक्शन और मीटर से छेड़छाड़ पर सख्ती का प्रस्ताव रखा है।
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नागपुर जिले में इस साल बारिश कम हुई है और इसका असर शहर को पानी देने वाले जलाशयों पर दिख रहा है। इन जलाशयों में पानी का भंडार घटकर सिर्फ 58 प्रतिशत रह गया है। आने वाले दिनों में पानी का संकट खड़ा न हो, इसके लिए महानगरपालिका ने अभी से कई उपाय शुरू करने की तैयारी कर ली है।
सोमवार को महापौर नीता ठाकरे ने मनपा के जल प्रदाय विभाग और ऑरेंज सिटी वाटर के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें जलापूर्ति की व्यवस्था और जलाशयों में बचे पानी की स्थिति की समीक्षा हुई। महापौर ने शहर के लोगों से अपील की कि पानी की संभावित कमी को गंभीरता से लें और जो पानी उपलब्ध है, उसे सोच-समझकर खर्च करें। अधिकारियों को उन्होंने निर्देश दिया कि जल स्रोतों पर दबाव कम करने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए असरदार कदम उठाए जाएं।
बैठक में सबसे बड़ा प्रस्ताव पीने के पानी के दुरुपयोग पर जुर्माने का रखा गया। अगर कोई पीने के पानी से कार धोता, सड़क साफ करता, बगीचे में पानी डालता या निर्माण काम में उसका इस्तेमाल करता पाया गया, तो हर मामले में 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाने का सुझाव है। मकसद लोगों को पानी के सीमित भंडार के प्रति जागरूक करना और पेयजल का इस्तेमाल सिर्फ जरूरी कामों तक रखना है। यह जुर्माना अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। इसे लागू करने के लिए संबंधित नियमों, आदेशों और प्रक्रिया के हिसाब से आगे कार्रवाई होगी।
अवैध नल कनेक्शन से पानी लेने वालों के खिलाफ भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। त्योहारों का समय होने के बावजूद इस कार्रवाई में ढिलाई न बरतने का फैसला हुआ है। हालांकि कार्रवाई से पहले लोगों को अपने कनेक्शन नियमित कराने का मौका दिया जाएगा। इसके लिए मनपा के क्षेत्रीय कार्यालयों में तुरंत विशेष शिविर लगाने का प्रस्ताव है। शिविरों के बाद अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई तेज की जाएगी।
ऐसे कनेक्शनों पर पानी के मीटर लगाए जाएंगे, ताकि खपत का हिसाब रखा जा सके। अगर किसी ग्राहक के मीटर से छेड़छाड़ हुई या मीटर निकाला हुआ मिला, तो उसके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। मनपा का मानना है कि अवैध कनेक्शन और मीटर से छेड़छाड़ पर रोक लगने से खपत का ठीक अंदाजा मिलेगा और वितरण व्यवस्था बेहतर होगी।
जलाशयों पर निर्भरता घटाने के लिए शहर के सार्वजनिक कुओं को फिर से काम में लाने की योजना बन रही है। इन कुओं की सफाई होगी और सबसे पहले उनके पानी की जांच प्रयोगशाला में कराई जाएगी। पानी इस्तेमाल लायक पाया गया और जरूरी इंतजाम पूरे हो गए, तो महाराष्ट्र ऊर्जा विकास अभिकरण (MEDA) की मदद से इन कुओं पर सौर पंप लगाने का प्रस्ताव है। इससे छोटे स्तर की जलापूर्ति योजनाएं शुरू की जा सकेंगी।
मनपा भूजल के बेहतर इस्तेमाल और पुनर्भरण पर भी ध्यान देगी। भूजल सर्वेक्षण एवं विकास प्रणाली के मार्गदर्शन में सूख चुके सार्वजनिक कुओं की उपयोगिता बढ़ाने, जरूरत के हिसाब से उनमें बोर करने और बंद पड़े बोरवेल को फिर चालू करने के उपाय किए जाएंगे। साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग यानी वर्षा जल संचयन की ज्यादा से ज्यादा संरचनाएं बनाने की योजना है।
पाइपलाइनों से होने वाली पानी की बर्बादी पर भी बैठक में जोर दिया गया। महापौर ने अधिकारियों से कहा कि पाइपलाइन में लीकेज की जानकारी मिलते ही उसकी मरम्मत कर दी जाए। लोगों से पानी बचाने की अपील काफी नहीं है, वितरण व्यवस्था में होने वाला नुकसान रोकना भी जरूरी है।
बैठक में उपमहापौर लीला हाथीबेडे, स्थायी समिति सभापति शिवानी दाणी वखरे, सत्ता पक्ष नेता नरेंद्र (बाल्या) बोरकर, जल प्रदाय समिति सभापति दिव्या धुरडे, अतिरिक्त आयुक्त मुरुगार्नथम एम., अतिरिक्त आयुक्त मिलिंद मेश्राम, अधीक्षक अभियंता डॉ. श्वेता बनर्जी, कार्यकारी अभियंता श्रीकांत वायकर और ओसीडब्ल्यू के अधिकारी मौजूद थे।