बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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21:14 IST

नागपुर के पानी की जांच करेगी पांच सदस्यों की विशेषज्ञ समिति, हाई कोर्ट ने दिए दो सप्ताह

दूषित पानी की शिकायतों के बीच हाई कोर्ट ने नागपुर की जलापूर्ति व्यवस्था के निरीक्षण के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई है, जिसे दो सप्ताह में रिपोर्ट देनी है।

नागपुर के पानी की जांच करेगी पांच सदस्यों की विशेषज्ञ समिति, हाई कोर्ट ने दिए दो सप्ताह तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में नलों से आ रहे पानी की क्वालिटी और दूषित पानी की शिकायतों को देखते हुए हाई कोर्ट ने पांच सदस्यों की विशेषज्ञ समिति बना दी है। न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने शहर की जलापूर्ति व्यवस्था का निरीक्षण करने के लिए यह समिति नियुक्त की है।

समिति को शहर में पानी की सप्लाई, नल कनेक्शनों और दूसरे जरूरी पहलुओं की जांच करनी है। इसके बाद उसे दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी। अदालत ने इस काम के लिए दो सप्ताह की समयसीमा तय की है।

समिति में आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर साइंटिस्ट डॉ. पवन लाभशेटवार, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की पूर्व सहायक अभियंता डॉ. कल्पना भोडे, डॉ. कार्तिक बालसुंदरम, डॉ. अविनाश वासुदेव और अधिवक्ता रवि सन्याल शामिल हैं।

दूषित पानी की शिकायतों के बीच अदालत की तरफ से विशेषज्ञ समिति बनने के बाद जलापूर्ति की असल हालत परखने का रास्ता खुल गया है। समिति के निरीक्षण और उसकी रिपोर्ट के आधार पर पानी की क्वालिटी, वितरण व्यवस्था और शिकायतों से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर ज्यादा साफ तस्वीर मिलने की उम्मीद है।

जलापूर्ति व्यवस्था को परखते वक्त सिर्फ पानी की क्वालिटी ही नहीं, बल्कि उसका वितरण और उपभोक्ताओं तक पहुंचने की प्रक्रिया भी अहम होती है। जल शुद्धिकरण संयंत्र से निकलने वाला पानी, वितरण पाइपलाइन, नल कनेक्शन और उपभोक्ताओं के यहां पहुंचने वाला पानी, ये सब अलग-अलग स्तर पर जांच का विषय हो सकते हैं।

इस बीच ओसीडब्ल्यू कंपनी की दलील है कि आंकड़ों के बीच का अंतर समझे बिना पूरे शहर की जलापूर्ति को दूषित घोषित करना सही नहीं है। हालांकि इन दावों और शिकायतों की असल स्थिति का आकलन अब विशेषज्ञ समिति के निरीक्षण और उसकी रिपोर्ट के आधार पर किया जा सकेगा।

ओसीडब्ल्यू ने अदालत को बताया कि केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी संगठन (CPHEEO) के मानकों के मुताबिक 30 लाख की आबादी के लिए हर महीने 300 पानी के नमूनों की जांच करना जरूरी है।

कंपनी का दावा है कि इसके मुकाबले वह हर महीने करीब 1,500 से 1,700 नमूनों की जांच करती है। कंपनी के मुताबिक नमूनों की जांच की यह संख्या तय मानक से लगभग 5 गुना ज्यादा है।

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