शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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सनई चौघडे की पमा परब यानी मेघना एरंडे जोशी ने खोला दिवाली और पकवानों की यादों का पिटारा

सनई चौघडे की पमा परब यानी मेघना एरंडे जोशी ने खोला दिवाली और पकवानों की यादों का पिटारा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

झी मराठी के सीरियल सनई चौघडे में पमा परब बनी मेघना एरंडे जोशी ने शिवाजी पार्क के बचपन, भांजे निहार के कंदील और ससुराल की दिवाली की परंपरा के किस्से सुनाए।

दिवाली को अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। घर में पकवानों की खुशबू, रंगीन रंगोली, आकाशदीप, नए कपड़ों की खरीदारी और परिवार के साथ बिताए पल, दिवाली का नाम आते ही यही सब आंखों के सामने आ जाता है। झी मराठी के सीरियल 'सनई चौघडे' में पमा परब का किरदार निभा रहीं अभिनेत्री मेघना एरंडे जोशी के लिए भी दिवाली खुशी, परंपरा और परिवार के साथ वक्त बिताने का त्योहार है। उन्होंने इस त्योहार से जुड़ी कई यादें साझा कीं।

मेघना बताती हैं कि बचपन में उनकी दिवाली शिवाजी पार्क में मम्मी-पापा के साथ मनती थी। दिवाली की छुट्टियों में मिलने वाला होमवर्क, उसके लिए अलग से बनाई जाने वाली कॉपी और उसे सजाने की मस्ती उन्हें आज भी याद है। मम्मी पकवान बनाती थीं, बहन रंगोली निकालती थी और मेघना उसमें रंग भरने में हाथ बंटाती थीं। पापा उनके लिए थोड़े से पटाखे ले आया करते थे।

पटाखों को लेकर उनका नजरिया बचपन में ही बदल गया। एक डॉक्युमेंट्री के लिए उन्होंने पटाखों की फैक्ट्री देखी थी। वहां पटाखे बनाने वाले छोटे बच्चों की तकलीफ और केमिकल से उनकी सेहत पर पड़ने वाला असर देखकर उन्होंने पटाखे न जलाने का फैसला कर लिया। आज भी वे जहां तक हो सके पटाखों से दूर ही रहती हैं। बेटी इला को पटाखों का अनुभव मिले, इसके लिए पति विक्रम ने छोटी चकरी या अनार लाने की बात कही थी, लेकिन मेघना का जोर तेज आवाज वाले पटाखों से बचने पर रहता है।

दिवाली की उनकी यादों में भांजे निहार का भी खास हिस्सा है। निहार बहुत सुंदर कंदील बनाता है, इसलिए कई सालों से वही उनके लिए कंदील तैयार करके देता है। पुणे में रहने वाला निहार दोस्तों के साथ किला भी बनाया करता था। उसके बनाए कंदील और किले देखने का मजा मेघना ने लिया है, और कभी-कभी वे खुद भी उसकी मदद करती थीं। दिवाली पर सब साथ मिलकर कंदील और किले बनाते थे, यह याद आज भी उनके मन में ताजा है।

पकवानों की बात करें तो मेघना को चकली, मम्मी के हाथ का चिवड़ा, लड्डू, शकरपारे, सेव और अनरसे खूब पसंद हैं। उनके मुताबिक पकवान बनते समय पूरे घर में जो खुशबू फैलती है, वही बताती है कि दिवाली शुरू हो गई। उनके घर में पकवान बड़े पैमाने पर बनते हैं और रिश्तेदारों के बीच उनका लेन-देन भी होता है। दादर में दिवाली शुरू होने से पहले ही त्योहार का माहौल बन जाता था। बाजार की जगमगाहट, खरीदारी की भागदौड़, बड़े-बड़े कंदील और मैचिंग कपड़ों की शॉपिंग उन्हें पसंद थी। चप्पल से लेकर टिकली, चूड़ियां और झुमकों तक सब कुछ मैचिंग लेने का उत्साह रहता था।

करीब 28 से 29 साल मेघना ने दिवाली मम्मी-पापा के साथ मनाई। उसके बाद पिछले 16 साल से वे पति विक्रम के जोशी परिवार के साथ दिवाली मनाती हैं। उनकी सासू मां ने एक अच्छी परंपरा संभालकर रखी है। परिवार के हर रिश्तेदार के घर दिवाली का एक दिन मनाया जाता है। लक्ष्मीपूजन जोशी परिवार के घर होता है, बाकी दिन सारे रिश्तेदार एक-दूसरे के घर खाने पर जाते हैं। इससे सबकी मुलाकात हो जाती है और त्योहार की खुशी सबके साथ बंट जाती है।

मेघना को पहले की और अब की दिवाली में फर्क महसूस होता है। पहले सुबह मम्मी शहनाई लगाती थीं, उबटन से अभ्यंग स्नान होता था, पकवान खाए जाते थे और रिश्तेदारों के यहां जाने की जल्दी रहती थी। घर-घर में पारंपरिक तरीके से पकवान बनते थे और बिल्डिंग के कई घरों में एक जैसे कंदील या रोशनी दिखती थी। अब हर कोई अपनी पसंद और सहूलियत के हिसाब से दिवाली मनाता है। वे कहती हैं कि त्योहार का रूप भले बदल गया हो, उसकी खुशी आज भी वैसी ही है।

घर में मेघना की मम्मी और सासू मां, दोनों बहुत अच्छा खाना बनाती हैं, इसलिए ज्यादातर पकवान वही बनाती हैं। मेघना के जिम्मे चखकर स्वाद देखने और क्वालिटी जांचने का काम रहता है। पिछली दिवाली में उन्हें समझ आया कि वे अच्छी गुझिया बना सकती हैं, इसलिए इस बार पकवान बनाने में थोड़ी और मदद होने की संभावना है।

'सनई चौघडे' में पमा परब का नाता पकवानों के कारोबार से है, इसलिए सीरियल में उसके घर चकली, चिवड़ा और लड्डू बनाने की भागदौड़ चलती रहती है। पमा की शादी तय हुई थी, तब भी खाना और पकवान उसी ने बनाया था। सीरियल में मेघना ने चकली तलने का अनुभव भी लिया। बड़े बर्तन में खौलता तेल देखकर शुरू में उन्हें डर लगा था, लेकिन डायरेक्टर राजू सर ने हिम्मत दी तो उन्होंने वह शॉट पूरा किया। सेट पर सीरियल के लिए 10 से 12 किलो चिवड़ा भी बनाया गया था। मेघना कहती हैं कि पमा के रोल की वजह से उन्हें पकवान बनाने का तजुर्बा मिल रहा है।

मेघना को दिवाली घरवालों के साथ, अच्छे से सज-धजकर और इत्मीनान से मनाना पसंद है। उनके हिसाब से यह ऐसा त्योहार है जो पांचों इंद्रियों को सुख देता है। पकवानों की खुशबू, रंगोली को छूने का मजा, दिवाली के गानों की आवाज, आंखों को भाने वाली रोशनी और त्योहार के माहौल का उत्साह, इन सबसे दिवाली का अनुभव खास बनता है। इससे पहले वे कई शहरों में अलग-अलग कलाकारों के साथ दिवाली की सुबह के कार्यक्रम भी होस्ट कर चुकी हैं।

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