शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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कंक्रीट के जंगल में प्रकृति का संतुलन कैसे बचे? 31 अक्टूबर को मनता है विश्व शहर दिवस

कंक्रीट के जंगल में प्रकृति का संतुलन कैसे बचे? 31 अक्टूबर को मनता है विश्व शहर दिवस तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

विश्व शहर दिवस हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस बार की थीम शहरों के पुनर्जीवन और सबके लिए पर्याप्त आवास पर है।

आज की दुनिया में शहरीकरण को विकास की रीढ़ माना जाता है। उद्योग बढ़ रहे हैं, रोजगार के मौके मिल रहे हैं और नई तकनीक आ रही है, इसलिए दुनिया की ज्यादातर आबादी शहरों की तरफ खिंच रही है। लेकिन इस तेज रफ्तार शहरीकरण के साथ प्रदूषण, गंदगी, ट्रैफिक जाम, झोपड़पट्टियों का बढ़ना और असमानता जैसी गंभीर समस्याएं भी खड़ी हो रही हैं।

इसी वजह से हर साल 31 अक्टूबर को दुनिया भर में 'विश्व शहर दिवस' (World Cities Day) मनाया जाता है। मकसद यह है कि शहरों का विकास सिर्फ कंक्रीट का जंगल खड़ा करने तक सीमित न रहे, बल्कि वह टिकाऊ (Sustainable), हरा-भरा और लोगों की जिंदगी बेहतर करने वाला हो। यह दिन सभी देशों को एक साझा मंच देता है, ताकि वे शहरी चुनौतियों से मिलकर निपट सकें और आने वाले दौर के समृद्ध शहरों की योजना बना सकें। संयुक्त राष्ट्र मानव बस्ती कार्यक्रम (UN-Habitat) और दुनिया भर की स्थानीय संस्थाएं इस दिन अलग-अलग जागरूकता कार्यक्रम करती हैं।

शहरीकरण की रफ्तार से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग जरूरी हो गया था। इसी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 27 दिसंबर 2013 को एक खास प्रस्ताव पास किया और तय किया कि हर साल 31 अक्टूबर को विश्व शहर दिवस मनाया जाएगा। इसकी असल शुरुआत 2014 में हुई और पहला आधिकारिक आयोजन चीन के शहर शंघाई में हुआ।

संयुक्त राष्ट्र का मुख्य मकसद दुनिया भर में टिकाऊ शहरी विकास (Sustainable Urban Development) को रफ्तार देना है। इस वैश्विक मुहिम का बुनियादी विचार 'सबके लिए अच्छा शहर, सबके लिए अच्छी जिंदगी' (Better City, Better Life) है। इसका जोर इस पर है कि शहर में रहने वाले हर नागरिक की जिंदगी ज्यादा आसान और सुरक्षित बने।

इस साल की मुख्य थीम है "Regenerating the City: Adequate Housing for All", यानी शहरों का पुनर्जीवन: सबके लिए पर्याप्त और सुरक्षित आवास। संयुक्त राष्ट्र हर साल इस दिन किसी एक अहम विषय पर ध्यान केंद्रित करता है। आज दुनिया के करोड़ों लोग शहरों में रहते हुए भी ठीक घर, साफ पीने के पानी और बुनियादी नागरिक सुविधाओं से दूर हैं। ऐसे में पुराने और गंदे शहरी इलाकों का पुनर्जीवन, किफायती और सुरक्षित घर मुहैया कराना और शहरों के संसाधनों का न्यायपूर्ण बंटवारा वक्त की जरूरत बन गया है। यह थीम सिर्फ नई इमारतें बनाने की बात नहीं करती, बल्कि प्राकृतिक पर्यावरण का संतुलन रखते हुए आधुनिक शहरों को नए सिरे से गढ़ने पर जोर देती है।

आज शहर सिर्फ रहने की जगह नहीं रहे। वे आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के बड़े केंद्र बन चुके हैं और देश की GDP में सबसे बड़ा हिस्सा शहरों का होता है। फिर भी उनके सामने कई चुनौतियां हैं। बढ़ती गाड़ियों, कारखानों और कचरे से शहरों की हवा और पानी की क्वालिटी बिगड़ रही है। नियोजित बुनियादी ढांचे की कमी के कारण रोज करोड़ों नागरिकों को ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता है। एक तरफ ऊंची-ऊंची इमारतें हैं और दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं से महरूम झोपड़पट्टियां, यह फर्क शहरों में साफ दिखता है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए 'स्मार्ट सिटी' और 'ग्रीन सिटी' की अवधारणाएं लागू की जा रही हैं। सौर ऊर्जा का इस्तेमाल, ई-वाहनों को बढ़ावा, कचरा प्रबंधन और डिजिटल तकनीक के जरिए शहरों को ज्यादा टिकाऊ बनाया जा रहा है।

यह दिन सिर्फ सरकार या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का नहीं है, इसमें हर नागरिक की हिस्सेदारी अहम है। शहर को साफ, हरा-भरा और सुंदर रखना सिर्फ महानगरपालिका की जिम्मेदारी नहीं, हर किसी का नागरिक फर्ज है। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल, पानी का दोबारा उपयोग, प्लास्टिक से परहेज और पेड़ लगाने जैसे छोटे कदमों से शहर की सूरत बदल सकती है। सरकार, नागरिक और निजी संस्थाएं मिलकर काम करें, तभी आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित, सबको साथ लेकर चलने वाले और प्रदूषण से मुक्त शहर बन सकेंगे। विश्व शहर दिवस पर यही मुख्य संदेश दिया जाता है।

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