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08:21 IST

कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे लाइन किनारे 3700 से ज्यादा झोपड़ियां हटेंगी, हाईकोर्ट ने दी मंजूरी

मुंबई हाईकोर्ट ने मध्य रेलवे को कुर्ला-ट्रॉम्बे लाइन के पास के अतिक्रमण हटाने की इजाजत दे दी है। निवासियों को 30 दिन की नई नोटिस दी गई है।

कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे लाइन किनारे 3700 से ज्यादा झोपड़ियां हटेंगी, हाईकोर्ट ने दी मंजूरी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई हाईकोर्ट ने मध्य रेलवे प्रशासन को कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे लाइन के किनारे बने अतिक्रमण हटाने की मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने 3700 से ज्यादा अनधिकृत झोपड़ियां और अतिक्रमण हटाने की इजाजत रेलवे को दी है। मुंबई के यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे के तय विस्तार और बढ़ते खतरों को देखते हुए यह फैसला आया है। रेलवे प्रशासन ने इसी हफ्ते संबंधित निवासियों को निष्कासन की नई नोटिस थमाने की तैयारी शुरू कर दी है।

कार्रवाई की वजह क्या है, इसे समझ लें। कुर्ला-ट्रॉम्बे लाइन का इस्तेमाल मुख्य रूप से मालगाड़ियों के लिए होता है। इस रूट से पेट्रोलियम पदार्थों के टैंकर और ज्वलनशील केमिकल ले जाए जाते हैं। रेलवे पटरी और हाई वोल्टेज बिजली के तारों के पास बनी इन झोपड़ियों की वजह से बड़े हादसे की आशंका जताई जा रही थी। कुछ दिन पहले ही कुर्ला के कुरेशी नगर इलाके में एक भारी क्रेन झोपड़ियों पर गिर गई थी, जिसके बाद सुरक्षा का सवाल सामने आ गया था।

इसके अलावा छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से कुर्ला के बीच पांचवीं और छठी रेलवे लाइन बिछाने के लिए रेलवे की करीब 9000 वर्ग मीटर जमीन की सख्त जरूरत है।

कुर्ला पूर्व के कुछ निवासियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने वह याचिका खारिज करते हुए रेलवे प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। सुनवाई के मुताबिक झोपड़ीधारकों को घर खाली करने के लिए 30 दिन की नई नोटिस दी गई है। इस मियाद में जगह खाली नहीं हुई तो पुलिस इंतज़ाम के साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी, यह साफ कर दिया गया है।

कोर्ट ने इंसानी नजरिए से सोचते हुए प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए कुछ अहम शर्तें भी रखी हैं।

पहली बात आर्थिक मदद की है। हर प्रभावित परिवार को अगले छह महीने तक हर महीने 2,000 रुपये का अनुग्रह (अंतरिम) अनुदान दिया जाएगा। इसका खर्च रेलवे और राज्य सरकार मिलकर उठा सकते हैं।

दूसरी बात पहचान की है। कार्रवाई से पहले मुंबई उपनगर के जिलाधिकारी के जरिए इलाके के सभी झोपड़ीधारकों और उनके परिवारों के कागजात और ब्योरा दर्ज किया जाएगा।

तीसरी बात वैकल्पिक घर की है। पात्र झोपड़ीधारकों को प्रधानमंत्री आवास योजना या दूसरी सरकारी योजनाओं से घर देने के विकल्पों पर जिलाधिकारी और झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) को छह महीने के भीतर विचार करना होगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि विस्थापित लोग उसी जगह पर पक्के घर का हक नहीं मांग सकेंगे।

स्थानीय नागरिकों और निवासी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से यह कार्रवाई बेहद जरूरी है। रेलवे की इस सख्त कार्रवाई से पूर्वी उपनगरों में रेलवे और औद्योगिक विकास का रास्ता खुलेगा।

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