चिनाब पुल से कश्मीर का सेब और चेरी रेल से मुंबई पहुंचे, ढुलाई का खर्च घटा
चिनाब और अंजी केबल पुल चालू होने के बाद बडगाम-कटरा-दिल्ली-मुंबई रेल कॉरिडोर से कश्मीर का फल कम खर्च में और जल्दी मुंबई आ रहा है।
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सड़क पर रुकावटें और मौसम की मनमानी, इन दोनों की वजह से कश्मीर के बागान वाले हमेशा परेशानी में रहते थे। अब दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल, चिनाब पुल, ने कश्मीर को देश के बाजार से सीधे जोड़ दिया है। इसका नतीजा यह है कि सेब और चेरी जैसा जल्दी खराब होने वाला माल तेजी से और कम खर्च में मुंबई तक पहुंचने लगा है। किसान और ग्राहक, दोनों को इसका फायदा मिल रहा है।
पहले श्रीनगर से मुंबई तक ट्रक से माल लाना हो तो 45 घंटे से ज्यादा लग जाते थे। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर लैंडस्लाइड, बारिश की वजह से रास्ता बंद होना और ट्रैफिक जाम आम बात थी। इस वजह से माल सड़ने का हिस्सा बड़ा रहता था, और व्यापारी इसी बहाने किसानों से कम दाम पर माल उठाते थे। चिनाब और अंजी केबल पुल चालू होने के बाद हालात बदल गए हैं।
अब बडगाम-कटरा-दिल्ली-मुंबई का पूरा रेल कॉरिडोर शुरू हो चुका है और मालगाड़ियां 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं। इसी वजह से कश्मीर का मशहूर अखरोट, केसर, कालीन और शॉल जैसा सामान भी सीधे महाराष्ट्र के बाजार में मिलने लगा है।
इस नए रास्ते से दो बड़े फायदे हुए हैं। पहला, सड़क से ढुलाई का खर्च प्रति बोरी 80-90 रुपये था, जो रेल से घटकर 10-15 रुपये प्रति बोरी रह गया है, यानी करीब 60 प्रतिशत की बचत। दूसरा, माल खराब होने का प्रमाण आधा रह गया है। कश्मीर के बागवान मोहम्मद अली शेख के मुताबिक, वक्त पर और सुरक्षित ढुलाई होने से अब बागवानों को बाजार में अच्छा दाम मिलने लगा है।
रेलवे अधिकारियों की जानकारी के मुताबिक, इस साल 3 जून को कटरा से चेरी की पहली 24 टन की पार्सल वैन रवाना हुई और सिर्फ 30 घंटे में बांद्रा टर्मिनस पहुंच गई। इसके बाद 13 सितंबर 2025 से बडगाम से दिल्ली के आदर्श नगर तक खास पार्सल सेवा शुरू की गई। 15 सितंबर 2025 के बाद अब तक 20 हजार टन से ज्यादा सेब रेल से देशभर में भेजा जा चुका है, और इसका बड़ा हिस्सा मुंबई के बाजार में आया है।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने बताया कि चिनाब रेल पुल की वजह से कश्मीरी फलों को महाराष्ट्र का बाजार दिलाने का मौका बना है। नियमित मालगाड़ियां, पार्सल की गुंजाइश और स्टेशन से थोक बाजार तक की ढुलाई का इंतजाम होने से कारोबार बढ़ा है, और किसान व व्यापारी दोनों संतुष्ट हैं।