मंगलवार, 3 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

खोपोली में लाखों की लागत से बना कचरा प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट बंद, मशीनें धूल खा रही हैं

खोपोली में लाखों की लागत से बना कचरा प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट बंद, मशीनें धूल खा रही हैं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

खोपोली नगरपरिषद ने पुरानी सब्जी मार्केट के पास कचरा प्रोसेसिंग सिस्टम खड़ा किया था, पर वह बंद पड़ा है। नागरिक खर्च, खरीद और जिम्मेदारी का हिसाब मांग रहे हैं।

खोपोली शहर के कचरे की समस्या सुलझाने के लिए नगरपरिषद ने बड़ा खर्च करके जो कचरा प्रोसेसिंग सिस्टम खड़ा किया था, वह फिलहाल बंद पड़ा है। शहर की पुरानी सब्जी मार्केट के इलाके में बने इस प्रोजेक्ट के लिए लाखों रुपये की मशीनें खरीदी गई थीं। लेकिन इन मशीनों का असल में इस्तेमाल ही नहीं हो रहा, इसलिए पूरा प्रोजेक्ट धूल खा रहा है।

इसी वजह से शहर में सवाल उठ रहा है कि कचरा प्रबंधन पर खर्च किए गए सार्वजनिक पैसे का आखिर हुआ क्या।

यह सिस्टम इसलिए लगाया गया था कि शहर के कचरे को ठीक से अलग-अलग किया जाए, उस पर प्रोसेसिंग हो और कचरे की समस्या कम हो। पर प्रोजेक्ट की जगह पर मशीनें बंद हालत में खड़ी हैं और आसपास धूल और गंदगी दिखाई देती है। नागरिक पूछ रहे हैं कि कचरे पर प्रक्रिया करने के लिए खरीदी गई मशीनें ही बेकार पड़ी रहेंगी, तो इस प्रोजेक्ट का असली मकसद पूरा कैसे होगा।

खर्च हुआ, फिर भी प्रोजेक्ट चालू क्यों नहीं, यह बड़ा सवाल है। नगरपरिषद ने इस पर आखिर कितना पैसा खर्च किया? मशीनें किस कंपनी से खरीदी गईं? क्या खरीद की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई? सिस्टम की क्षमता कितनी है और वह असल में कितने दिन चलाया गया? ये सारे सवाल अब सामने आ रहे हैं। सिस्टम बंद होने की सही वजह क्या है, कोई तकनीकी दिक्कत है या देखभाल और मरम्मत न होने से प्रोजेक्ट ठप है, यह जानकारी भी प्रशासन को नागरिकों के सामने रखनी चाहिए।

एक तरफ शहर में कचरा जमा करने और उसके निपटारे का सवाल जस का तस बना हुआ है। दूसरी तरफ कचरे पर प्रक्रिया के लिए खरीदी गई लाखों रुपये की मशीनें बिना इस्तेमाल के पड़ी हैं। इसलिए सार्वजनिक पैसे से खड़े किए गए इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी तय करने की मांग जोर पकड़ रही है।

नागरिकों की मुख्य मांगें ये हैं। पहली, नगरपरिषद इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्च, टेंडर प्रक्रिया, मशीनों की खरीद, देखभाल और मरम्मत तथा मौजूदा हालत की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे। दूसरी, बंद पड़े सिस्टम को तुरंत चालू करके कचरा प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का असल में इस्तेमाल किया जाए। तीसरी, सिर्फ मशीनें खरीद लेने से कचरे का सवाल हल नहीं होगा, उन मशीनों का नियमित इस्तेमाल होना भी उतना ही जरूरी है।

नागरिकों का कहना है कि ऐसा न हुआ तो लाखों रुपये खर्च करके खड़ा किया गया यह प्रोजेक्ट सिर्फ दिखावे की चीज बनकर रह जाए, इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

#नागपुर#शहर#PT24#Civic#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे