वर्धा के 11 जलाशयों में सिर्फ 67 फीसदी पानी, गर्मी से पहले संकट का डर
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कम बारिश की वजह से वर्धा जिले के 11 बड़े और मध्यम जलाशयों में उपयोगी जल भंडार सिर्फ 67 प्रतिशत है, जबकि पिछले साल ये सभी 100 प्रतिशत भरे थे।
इस साल बारिश के मौसम में वर्धा जिले में उम्मीद से कम पानी गिरा। इसका सीधा असर जलाशयों में जमा पानी पर पड़ा है। जिले के 11 बड़े और मध्यम जलाशयों में अभी सिर्फ 67 प्रतिशत उपयोगी जल भंडार है। पिछले साल अक्टूबर के आखिर तक ये सभी जलाशय 100 प्रतिशत भरे हुए थे, इसलिए इस बार हालात चिंता वाले बन गए हैं। लोगों को डर है कि गर्मी शुरू होने से पहले ही जिले को जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।
वर्धा जिले में कुल 11 जल परियोजनाएं हैं। ये हैं बोर, निम्न वर्धा, धाम, पोथरा, पंचधारा, डोंगरगाव, मदन, मदन उन्नई, लाल नाला, वर्धा कार नदी और सुकली लघु। इन जलाशयों का पानी खेती, पीने के पानी की जरूरत और जंगली जानवरों के पीने के पानी के लिए अहम है। लेकिन इस बार बारिश ने उम्मीद के मुताबिक साथ नहीं दिया, इसलिए कई परियोजनाओं में पूरा पानी जमा नहीं हो पाया।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बोर परियोजना में 64.44 प्रतिशत, निम्न वर्धा में 70.21 प्रतिशत, धाम में 68.07 प्रतिशत और पोथरा में 80.31 प्रतिशत उपयोगी जल भंडार बचा है। पंचधारा परियोजना में 36.80 प्रतिशत, डोंगरगाव में 57.55 प्रतिशत, मदन में 20.70 प्रतिशत और मदन उन्नई बांध में 17.93 प्रतिशत पानी है। लाल नाला परियोजना में 78.54 प्रतिशत, वर्धा कार नदी परियोजना में 60.58 प्रतिशत और सुकली लघु परियोजना में 54.92 प्रतिशत उपयोगी जल भंडार बचा है।
महाकाली का धाम परियोजना इनमें खास अहमियत रखता है। इसी परियोजना से वर्धा शहर, पिपरी मेघे और आसपास के 14 गांवों को पीने का पानी दिया जाता है। यहां भी जितना पानी होना चाहिए उतना नहीं है, इसलिए आने वाले दिनों की जलापूर्ति को लेकर फिक्र जताई जा रही है। पिछले साल सभी ग्यारह जलाशयों में अक्टूबर के आखिर तक 100 प्रतिशत उपयोगी जल भंडार था। इस साल की हालत से तुलना करें तो आंकड़ों से साफ दिखता है कि बारिश की कमी का कितना असर हुआ है।
जलाशयों में पानी कम होने की वजह से प्रशासन के साथ आम नागरिकों को भी अभी से पानी के इस्तेमाल की योजना बनानी होगी। पानी की बर्बादी रोकना, जितना पानी है उसे सोच-समझकर खर्च करना और जल संरक्षण के उपायों को पहले रखना जरूरी बताया गया है। ऐसा न हुआ तो गर्मी में पानी की किल्लत का संकट और गहरा हो सकता है, इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।