गुंठेवारी के आखिरी दिन महापालिका में उमड़ी भीड़, खजाने में आए 108 करोड़ 63 लाख रुपये
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छत्रपति संभाजीनगर महापालिका में गुंठेवारी नियमितीकरण की मियाद खत्म होने के दिन लोगों की लंबी कतारें लगीं। शाम तक 12 हजार 200 फाइलें आईं।
छत्रपति संभाजीनगर में गुंठेवारी नियमितीकरण की आखिरी तारीख के दिन महापालिका में लोगों की जबरदस्त भीड़ रही। अपने प्लॉट और मकान नियमित कराने के लिए लोग दिनभर आवेदन और कागजात लेकर दौड़ते रहे। शाम तक इस योजना से महापालिका के खजाने में 108 करोड़ 63 लाख रुपये का राजस्व जमा हो चुका था।
आखिरी दिन ही लोगों ने करोड़ों रुपये भरे हैं, इसलिए राजस्व का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। रात 12 बजे तक आवेदन और फाइलें लेने का काम चालू रखा गया। हालांकि योजना की मियाद बढ़ाने को लेकर प्रशासन ने अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
गुंठेवारी नियमितीकरण की मुहिम 15 जुलाई से शुरू हुई थी और इसके लिए 31 अक्टूबर की आखिरी तारीख तय की गई थी। मियाद का आखिरी दिन शनिवार को पड़ा, इसलिए महापालिका के नगर नियोजन विभाग में आवेदकों की भारी भीड़ जमा हो गई। शाम तक महापालिका के पास 12 हजार 200 फाइलें पहुंच चुकी थीं।
फीस भरने के लिए कई जगह इंतजाम था। दिनभर में निरालाबाजार के बैंक में लोगों ने करीब तीन करोड़ रुपये का चालान भरा। महापालिका के कैश काउंटर पर एक करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा हुई। इसके अलावा शहर में 12 और जगहों पर भी शुल्क भरने की सुविधा रखी गई थी। नगर नियोजन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब तक जमा हुआ राजस्व 108 करोड़ 63 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
इस योजना की पृष्ठभूमि यह है कि शहर की हद से सटे इलाकों में पिछले कुछ सालों में बड़ी तादाद में नई बस्तियां बस गईं। जिन इलाकों की विकास योजना मंजूर नहीं थी, वहां कई जमीन मालिकों ने गैरकानूनी प्लॉटिंग करके भूखंड बेच दिए। लोगों ने इन भूखंडों पर घर बनाए और वहीं रहने लगे। ऐसे लोगों को राहत देने के लिए गुंठेवारी योजना में दिसंबर 2020 से पहले खरीदे गए प्लॉट और उन पर बने निर्माण को नियमित कराने का मौका दिया गया।
योजना में लगने वाली बड़ी दंड राशि माफ करने का फैसला महापौर समीर राजूरकर ने लिया। इससे लोगों को आर्थिक राहत मिली। इसी वजह से योजना को अच्छा रिस्पॉन्स मिला और महापालिका के राजस्व में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है।
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