खर्च में 20 फीसदी कटौती के निर्देश, लाडकी बहीण, शिक्षा और स्वास्थ्य इससे बाहर
सूखे के संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी खर्च पर लगाम कसने की तैयारी शुरू की है।
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महाराष्ट्र में सूखे का संकट है और दुनिया की आर्थिक हालत को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने सरकारी खर्च पर नियंत्रण करने की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी विभागों को खर्च में 20 प्रतिशत कटौती करने के निर्देश दिए हैं।
इस फैसले से मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना, शिक्षा, स्वास्थ्य और कर्जमाफी जैसी अहम चीजों को बाहर रखा गया है। यानी खर्च में किफायत बरतते हुए आम नागरिकों से जुड़ी योजनाओं का पैसा बना रहेगा। सरकार का जोर इसी बात पर दिख रहा है।
राज्य के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। इसलिए पानी की सप्लाई, जल संधारण और चारे की उपलब्धता जैसे सवाल अहम हो गए हैं। ऐसे में सरकारी खजाने पर बोझ काबू में रखने के लिए सरकार ने अलग-अलग विभागों के खर्च की समीक्षा करने का रुख अपनाया है।
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री फडणवीस ने विभागों से कहा है कि वे सोच-समझकर खर्च करें। इसके तहत हर विभाग से उम्मीद है कि वह अपने खर्च की योजना बनाते वक्त 20 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य ध्यान में रखे। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और राज्य की सूखे की चुनौतियों को देखते हुए सरकार का जोर मौजूद फंड के सही इस्तेमाल पर है।
लाडकी बहीण योजना को इस फैसले से बाहर रखे जाने की जानकारी है। बताया गया है कि इस योजना के लिए जरूरी फंड में कटौती नहीं की जाएगी। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद दी जाती है। खर्च कटौती से लाभार्थी महिलाओं की मदद पर असर पड़ेगा या नहीं, इस पर चर्चा चल रही थी। ऐसे में योजना का फंड बनाए रखने के रुख की अहमियत बढ़ गई है। हालांकि असल फंड बंटवारे, किस्तों के वितरण और आने वाले बजट के प्रावधानों पर अंतिम तस्वीर आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही साफ होगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को भी खर्च कटौती से बाहर रखा गया है। बताया जा रहा है कि इन क्षेत्रों के जरूरी खर्च के लिए फंड उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा की जरूरी सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और नागरिकों से जुड़ी अहम योजनाओं पर कटौती का असर न पड़े, इसलिए सरकार ने इन्हें प्राथमिकता दी है। इसके अलावा कर्जमाफी के लिए जरूरी फंड में भी कटौती नहीं होगी, ऐसी जानकारी है।
सड़क और सिंचाई प्रोजेक्ट को लेकर सरकार ने जरूरत के हिसाब से ही खर्च करने पर जोर दिया है। बताया गया है कि प्रोजेक्ट में गैरजरूरी खर्च टालकर उपलब्ध फंड का असरदार इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे खर्च की प्राथमिकता तय करते समय जरूरी कामों और सूखे के हालात में काम आने वाले प्रोजेक्ट को अहमियत मिलने की संभावना है।
सूखे से निपटने के लिए पानी की सप्लाई, जल संधारण और चारा योजनाओं जैसे उपायों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। गांवों में पानी की किल्लत कम करना और जानवरों के लिए चारा पक्का करना इस दौर की अहम चुनौतियां हैं।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र सरकार की खर्च कटौती की नीति में सरकारी खर्च पर नियंत्रण के साथ अहम योजनाओं के लिए फंड बनाए रखने की कोशिश दिखती है। सभी विभागों के लिए 20 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य है, फिर भी लाडकी बहीण योजना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कर्जमाफी और सूखा राहत के कामों में यह किस रूप में लागू होता है, इस पर अब सबकी नजर है।