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पुसद के घानोरा में जलतारा के शोषखड्डों से कुएं का पानी बढ़ा, किसानों को सीख

पुसद तालुका के घानोरा (सिंगारवाडी) गांव में जलतारा प्रोजेक्ट के मार्गदर्शक तत्वों के मुताबिक बने शोषखड्डों से कुएं के पानी की सतह बढ़ी है।

पुसद के घानोरा में जलतारा के शोषखड्डों से कुएं का पानी बढ़ा, किसानों को सीख तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुसद तालुका के घानोरा (सिंगारवाडी) गांव में जलतारा परियोजना का एक प्रयोग चर्चा में है। यह वही तालुका है, जो हरितक्रांति के प्रणेता वसंतराव नाईक और जलक्रांति के जनक सुधाकर नाईक का इलाका माना जाता है। गांव के प्रयोगशील किसान, सामाजिक कार्यकर्ता और यवतमाल के पूर्व जिला परिषद सदस्य ने अपने खेत में यह प्रयोग किया है।

उन्होंने अपने खेत सर्वे नं. 247 में 20 फूट व्यास और 50 फूट गहरा कुआं खोदा है। कुएं में पानी का स्तर बढ़ाने के लिए कर्तव्यनिष्ठ उपविभागीय अधिकारी श्री बिजवल साहब के मार्गदर्शन के मुताबिक काम किया गया। कुएं के ऊपर की तरफ ढलान पर जलतारा परियोजना के दिशानिर्देशों के हिसाब से 5 फूट लंबा, 5 फूट चौड़ा और 6 फूट गहरा सोख्ता गड्ढा बनाया गया। इस गड्ढे को आधा पत्थर-रोड़ों से भरा गया और बाकी हिस्सा मिट्टी से भर दिया गया।

बताया गया है कि बहुत कम वक्त में यह काम हो गया। पिछले साल कई कर्मचारियों के साथ बैठक भी ली गई थी। उस बैठक में पानी का स्तर बढ़ाने और दूध उत्पादन बढ़ाने पर जोर देते हुए किसानों को मार्गदर्शन किया गया। इसका असर यह हुआ कि इस साल पानी की किल्लत के दिनों में भी आसपास के किसानों की मोटरें तीन घंटे में कुआं खाली कर देती हैं, जबकि इस प्रयोग वाले खेत में हालत अलग है।

पास के किसान बाबुलाल रामू चव्हाण के कुएं में पानी 15 से 20 फूट गहरा है, फिर भी 3 से 4 घंटे में कुआं पूरी तरह खाली हो जाता है। दूसरी तरफ जलतारा प्रयोग के सही जगह पर सिर्फ 3 सोख्ता गड्ढे बनाने से रामराव हुपसिंग चव्हाण की 5 की मोटर दिनभर चलने के बाद भी पानी सिर्फ 2 से 3 फूट नीचे जाता है। दोनों किसानों के कुओं के पानी का स्तर दिखाने वाली तस्वीर भी साथ दी गई है।

रामराव चव्हाण का कहना है कि भूगर्भ के पानी का स्तर बढ़ा है। किसान इस मिसाल को सामने रखकर हर खेत में बड़े पैमाने पर ऐसे सोख्ता गड्ढे बनाएं, तो पानी की किल्लत से निपटने में फायदा हो सकता है। उन्होंने अपने सीधे प्रयोग और अनुभव के आधार पर सबसे जाहिर विनती की है कि सभी ग्राम पंचायतें और सरकारी तंत्र इस काम पर खास जोर दें, तो सूखे जैसे हालात पर काबू पाया जा सकता है।

रामराव चव्हाण के मुताबिक रोजगार गारंटी योजना में भी उत्पादक कामों पर जोर देने के दिशानिर्देश हैं। जरूरत इस बात की है कि उन पर सख्ती से अमल किया जाए। नए प्रयोग समझने की उत्सुकता में वे किसानों के साथ वसंतराव नाईक किचन गार्डन, नागपुर का अध्ययन दौरा भी ले जा चुके हैं।

नागपुर के ज्ञान प्रकाश के श्रीपत राठोड ने भी अपनी इच्छा जताई है। उनका कहना है कि रामराव हुपसिंग चव्हाण के इस प्रयोग को अभियान का रूप देने के लिए सरकारी स्तर पर मुहिम हाथ में ली जानी चाहिए।

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