शेवगांव में हजारों पेड़ कटे, विधायक सत्यजित तांबे ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
अहिल्यानगर जिले के शेवगांव और संगमनेर तालुका में गैरकानूनी पेड़ कटाई पर विधायक सत्यजित तांबे विधान परिषद में आवाज उठाएंगे।
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अहिल्यानगर जिले के शेवगांव और संगमनेर तालुका में बड़े पैमाने पर हुई गैरकानूनी पेड़ कटाई के खिलाफ विधायक सत्यजित तांबे आक्रामक हो गए हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वे इस मामले को राज्य की विधान परिषद में उठाएंगे।
तांबे मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग के मंत्री से सीधे मिलकर मांग करेंगे कि पूरे मामले की फौरन उच्चस्तरीय जांच हो। उनका कहना है कि जिन्होंने प्रकृति की बलि चढ़ाई है, उन दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एक तरफ राज्य में पर्यावरण बचाने और करोड़ों के वृक्षारोपण अभियानों की घोषणाएं हो रही हैं। दूसरी तरफ सरकारी तंत्र की शह पर हरे-भरे इलाके उजाड़े जा रहे हैं। यह चौंकाने वाली सच्चाई अब सामने आई है।
शेवगांव तालुका में हजारों पुराने और घने पेड़ बेहिसाब काट दिए गए। यह मामला उजागर होने के बाद पूरे अहिल्यानगर जिले में खलबली मच गई है। प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं।
शेवगांव के बाद संगमनेर तालुका के निमोण गांव में भी इसी तरह गैरकानूनी पेड़ कटाई का मामला खुला है। इससे साफ दिखता है कि जिले में पेड़ काटने वाले माफिया का जाल फैला हुआ है और प्रशासन ने इस तरफ पूरी तरह आंखें मूंद रखी थीं।
इतने बड़े पैमाने पर हजारों पेड़ों की कटाई वन विभाग की सीधी या परोक्ष मिलीभगत के बिना मुमकिन नहीं है, ऐसा गंभीर शक जताया जा रहा है। इस मामले में प्रशासन का दोहरा रवैया खुलकर सामने आ गया है।
नए पेड़ लगाने के मामले में भी रुकावट है। जो लोग प्रकृति का नुकसान भरने के लिए या मनरेगा योजना के तहत नए पेड़ लगाना चाहते हैं, उन्हें वन विभाग से वक्त पर अनापत्ति प्रमाणपत्र और मंजूरी नहीं मिलती।
यानी एक तरफ नए पेड़ लगाने में लगातार अड़चनें डाली जा रही हैं और दूसरी तरफ बरसों से संभालकर रखे गए पुराने, घने पेड़ खुलेआम काटे जा रहे हैं।
तांबे का कहना है कि वन विभाग के आशीर्वाद और अनदेखी की वजह से ही प्रकृति की यह तबाही चल रही है। संबंधित अधिकारियों को सिर्फ एसी दफ्तर में बैठे रहने के बजाय मौके पर उतरकर जांच करनी चाहिए।
उनके मुताबिक नए पेड़ों की मंजूरी नहीं दी जाती और खड़े पेड़ काटने वालों को खुली छूट मिल जाती है। प्रशासन की इस मनमानी से लोगों में भारी गुस्सा है। तांबे ने कहा है कि जब तक इस पूरे मामले की पोल नहीं खुलती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, वे चुप नहीं बैठेंगे।
प्रशासन की इस लापरवाही और भ्रष्ट कामकाज के खिलाफ तांबे ने तीखा संघर्ष छेड़ने का रुख अपनाया है। आने वाले विधान परिषद अधिवेशन में वे शेवगांव और संगमनेर की गैरकानूनी पेड़ कटाई का मुद्दा जोर से उठाकर सरकार को घेरेंगे।
उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो। पेड़ काटने वाले माफिया के साथ-साथ उन्हें बचाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त दंडात्मक और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
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