शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
22:34 IST

निदाल हसन को 3 दिसंबर को फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सज़ा, हेगसेथ बोले सीधा प्रसारण होगा

फोर्ट हूड में 2009 में 13 लोगों की हत्या के मामले में सज़ा पाए पूर्व सैन्य अधिकारी निदाल हसन की सज़ा पर अमल 3 दिसंबर को होगा।

निदाल हसन को 3 दिसंबर को फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सज़ा, हेगसेथ बोले सीधा प्रसारण होगा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

अमेरिका में एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सामने आया है। 2009 में टेक्सास के फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर 13 लोगों की हत्या करने वाले पूर्व सैन्य अधिकारी और मनोचिकित्सक निदाल हसन (Nidal Hasan) को इसी साल के आखिर में फायरिंग स्क्वॉड के सामने खड़ा करके मौत की सज़ा दी जाएगी। अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ की दी हुई जानकारी के मुताबिक यह सज़ा सार्वजनिक की जाएगी और पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण (Livestream) भी होगा।

हेगसेथ ने एक खास इंटरव्यू में बताया कि गुरुवार, 3 दिसंबर को दोपहर 1 बजे टेक्सास के फोर्ट हूड में ही, जिसे अब फोर्ट कैवाजोस भी कहा जाता है, सैनिकों का फायरिंग स्क्वॉड हसन को सज़ा देगा। 60 साल से ज़्यादा वक्त के बाद अमेरिकी सेना में यह पहली मौत की सज़ा होगी जिस पर अमल किया जाएगा। हेगसेथ के मुताबिक ऐसे घिनौने जुर्मों का अंजाम क्या होता है, यह समाज और आगे जुर्म करने की सोचने वालों को साफ दिखना चाहिए, इसलिए सज़ा को सार्वजनिक करना और उसका सीधा प्रसारण करना बेहद ज़रूरी है।

पेंटागन ने कहा है कि हमला वर्दी पहने एक कट्टरपंथी ने देश के अपने ही सैनिकों पर किया था, इसलिए सेना के अनुशासन और देश की सुरक्षा का संदेश देने के लिए यह कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हेगसेथ की सिफारिश को आधिकारिक मंज़ूरी दे दी है और इससे सज़ा का रास्ता पूरी तरह खुल गया है।

5 नवंबर 2009 को उस वक्त अमेरिकी सेना के मेजर और मनोचिकित्सक रहे हसन ने फोर्ट हूड के सोल्जर रेडीनेस प्रोसेसिंग सेंटर में गोलियां चलाई थीं। अफगानिस्तान और इराक में तैनाती से पहले मेडिकल जांच के लिए जमा हुए सैनिकों पर उसने अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में 12 सैनिकों समेत 13 लोग मौके पर ही मारे गए और 32 से ज़्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए। एक महिला पुलिस अधिकारी की गोलीबारी में हसन बुरी तरह घायल हुआ और रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से हमेशा के लिए अपाहिज हो गया।

2013 में एक सैन्य ज्यूरी ने हसन को मौत की सज़ा सुनाई थी। तब से वह कैन्सस के फोर्ट लीवेनवर्थ की हाई सिक्योरिटी सैन्य जेल में बंद है। जांच में सामने आया था कि हमले से पहले हसन यमन के अल-कायदा से जुड़े कट्टरपंथी धर्मगुरु अनवर अल-अवलाकी के लगातार संपर्क में था। कोर्ट मार्शल के दौरान हसन ने खुद कबूल किया था कि उसने यह काम अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान में मुसलमानों के खिलाफ लड़ने से रोकने के लिए किया था।

फोर्ट हूड हमले के बाद बराक ओबामा प्रशासन के रुख को लेकर अमेरिका में बड़ा सियासी विवाद खड़ा हुआ था। शुरुआत में पेंटागन और ओबामा प्रशासन ने इस घटना को आतंकी हमला नहीं, बल्कि कामकाज की जगह पर हुई हिंसा (Workplace Violence) माना था। इस वर्गीकरण की वजह से शहीद सैनिकों के परिवारों और घायलों को जंग से जुड़ी सहूलियतें और पर्पल हार्ट मेडल नहीं मिल पाए थे। पीड़ितों के रिश्तेदारों में इससे भारी गुस्सा था। हेगसेथ ने अपने इंटरव्यू में यह पुराना मुद्दा फिर उठाया और ओबामा प्रशासन के रुख की आलोचना की।

अमेरिकी सेना ने फायरिंग स्क्वॉड से आखिरी बार सज़ा नवंबर 1945 में, दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान दी थी। सेना में आखिरी बार किसी भी तरह की मौत की सज़ा पर अमल 13 अप्रैल 1961 को फांसी देकर हुआ था। फिलहाल अमेरिका के 5 राज्यों, आयडाहो, मिसिसिपी, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलिना और यूटा में फायरिंग स्क्वॉड से सज़ा देने का कानूनी प्रावधान है। ट्रंप प्रशासन ने फेडरल मौत की सज़ा के नियमों में बदलाव करके फायरिंग स्क्वॉड का विकल्प फिर चालू कर दिया है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के अलावा चीन, उत्तर कोरिया, सऊदी अरब, सोमालिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भी फायरिंग स्क्वॉड का इस्तेमाल होता है। 3 दिसंबर को होने वाले इस सीधे प्रसारण से मानवाधिकार संगठनों और कानून के जानकारों के बीच सार्वजनिक सज़ा के सही होने पर नई बहस छिड़ने की संभावना है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे