मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:58 IST

IIT बॉम्बे: साहिल वाकोडे की मौत पर छात्रों की 18 मांगें मानी गईं, प्रोफेसर सस्पेंड

तीन दिन के प्रदर्शन के बाद डायरेक्टर ने छात्रों की मांगों के चार्टर पर साइन किए

IIT बॉम्बे: साहिल वाकोडे की मौत पर छात्रों की 18 मांगें मानी गईं, प्रोफेसर सस्पेंड
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुंबई के IIT बॉम्बे कैंपस में तीन दिन से चल रहे छात्र आंदोलन के बाद बड़ी खबर आई है। संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे ने आंदोलनकारी छात्रों की 18 सूत्री मांगों के चार्टर पर दस्तखत कर दिए हैं। यह फैसला रविवार रात प्रशासन और छात्रों के बीच करीब तीन घंटे चली बातचीत के बाद लिया गया। यह पूरा मामला छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है।

डायरेक्टर ने चार्टर पर साइन तो कर दिए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सारी मांगें तुरंत पूरी या लागू हो गई हैं। इन मांगों को अमल में कैसे और कब तक लाया जाएगा, इस पर आगे प्रशासन की तरफ से आधिकारिक जानकारी आना अभी बाकी है।

छात्रों की मुख्य मांगों में साहिल की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच सबसे ऊपर है। इसके अलावा जिस प्रोफेसर पर आरोप लगे हैं उस पर कार्रवाई, टीचरों के लिए आचार संहिता, स्टूडेंट्स के लिए मेंटल हेल्थ और काउंसलिंग सर्विस को और मजबूत करना, और बड़े प्रशासनिक फैसलों में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की मांग रखी गई है। साहिल के बारे में संस्थान ने जो जानकारी सार्वजनिक की थी, उस पर भी छात्रों ने ऐतराज जताते हुए सार्वजनिक माफी मांगी है। साथ ही स्वतंत्र जांच की अंतरिम और अंतिम रिपोर्ट के लिए भी समयसीमा तय करने को कहा गया है।

साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट का सेकंड ईयर स्टूडेंट था। 18 सितंबर को वह हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया। IIT बॉम्बे का कहना है कि उसी दिन परीक्षा के दौरान उसके मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की बात सामने आई थी। संस्थान के मुताबिक साहिल के खिलाफ कोई डिसिप्लिनरी एक्शन शुरू नहीं किया गया था, बल्कि संबंधित टीचरों और डिपार्टमेंट हेड ने उससे बात करके उसकी काउंसलिंग की थी और उसे भरोसा दिलाया था कि इस घटना का उसके एजुकेशनल करियर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।

वहीं साहिल के पिता रवींद्र वाकोडे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी शिकायत के मुताबिक साहिल को पिछले कई महीनों से जातिगत टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। शिकायत में यह भी आरोप है कि उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई थी। ये आरोप फिलहाल जांच का विषय हैं और अभी साबित नहीं हुए हैं, मामले की जांच जारी है।

पिता की शिकायत के बाद पवई पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप के साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार प्रतिबंधक कानून की धाराएं भी शामिल की गई हैं। इस मामले की जांच अब मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है, यानी साहिल की मौत की असली वजह की पड़ताल अब क्राइम ब्रांच कर रही है।

IIT बॉम्बे प्रशासन ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। संस्थान का कहना है कि परीक्षा की घटना के बाद साहिल को उसके करियर को लेकर भरोसा दिलाया गया था। दूसरी तरफ परिवार के आरोपों के बाद पुलिस की स्वतंत्र जांच चल रही है। IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर का पक्ष रखते हुए कहा है कि परीक्षा के दौरान मोबाइल का बिना इजाजत इस्तेमाल एक एकेडमिक गड़बड़ी है।

साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे के छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन शुरू कर दिया था। आंदोलनकारियों की मांग थी कि स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो और प्रशासन की जिम्मेदारी तय की जाए। तीन दिन तक चले इस आंदोलन के बाद डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों से बातचीत की और 18 सूत्री चार्टर पर साइन किए। अब छात्रों और साहिल के परिवार की नजर इस पर टिकी है कि इन मांगों में से कौन सी मांग किस तरीके से और कितने समय में लागू होती है, और क्राइम ब्रांच की जांच में क्या निकलकर सामने आता है।

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