मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
19:12 IST

साहिल वाकोडे आत्महत्या: राज ठाकरे बोले, 2000 के बाद महाराष्ट्र में जात इतनी बढ़ी कि अब IIT तक पहुंची

आईआईटी मुंबई के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या पर मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखकर शिक्षा व्यवस्था और जातीय भेदभाव के आरोपों पर सवाल उठाए हैं।

साहिल वाकोडे आत्महत्या: राज ठाकरे बोले, 2000 के बाद महाराष्ट्र में जात इतनी बढ़ी कि अब IIT तक पहुंची
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

आईआईटी मुंबई के 20 साल के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के मामले पर मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट लिखी है। इसमें उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, छात्रों पर पड़ने वाले दबाव और इस मामले में लगे जातीय उत्पीड़न के आरोपों पर अपनी बात रखी है। राज ठाकरे ने कहा कि सबसे जरूरी सवाल यही है कि साहिल ने आत्महत्या का रास्ता क्यों चुना, इस पर गंभीरता से सोचा जाना चाहिए।

साहिल वाकोडे आईआईटी मुंबई के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में सेकंड ईयर का स्टूडेंट था। उसकी मौत 18 सितंबर को हुई। परीक्षा के दौरान मोबाइल और ChatGPT के इस्तेमाल का आरोप उस पर लगाया गया था। दूसरी तरफ साहिल के परिवार का कहना है कि उसे जातीय भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ा। परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया है और जांच चल रही है। आईआईटी मुंबई प्रशासन पहले यह कह चुका है कि साहिल ने SC/ST सेल या प्रशासन के पास जातीय भेदभाव की कोई शिकायत नहीं की थी।

राज ठाकरे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आईआईटी मुंबई में साहिल वाकोडे नाम के 20 साल के स्टूडेंट की आत्महत्या बेहद दुखद घटना है। परीक्षा के दौरान मोबाइल और चैटजीपीटी इस्तेमाल करने का आरोप आईआईटी प्रशासन ने शुरुआत में लगाया था। जांच पूरी होने से पहले यह आरोप सार्वजनिक करना गलत था, यह मानते हुए प्रशासन ने बाद में माफी भी मांगी। दूसरी तरफ साहिल के परिवार ने जातीय उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, जिन पर केस दर्ज होकर जांच चल रही है। प्रोफेसरों ने भी अपनी बात रखी है। राज ठाकरे ने कहा कि इस पूरे मामले में एक जवान लड़का हमसे चला गया, लेकिन उसे सीधे आत्महत्या का रास्ता क्यों अपनाना पड़ा, इस पर कोई बात नहीं कर रहा।

उन्होंने आगे लिखा कि अगर कोई स्टूडेंट परीक्षा में गड़बड़ी करता है तो उसे रोकना और नियम के मुताबिक कार्रवाई करना प्रोफेसरों की जिम्मेदारी है। लेकिन आरोप साबित होने से पहले मृत छात्र को दोषी ठहराना ठीक नहीं। इसी तरह जातीय उत्पीड़न का आरोप लगते ही जांच पूरी होने से पहले प्रोफेसरों को दोषी मान लेना भी गलत है। राज ठाकरे ने कहा कि इस पूरे मसले पर कहीं भी सही तरीके से सोचा नहीं जा रहा, क्योंकि अब "जात" का मुद्दा आगे कर दिया गया है, जबकि असली सवाल यह है कि एक 20 साल के लड़के को एक घटना के बाद ऐसा क्यों लगा कि उसके जीवन के सारे रास्ते बंद हो गए हैं।

राज ठाकरे ने कहा कि वे अपने भाषणों में कई बार कह चुके हैं कि साल 2000 के बाद महाराष्ट्र में जात इतनी फैल गई है कि बगल में स्कूल में बैठने वाला स्टूडेंट किस जात का है, यह बताया जाने लगा है, और सालों से साथ खाना खाने वाले ऑफिस के कर्मचारी भी एक-दूसरे को जात के नजरिए से देखने लगे हैं। यह जहर अब आईआईटी तक पहुंच गया है। पंडित नेहरू ने आईआईटी को आधुनिक भारत के मंदिर कहा था, और उसी आईआईटी में एक स्टूडेंट की आत्महत्या हुई, एक साथी हमसे चला गया, इसके बजाय यह बहस चल रही है कि यह सब जात की वजह से हुआ, इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं हो सकता।

राज ठाकरे ने कहा कि आईआईटी हो या इससे पहले की कोई भी कॉम्पिटिटिव एग्जाम, ये अब जानलेवा होती जा रही हैं। चंद सीटों के लिए लाखों स्टूडेंट बैठते हैं, सिलेक्शन के बाद पढ़ाई का बोझ रहता है, फिर कैंपस सिलेक्शन में क्या होगा इसका तनाव रहता है। आईआईटी हो या आईआईएम, अब पहले जैसी अच्छी सैलरी कैंपस सिलेक्शन में नहीं मिलती। यह डिप्रेशन सिर्फ आईआईटी के स्टूडेंट्स तक सीमित नहीं, बल्कि कॉमर्स, आर्ट्स के स्टूडेंट्स से लेकर डॉक्टर्स और इंजीनियर्स तक सबको यह तनाव है। इसी डिप्रेशन में साहिल ने आत्महत्या की। राज ठाकरे ने सवाल किया कि इस पूरी तरह टूट चुकी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाकर उसे बदला जाए, या आत्महत्या करने वाले स्टूडेंट और उससे जवाब मांगने वाले की जात निकालते रहा जाए।

राज ठाकरे ने कहा कि यह किसी सरकार का मुद्दा नहीं है। पिछले 30-40 साल में शिक्षा के बाजारीकरण के चक्कर में पूरी भारतीय शिक्षा व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया गया है, इसमें जड़ से बदलाव लाना जरूरी है। हाल ही में शुरू हुए जेन जी आंदोलन से इसकी शुरुआत होती दिख रही थी, तभी यह घटना सामने आई। उन्होंने स्टूडेंट्स से अपील की कि उनके आंदोलन को देशभर से समर्थन इसलिए मिला क्योंकि उनका मुद्दा व्यवस्था की खामियों को ठीक करने का था, और उनका आंदोलन इसी रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा रहा तो सरकार को कई सवालों के जवाब देने होंगे और कुछ कदम भी उठाने होंगे, लेकिन सरकार यह करना चाहती है या नहीं, यह अलग बात है क्योंकि जात-धर्म का हथियार हमेशा सरकार के पास मौजूद रहता है और एक बार जात-धर्म का मुद्दा ला दिया जाए तो असली विषय भटकाना आसान हो जाता है, इसलिए इस चक्कर में कोई न पड़े।

राज ठाकरे ने बताया कि आईआईटी मुंबई के स्टूडेंट्स ने काउंसलिंग की व्यवस्था, 24 घंटे साइकियाट्रिस्ट की उपलब्धता, शिकायत दर्ज होने पर उसका सही तरीके से समाधान होने की पारदर्शिता, और अनुशासन तोड़ने पर कार्रवाई के दौरान स्टूडेंट टूटे नहीं ऐसी व्यवस्था की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि आंदोलन की असली दिशा यही होनी चाहिए, और अगर यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था की खामियां दूर करने के लिए आगे बढ़ा तो सरकार और प्रशासन को इसका जवाब देना होगा और कदम भी उठाने होंगे।

अभी कोई अपडेट नहीं

खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे