आईआईटी छात्र की खुदकुशी: बीएसपी नेता ने सीबीआई जांच और परिवार को 5 करोड़ मदद की मांग की
आईआईटी बॉम्बे के दूसरे साल के छात्र साहिल वाकोडे की खुदकुशी के बाद जातिगत भेदभाव के आरोप, बीएसपी नेता संदीप ताजणे ने सीबीआई जांच की मांग उठाई।
आईआईटी बॉम्बे में बीटेक के दूसरे साल में पढ़ने वाले साहिल रविंद्र वाकोडे की खुदकुशी ने एक बार फिर देश के टॉप एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में सामाजिक बराबरी, स्टूडेंट्स की सेफ्टी और कथित जातिगत भेदभाव जैसे सवालों को सामने ला दिया है।
साहिल के परिवार का आरोप है कि उसे जातिगत आधार पर परेशान किया जा रहा था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएसपी के महाराष्ट्र के पूर्व अध्यक्ष डॉ एडवोकेट संदीप ताजणे ने मंगलवार को साहिल की मौत की परिस्थितियों की सीबीआई जांच कराने और परिवार को सरकार की तरफ से 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद देने की मांग रखी।
ताजणे ने कहा, "अगर देश के किसी बड़े शिक्षण संस्थान में एडमिशन पाने वाला बहुजन छात्र जातिगत पूर्वाग्रह, अपमान या मानसिक दबाव का शिकार होता है, तो इसे सिर्फ एक छात्र की निजी त्रासदी मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। यह पूरे एजुकेशन सिस्टम की सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।"
उन्होंने मांग की कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना था कि सिर्फ जिम्मेदार लोगों को सस्पेंड कर देना काफी नहीं होगा, बल्कि भेदभाव करने वाली प्रैक्टिस के लिए संस्थानों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
रोहित वेमुला की खुदकुशी का हवाला देते हुए ताजणे ने कहा कि हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में पिछड़े समुदायों के स्टूडेंट्स की सेफ्टी को लेकर लगातार बनी चिंताओं को देखते हुए सरकार को मौजूदा सिस्टम की गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री साहिल के मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें। ताजणे ने आगे आरोप लगाया कि सिर्फ केंद्रीय शिक्षा मंत्री बदलने से आरएसएस के नेतृत्व वाली सरकार का एससी और एसटी छात्रों की एजुकेशनल तरक्की के प्रति रवैया नहीं बदलेगा।
संसद में सरकार की तरफ से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2018 से 2023 के बीच आईआईटी में एससी/एसटी स्टूडेंट्स की कई खुदकुशी की घटनाएं सामने आईं। 2023 में राज्यसभा में दिए गए एक जवाब के मुताबिक 2018 में दो एससी स्टूडेंट्स, 2019 में एक एससी स्टूडेंट, 2022 में एक एससी और एक एसटी स्टूडेंट, और 2023 में दो एससी स्टूडेंट्स ने खुदकुशी की।
साहिल की मौत एक परीक्षा से जुड़ी घटना के बाद हुई। इंस्टीट्यूट ने पहले परीक्षा प्रक्रिया को लेकर एक स्पष्टीकरण जारी किया था, लेकिन बाद में अपने पहले के बयान की कुछ बातों के लिए माफी मांगी और कहा कि मामले की जांच चल रही है।
पुलिस जांच अब क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई है। हालांकि ताजणे की मांग है कि पूरे मामले को स्वतंत्र और व्यापक जांच के लिए सीबीआई को सौंपा जाए।
ताजणे ने कहा, "जातिगत भेदभाव के आरोपों को एक निष्पक्ष जांच के जरिए साबित या खारिज किया जाना चाहिए। लेकिन स्टूडेंट्स और उनके परिवारों की चिंताओं को सिर्फ 'एकेडमिक प्रेशर' कहकर खारिज कर देना खतरनाक होगा।"
उन्होंने हर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट में एससी और एसटी स्टूडेंट्स के लिए खासतौर पर सुलभ शिकायत निवारण सिस्टम, स्वतंत्र सोशल ऑडिट और जवाबदेह काउंसलिंग सिस्टम बनाने की मांग की।
इन मांगों ने साहिल की मौत की जांच को और गंभीर बना दिया है, जातिगत भेदभाव के आरोपों के चलते अब इंस्टीट्यूट की जवाबदेही और स्टूडेंट्स की सेफ्टी इस पूरे विवाद के केंद्र में आ गई है।
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