मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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16:41 IST

16 अक्टूबर से राज्य के सभी शहरों-गांवों में कम से कम 10% पानी कटौती, 31 अगस्त 2027 तक का प्लान

अल नीनो के असर और कम बारिश को देखते हुए राज्य सरकार ने स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को 16 अक्टूबर 2026 से कम से कम 10% पानी कटौती के निर्देश दिए हैं।

16 अक्टूबर से राज्य के सभी शहरों-गांवों में कम से कम 10% पानी कटौती, 31 अगस्त 2027 तक का प्लान
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र सरकार ने पानी के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदियां लगाने का फैसला किया है। वजह अल नीनो का असर, कम बारिश और सीमित पानी का भंडार है, और पानी अगले साल तक चलाना है। 16 अक्टूबर 2026 से राज्य की सभी नागरी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में कम से कम 10% पानी कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं। यह प्लान सिर्फ कुछ हफ्तों या महीनों का नहीं है। इसमें 31 अगस्त 2027 तक उपलब्ध पानी का हिसाब रखा गया है।

इस साल के मान्सून में राज्य को उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं मिली। 2026 में बारिश का बंटवारा भी बराबर नहीं रहा। कुछ इलाकों में ठीक-ठाक पानी गिरा, लेकिन कई जिलों में बारिश की कमी बनी रही। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 21 जिलों में बारिश की कमी दर्ज हुई है और मान्सून भी जल्दी लौट गया। इसलिए बांधों और जलाशयों के पानी को अगली गर्मी तक संभालकर इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है।

अल नीनो का असर सरकार के प्लान का अहम हिस्सा है। इससे बारिश कम होने का खतरा रहता है, और तापमान बढ़ने पर भाप बनकर उड़ने वाला पानी भी बढ़ता है, जिससे मौजूद पानी पर और दबाव आ सकता है। यानी सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि कितनी बारिश हुई, बल्कि यह है कि मौजूद पानी पूरे साल कैसे चलाया जाए।

सरकार ने सभी महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं और ग्रामपंचायतों को कम से कम 10% पानी कटौती लागू करने को कहा है। मकसद मौजूदा सीमित भंडार का गैरजरूरी इस्तेमाल रोकना और पीने के पानी को अगले साल तक सुरक्षित रखना है। यह फैसला सिर्फ लोगों के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। लीकेज रोकना, साफ किए गए गंदे पानी का दोबारा इस्तेमाल, उद्योगों में पानी की खपत घटाना और सिंचाई का पानी देते वक्त प्राथमिकता तय करना, इन सब उपायों को मिलाकर यह फैसला लिया गया है।

जलसंपदा विभाग ने बांध-वार और इस्तेमाल-वार पानी का बारीक प्लान बनाया है। सबसे बड़ा नियम यह है कि पीने के पानी को सबसे ऊपर रखा जाएगा। 31 अगस्त 2027 तक पीने के पानी की जरूरत को देखकर जलाशयों में भंडार रखा जाएगा। इसमें भाप बनकर होने वाला नुकसान, जलाशय में जमा गाद और गैरकानूनी तरीके से उठाया जाने वाला पानी भी गिना जाएगा।

इसके अलावा हर बांध में 10% अतिरिक्त आपातकालीन बफर भंडार रखने का फैसला हुआ है। बहुत गंभीर हालात बनने पर तकनीकी जांच के बाद बांध के 'डेड स्टोरेज' का पानी इस्तेमाल करने का विकल्प भी रखा गया है। लेकिन यह रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए नहीं, सिर्फ आपातकाल के लिए है।

खेती पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था में खेती की बड़ी भूमिका है। सिंचाई के पानी के लिए भी साफ प्राथमिकता तय की गई है। पहले पीने का पानी, फिर जानवरों और चारे की जरूरत पूरी होगी। उसके बाद ही बचा हुआ पानी सिंचाई के लिए छोड़ा जाएगा। सिंचाई में भी पहले रब्बी सीजन की भुसार और चारा फसलों को तरजीह मिलेगी, फिर बाकी रब्बी फसलों का नंबर आएगा। पानी बचा रहा तभी बारहमासी फसलों को पानी की इजाजत दी जाएगी। इससे ज्यादा पानी वाली फसलों की प्लानिंग पर असर पड़ सकता है। ड्रिप, स्प्रिंकलर और पानी बचाने वाले दूसरे तरीकों की जरूरत और बढ़ेगी।

उद्योगों पर भी शर्त लगी है। राज्य के उद्योगों को अपने इस्तेमाल के कम से कम 30% पानी का दोबारा इस्तेमाल या रीसाइकल करना जरूरी किया गया है। यानी उन्हें ताजे पानी पर निर्भरता घटाकर साफ किया हुआ पानी फिर से काम में लेना होगा।

महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं और ग्रामपंचायतों से कहा गया है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पूरी क्षमता से चलाएं। साफ किया गया पानी बागवानी, निर्माण और धुलाई जैसे, पीने से अलग कामों में इस्तेमाल करने के निर्देश हैं। साथ ही पानी की लीकेज ढूंढकर तुरंत ठीक करने के लिए खास मुहिम चलाने को कहा गया है।

बांधों, नदियों और नहरों से होने वाले गैरकानूनी पानी उठाव को रोकने के लिए राजस्व, पुलिस और जलसंपदा विभाग की संयुक्त टीमें काम करेंगी। ये टीमें संवेदनशील इलाकों में गश्त करेंगी। गैरकानूनी पंप और पानी उठाने में इस्तेमाल होने वाला सामान जब्त करने की कार्रवाई भी होगी।

सरकार के फैसले से साफ है कि इस बार का जल संकट सिर्फ मौजूदा कुछ महीनों का नहीं माना जा रहा। आने वाली गर्मी, बढ़ता तापमान, भाप बनकर उड़ता पानी और अगला मान्सून शुरू होने तक का वक्त प्रशासन को ध्यान में रखना होगा। जलसंपदा, राजस्व, कृषि, उद्योग और नगरविकास विभागों को तालमेल से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। पालकमंत्री और कैनाल एडवाइजरी कमेटियों के जरिए पानी के भंडार की नियमित समीक्षा होगी।

जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन ने भी लोगों और सभी सरकारी महकमों से अपील की है कि पानी की हर बूंद संभालकर इस्तेमाल करें और प्रशासन का साथ दें।

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