साहिल वाकोडे आत्महत्या : IIT मुंबई प्राध्यापक पर जातीय उत्पीड़न का FIR दर्ज
IIT मुंबई के B.Tech छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद पिता की शिकायत पर प्राध्यापक सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ केस दर्ज हुआ, मामला मुंबई क्राइम ब्रांच के पास।
मुंबई के IIT कैंपस में B.Tech के दूसरे साल में पढ़ने वाले साहिल वाकोडे की मौत के मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। साहिल के पिता की शिकायत के बाद प्राध्यापक सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया गया है। इस मामले में अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार प्रतिबंधक कानून की धाराएं भी लगाई गई हैं। जांच अब मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।
साहिल के पिता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि पिछले कुछ महीनों से बेटे का जातीय आधार पर उत्पीड़न किया जा रहा था। उनका दावा है कि प्राध्यापक की तरफ से जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत में IIT मुंबई के डायरेक्टर शिरीष बी. केदारे के साथ-साथ कुछ और प्राध्यापकों और वरिष्ठ अधिकारियों का भी नाम लिया गया है। हालांकि ये सारे आरोप फिलहाल जांच का हिस्सा हैं और इनकी अलग से पड़ताल चल रही है।
इस बीच, साहिल की मौत से कुछ घंटे पहले वह एक परीक्षा में बैठा था। IIT मुंबई का कहना है कि परीक्षा के दौरान उसके पास मोबाइल पाया गया था। संस्थान के मुताबिक, ऐसा सामने आया था कि उसने प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड करके जवाब निकालने की कोशिश की। लेकिन IIT का दावा है कि इस मामले में साहिल के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। संस्थान ने साफ किया है कि इंस्ट्रक्टर और विभाग प्रमुख ने उससे बात करके काउंसलिंग की थी और उसे बताया गया था कि इस घटना का असर उसके शैक्षणिक करियर पर नहीं पड़ेगा।
दूसरी तरफ, साहिल के परिवार ने संस्थान के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का आरोप है कि साहिल को लंबे समय से मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही थी। पुलिस इन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए अलग-अलग पहलुओं से पूछताछ कर रही है। IIT मुंबई के डायरेक्टर शिरीष केदारे ने संस्थान में जातीय भेदभाव होने के आरोप को खारिज किया है।
साहिल की मौत के बाद IIT कैंपस में छात्रों के मानसिक तनाव का मुद्दा भी फिर से चर्चा में आ गया है। Global IIT Alumni Support Group के अलग से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में IIT सिस्टम में कम से कम 160 छात्रों की मौत आत्महत्या से हुई है। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि यह कोई सरकारी आधिकारिक और पूरा डेटा नहीं है, बल्कि स्वतंत्र रूप से जुटाया गया आंकड़ा है।
अब साहिल वाकोडे मामले में पुलिस की जांच से यह साफ होगा कि असल वजहें क्या थीं और शिकायत में लगे आरोपों में कितनी सच्चाई है। इसीलिए इस केस में आगे की जांच और उसकी रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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