मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:26 IST

नीट पीजी 2026: शून्य या निगेटिव्ह नंबर वालों को भी काउंसलिंग मिलेगी या नहीं, फिर उठा सवाल

नीट पीजी 2026 का रिजल्ट आने के बाद क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल पर बहस फिर तेज हो गई है।

नीट पीजी 2026: शून्य या निगेटिव्ह नंबर वालों को भी काउंसलिंग मिलेगी या नहीं, फिर उठा सवाल
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नीट पीजी 2026 का रिजल्ट आ चुका है और रिजल्ट के बाद क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। नेशनल बोर्ड ऑफ एक्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेस (NBEMS) के जारी रिजल्ट के मुताबिक इस बार 2,63,535 उम्मीदवार क्वालिफाई हुए हैं।

दूसरी तरफ परीक्षा देने वालों में 258 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके नंबर शून्य या उससे भी कम आए हैं। बताया गया है कि सबसे कम नंबर पाने वाले उम्मीदवार का स्कोर -59 है और उसका पर्सेंटाइल शून्य है। इसलिए सवाल उठ रहा है कि पिछले कुछ सालों की तरह इस बार भी 0 पर्सेंटाइल या निगेटिव नंबर वाले उम्मीदवारों को काउंसलिंग में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा या नहीं।

कोविड-19 के बाद 2023 में पहली बार नीट पीजी का क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाकर 0 किया गया था। इससे बहुत कम और निगेटिव नंबर पाने वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग प्रक्रिया के लिए पात्र हो गए थे। इसके बाद 2025 में भी कटऑफ में बड़ी कटौती की गई थी। इसकी बड़ी वजह पीजी की सीटें खाली रह जाना थी। NBEMS ने कोर्ट में कहा था कि देशभर में पीजी मेडिकल की 18 हजार से ज्यादा सीटें खाली हैं और उन्हें भरने के लिए ही पात्रता के नियम बदले गए।

क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाने के फैसले पर मेडिकल क्षेत्र के एक तबके ने सवाल उठाए हैं। फरवरी 2026 में इसी मुद्दे से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें सरकार और NBEMS से जवाब मांगा गया। याचिकाकर्ताओं ने कटऑफ घटाने पर आपत्ति जताते हुए इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 से जोड़ा था। 0 पर्सेंटाइल के फैसले का UDFA (युएफडीए) ने भी विरोध किया था। इस संगठन की दलील थी कि बहुत कम या निगेटिव नंबर वालों को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल ट्रेनिंग में दाखिला मिला तो मेडिकल पढ़ाई के स्तर और आगे चलकर मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

शून्य पर्सेंटाइल के खिलाफ जनवरी 2026 में मामला दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंचा था। कोर्ट ने पात्रता नियम घटाने के फैसले में दखल देने से मना कर दिया था। पब्लिक हेल्थ के खतरे और मेडिकल स्तर गिरने की दलीलें भी कोर्ट के सामने रखी गई थीं, लेकिन कोर्ट को प्रक्रिया में ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं दिखी जिसकी वजह से चल रही काउंसलिंग में दखल दिया जाए। NMC की तरफ से भी कहा गया था कि काउंसलिंग में ज्यादा रैंक वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है।

अब सीटों की बात करें तो NMC की जारी सीट मैट्रिक्स के मुताबिक इस साल देश में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल की कुल 58,000 सीटें हैं। पिछले साल ये सीटें 52,173 थीं। इस साल की परीक्षा के लिए 2,73,096 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 2,65,980 ने परीक्षा दी। सीटों के इस आंकड़े में 33,088 सरकारी, 21,892 प्राइवेट और 8,197 यूनिवर्सिटी की सीटें भी शामिल हैं।

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