स्कूली बच्चे भी लें हिस्सा: सेवा फर्स्ट इनोव्हेशन चॅलेंज के लिए मंत्री लोढा की अपील
मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने राज्य के स्कूली विद्यार्थियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से स्पर्धा में हिस्सा लेने की अपील की है। अर्ज 17 ऑक्टोबर 2026 तक किए जा सकते हैं।
कौशल्य, रोजगार, उद्योजकता और नावीन्यता मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने राज्य के स्कूली विद्यार्थियों से 'सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज' में हिस्सा लेने की अपील की है। यह बहुराज्यीय नवाचार स्पर्धा केंद्रीय कौशल्य विभाग की तरफ से आयोजित की गई है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र शासन का कौशल्य, रोजगार, उद्योजकता और नाविन्यता विभाग कोशिश कर रहा है कि राज्य के सारे स्कूली विद्यार्थी इस स्पर्धा में शामिल हों। विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नाविन्यता के क्षेत्र में काम करने वाली सोलापुर की स्टेट इनोवेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन का सहयोग मिलेगा। मंत्री ने इस क्षेत्र में काम करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं से भी आगे आने को कहा है।
मंत्रालय में स्टेट इनोवेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (सर) के साथ हुई बैठक में लोढा बोल रहे थे। मकसद यह था कि राज्य में जिला परिषद के स्कूलों के स्तर पर भी भागीदारी बढ़े। बैठक में महाराष्ट्र राज्य नाविन्यता सोसायटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. श्रीकांत पाटिल, फाउंडेशन के राज्य समन्वयक सिद्धराम माशाले और बालासाहेब वाघ मौजूद थे।
लोढा ने बताया कि स्पर्धा के लिए आवेदन की प्रक्रिया 21 सितंबर से शुरू हो चुकी है और 17 अक्टूबर 2026 तक आवेदन किया जा सकता है। इसमें नवोन्मेषक, विद्यार्थी, विद्यार्थियों के समूह, शोधकर्ता, प्राध्यापक, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, कंपनियां, सामाजिक संस्थाएं, शैक्षणिक और शोध संस्थाएं और दूसरी इनोवेशन टीमें हिस्सा ले सकती हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों में स्थानीय समस्याएं समझने और उनके रचनात्मक हल खोजने की बड़ी क्षमता है। स्पर्धा का मुख्य मकसद यही है कि यह क्षमता सिर्फ स्कूल प्रोजेक्ट तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के काम आने वाले असली नवाचारों में बदले। इसके लिए विद्यार्थियों को समस्या पहचानने से लेकर हल विकसित करने और उसे जमीन पर उतारने तक मार्गदर्शन मिलना जरूरी है।
स्पर्धा में 10 प्रमुख क्षेत्रों के हर एक के 5 उपक्षेत्रों में से नए-नए विचार चुने जाएंगे। इस तरह कुल 50 विजेताओं को 10 लाख रुपये का वर्क ऑर्डर दिया जाएगा। यानी विद्यार्थियों की कल्पनाओं को सिर्फ पुरस्कार नहीं मिलेगा, उन्हें असल में लागू करने का मौका भी मिलेगा।
लोढा ने एनजीओ से कहा कि जिला परिषद के स्कूलों समेत ग्रामीण इलाकों के अलग-अलग स्कूलों तक इस पहल की जानकारी पहुंचाएं। महिला, युवा और सबके लिए खुले वर्गों से ज्यादा से ज्यादा नए-नए विचार आएं, इसके लिए भी उन्होंने कोशिश करने की अपील की।
विद्यार्थी खेती, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण, यातायात समेत रोजमर्रा की जिंदगी की समस्याओं पर व्यावहारिक हल सुझाएं। एनजीओ विद्यार्थियों को स्थानीय समस्या पहचानने, हल विकसित करने और स्पर्धा के लिए आवेदन जमा करने की पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन दें। अपने कार्यक्षेत्र के स्कूलों की संख्या, कितने विद्यार्थियों तक पहुंचना है, कितने विद्यार्थियों को जानकारी देनी है और कितने गुणवत्तापूर्ण आवेदन जमा करवाने हैं, इस पर साफ कार्ययोजना बनाई जाए। जमीनी स्तर के विद्यार्थियों की कल्पनाओं को राज्यस्तरीय मंच दिलाने के लिए शासन, स्कूल और स्वयंसेवी संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। स्पर्धा में हिस्सा लेने के लिए https://sevainnovationchallenge.in/ पर संपर्क करना है।
फाउंडेशन के राज्य समन्वयक सिद्धराम माशाले ने कहा कि सोलापुर की स्टेट इनोवेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (सर फाउंडेशन) राज्य के स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीक और नए-नए उपक्रमों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। संस्था स्कूली शिक्षा विभाग के सहयोग से कौशल्य, रोजगार, उद्योजकता और नाविन्यता विभाग की इस स्पर्धा की जानकारी जिला परिषद स्कूलों के विद्यार्थियों तक पहुंचाएगी। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की नई कल्पनाओं को राज्य और राष्ट्रीय स्तर का मंच देने के लिए भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।