शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

नेपच्यून के पार मिली नई वस्तु, वैज्ञानिकों का दावा: हो सकता है बौना ग्रह

नेपच्यून के पार मिली नई वस्तु, वैज्ञानिकों का दावा: हो सकता है बौना ग्रह तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

चिली की वेरा सी. रुबिन वेधशाला के डेटा से मिली '2026 ED138' को वैज्ञानिक संभावित बौना ग्रह बता रहे हैं। आधिकारिक मान्यता के लिए आकार और वजन तय होना बाकी है।

सौरमंडल के बेहद ठंडे और अंधेरे किनारे पर खगोलशास्त्रियों को एक हैरान करने वाला पिंड मिला है। अभी इसे '2026 ED138' नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह एक संभावित 'बौना ग्रह' (Dwarf Planet) हो सकता है। यह खोज चिली की वेरा सी. रुबिन वेधशाला (Vera C. Rubin Observatory) के जुटाए डेटा की मदद से हुई है।

अगर यह सचमुच बौना ग्रह साबित हुआ, तो खगोलशास्त्र के इतिहास में यह बहुत अहम घटना होगी। वजह यह है कि अब तक सौरमंडल में सिर्फ 5 बौने ग्रहों की आधिकारिक पुष्टि हुई है: प्लूटो, सेरेस, एरिस, हाउमिया और माकेमाके।

यह पिंड इतना बड़ा है कि अपने ही भारी गुरुत्वाकर्षण की वजह से लगभग गोल हो गया हो, ऐसी संभावना है। यही खासियत एक आम क्षुद्रग्रह या अंतरिक्ष के पत्थर को बौने ग्रह से अलग करती है। नेपच्यून की कक्षा के पार मौजूद इस बर्फीले पिंड का व्यास 600 से 1,500 किलोमीटर (करीब 373 से 972 मील) होने का अंदाजा लगाया गया है।

इसे खोजा है सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स (CfA | Harvard & Smithsonian) के खगोलशास्त्री मैथ्यू होलमन (Matthew Holman) ने। 13 अक्टूबर 2026 को होलमन ने अपने साथी केविन नेपियर के साथ मिलकर बनाए एडवांस सर्च कोड से रुबिन वेधशाला के डेटाबेस में इस वस्तु को ढूंढा। खोज का ऐलान करते हुए होलमन ने कहा, "मेरा पहला रिएक्शन यह था कि क्या यह सच में सही है? क्योंकि इतनी दूरी पर ऐसी विशाल चीजें बहुत कम होती हैं। मेरे कोड से कहीं कोई गलती तो नहीं हुई, यह जांचने के लिए मैंने फौरन रुबिन वेधशाला के कैटलॉग में दोबारा जांच शुरू कर दी।"

आगे की जांच में पता चला कि रुबिन दूरबीन ने 2026 की शुरुआत में मार्च से जुलाई के बीच इस वस्तु को कई बार दर्ज किया था। इतना ही नहीं, 2016 के पुराने दूरबीन डेटा के कंप्यूटर विश्लेषण में भी इस पिंड के निशान मिले। सूरज से बहुत दूर होने के बावजूद यह उम्मीद से काफी ज्यादा चमकदार दिख रहा था। इससे वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि नेपच्यून के पार मिलने वाली बाकी आम ट्रांस-नेपच्यूनियन वस्तुओं (TNOs) के मुकाबले यह आकार में काफी बड़ा होना चाहिए।

इस खोज का श्रेय उत्तरी चिली में 8,799 फुट (2,682 मीटर) ऊंचे सेरो पाकोन पहाड़ पर बनी वेरा सी. रुबिन वेधशाला को जाता है। वेधशाला में 28 फुट (8.4 मीटर) चौड़ा मुख्य शीशा लगा है। इस दूरबीन ने अप्रैल 2025 में अपनी पहली तस्वीरें (First Light) लीं और जून 2026 से उसने 10 साल का 'लेगसी सर्वे ऑफ स्पेस एंड टाइम' (LSST) प्रोजेक्ट आधिकारिक तौर पर शुरू किया है।

इस प्रोजेक्ट में 3.2 गिगापिक्सेल का कैमरा इस्तेमाल हो रहा है, जो इंसान का बनाया अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल कैमरा है। यह कैमरा हर कुछ दिन में पूरे दक्षिणी आकाश की हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग करता है। इससे ब्रह्मांड में पल-पल होने वाले बदलाव, नए क्षुद्रग्रह और दूर के बौने ग्रह ढूंढना आसान हुआ है।

'2026 ED138' फिलहाल सूरज से पूरे 46 खगोलीय इकाई (AU) की दूरी पर है। एक 'AU' का मतलब धरती और सूरज के बीच की औसत दूरी (करीब 150 मिलियन किलोमीटर) होता है। तुलना करें तो मशहूर बौना ग्रह प्लूटो सूरज से औसतन 40 AU दूर है, यानी यह नया पिंड प्लूटो से भी ज्यादा दूरी पर सूरज की परिक्रमा कर रहा है। इसकी कक्षा सौरमंडल के प्रतल से 25 अंश झुकी हुई (Tilted) है, जिससे अंदाजा है कि इस पर नेपच्यून के गुरुत्वाकर्षण का असर पड़ा होगा।

जब तक खगोलशास्त्री इस पिंड का सटीक आकार और वजन तय नहीं कर लेते, तब तक अंतरराष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ (IAU) इसे आधिकारिक 'बौना ग्रह' नहीं मानेगा। इसके लिए आने वाले समय में नासा (NASA) के जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) की मदद से इन्फ्रारेड रोशनी में और बारीकी से निरीक्षण किए जाएंगे।

#नागपुर#दुनिया#PT24#World#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे